*फर्जी ‘PRESS’ पर लखनऊ पुलिस का हंटर: भ्रामक अफवाहों पर बोले भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी के संस्थापक एके बिंदुसार*
नई दिल्ली से करन छौकर की खास रिपोर्ट।
हजरतगंज चौराहे पर फर्जी ‘PRESS’ लिखी गाड़ियों और अनधिकृत यूट्यूबर्स के खिलाफ लखनऊ पुलिस द्वारा चलाए गए अभियान के बाद उठ रहे सवालों पर *भारतीय मीडिया फाउंडेशन (National Core Committee)* के संस्थापक *एके बिंदुसार* ने स्थिति साफ की है। सोशल मीडिया पर चल रही उन चर्चाओं को उन्होंने पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनमें इसे डिजिटल मीडिया को खत्म करने या नागरिक पत्रकारिता को दबाने की साजिश बताया जा रहा था।
एके बिंदुसार ने इस पूरे घटनाक्रम पर तथ्यपरक विश्लेषण रखते हुए निम्नलिखित प्रमुख बातें कहीं:
1. शासन और पुलिस की कार्रवाई पूरी तरह न्यायसंगत
“लखनऊ पुलिस द्वारा फर्जी ‘PRESS’ लिखी गाड़ियों पर की गई कार्रवाई कानून और पुलिस प्रशासन के स्पष्ट निर्देशों के तहत है। ‘मोटर वाहन अधिनियम’ के तहत निजी गाड़ियों पर अवैध रूप से ‘PRESS’ लिखना नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। कई असामाजिक तत्व पुलिस चेकिंग से बचने के लिए ‘PRESS’ के नाम का दुरुपयोग करते हैं, जिस पर रोक लगाना बेहद जरूरी था।”
2. डिजिटल मीडिया को समाप्त करने का दावा पूरी तरह भ्रामक
“यह कार्रवाई किसी भी कीमत पर डिजिटल मीडिया के खिलाफ नहीं, बल्कि ‘प्रेस’ के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ है। सिर्फ एक यूट्यूब चैनल या ब्लॉग बना लेने से कोई व्यक्ति अपनी निजी गाड़ी पर ‘PRESS’ लिखने का कानूनी हकदार नहीं बन जाता। पुलिस सत्यापन में वही लोग पकड़े जा रहे हैं जो वैध पहचान पत्र या पंजीकृत संस्थान का प्रमाण नहीं दे सके। सरकार खुद डिजिटल मीडिया को व्यवस्थित करने के लिए नीतियां बना रही है, ऐसे में इसे बंद करने की योजना बताना पूरी तरह गलत है।”
3. नागरिक पत्रकारिता पर कोई खतरा नहीं
“यह कार्रवाई नागरिक पत्रकारिता (Citizen Journalism) को प्रभावित नहीं करती। देश का कोई भी नागरिक सवाल उठाने और रिपोर्टिंग करने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन इसके लिए अपनी गाड़ी पर अनधिकृत रूप से ‘PRESS’ लिखना अनिवार्य नहीं है। प्रेस के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े पर लगाम लगने से केवल वास्तविक और निष्पक्ष पत्रकारों की साख (Credibility) और मजबूत होगी।”
भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल के संस्थापक एके बिंदुसार ने स्पष्ट किया कि लखनऊ के हजरतगंज में हुई यह कार्रवाई *यातायात नियमों का पालन कराने और मीडिया की गरिमा को बचाने के लिए की गई एक प्रशासनिक प्रक्रिया* है। इसका उद्देश्य किसी भी वैध डिजिटल मीडिया या निष्पक्ष पत्रकार को परेशान करना नहीं है।









