पत्रकारों के सम्मान और सुरक्षा का नया युग: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फडणवीस का ऐतिहासिक फैसला

*पत्रकारों के सम्मान और सुरक्षा का नया युग: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फडणवीस का ऐतिहासिक फैसला,*
*भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी द्वारा 23 अगस्त 2026 को लखनऊ में आयोजित मीडिया अधिकार महारैली में तय होगा आगे की रणनीति*

महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पत्रकारों को धमकाने, उन पर हमले करने या उनके काम में बाधा डालने वालों के खिलाफ ‘सीधे जेल’ का कड़ा संदेश देकर न केवल पत्रकारों का हौसला बढ़ाया है, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की गरिमा को नई मजबूती दी है।
इस साहसिक निर्णय का भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल कोर कमेटी) ने पुरजोर स्वागत किया है। संगठन के संस्थापक एके बिंदुसार और जॉइंट राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र वाघ ने मुख्यमंत्री के इस फैसले को न केवल ऐतिहासिक करार दिया है, बल्कि इसे पूरे देश के लिए एक नजीर बताया है।
“दोषियों को नहीं बख्शा जाएगा”: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का संकल्प,
मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि लोकतंत्र के प्रहरी माने जाने वाले पत्रकारों पर हमला, सीधे तौर पर लोकतांत्रिक व्यवस्था पर प्रहार है। प्रशासन को दिए गए सख्त निर्देशों में FIR दर्ज करने से लेकर अपराधियों को तुरंत सलाखों के पीछे भेजने और मामलों की फास्ट-ट्रैक सुनवाई सुनिश्चित करने तक की रूपरेखा तैयार की गई है। यह स्पष्ट संकेत है कि अब ‘पत्रकारिता’ को डराने वालों को कोई राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण नहीं मिलेगा।
वही दूसरी ओर लखनऊ की महा रैली: लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की हुंकार,
इस सकारात्मक पहल के बीच, भारतीय मीडिया फाउंडेशन ने आगामी 23 अगस्त को लखनऊ में एक ‘महा रैली’ का ऐलान किया है। इस रैली को लेकर संगठन के संस्थापक एके बिंदुसार ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक सभा नहीं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के हक, अधिकार और सम्मान की ‘हुंकार’ होगी।
> *”23 अगस्त की यह महा रैली यह स्पष्ट कर देगी कि वास्तव में राजनीतिक दलों की मंशा मीडिया की स्वतंत्रता और सुरक्षा को लेकर क्या है। जो दल पत्रकारों के संरक्षण और उनके स्वाभिमान के साथ खड़े होंगे, देश की जनता और मीडिया जगत उन्हें परखेगा।”*
>
एक नई दिशा का आगाज़,
महाराष्ट्र सरकार द्वारा लिया गया यह निर्णय उन तमाम राज्य सरकारों के लिए एक सबक है जो अब तक पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर उदासीन रही हैं। भारतीय मीडिया फाउंडेशन के नेतृत्व में जिस तरह से देशभर में पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अधिकारों की आवाज बुलंद की जा रही है, उससे यह स्पष्ट है कि अब मीडिया चुप बैठने वाला नहीं है।
अब सबकी निगाहें लखनऊ की उस महा रैली पर टिकी हैं, जहाँ मीडिया जगत अपने हक और सुरक्षा के लिए एकजुट होकर यह तय करेगा कि भारत के लोकतंत्र में ‘चौथे स्तंभ’ का सम्मान सर्वोपरि है।

Leave a Comment