भारत में ट्रेन अंग्रेजों ने नहीं, बल्कि एक भारतीय ने शुरू की थी! जिसे इतिहास की किताबों से गायब कर दिया गया। आज तक हमें यही पढ़ाया गया कि भारत में रेलवे अंग्रेज लाए थे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे का असली ‘मास्टरमाइंड’ एक भारतीय व्यवसायी था?
जी हाँ, हम बात कर रहे हैं नाना जगन्नाथ शंकर सेठ की।
जब इंग्लैंड में पहली बार ट्रेन चली, तो दुनिया हैरान थी। लेकिन उस वक्त इंग्लैंड में रह रहा एक भारतीय सोच रहा था— “अगर यह ट्रेन मेरे देश में चल सकती है, तो भारत की तस्वीर बदल जाएगी।”
नाना जी के बारे में कुछ ऐसे फैक्ट्स जो आपको गर्व से भर देंगे।
नाना जगन्नाथ शंकर सेठ एक बेहद प्रभावशाली व्यक्तित्व थे। उनका रुतबा ऐसा था कि बड़े-बड़े अंग्रेज अफसर उनके मशविरे के बिना कोई बड़ा फैसला नहीं लेते थे।
उन्होंने न सिर्फ लड़कियों के लिए मुंबई में पहला स्कूल खोला, बल्कि उन्होंने अपने स्कूलों में अंग्रेजी के साथ संस्कृत की शिक्षा अनिवार्य की थी ताकि हम अपनी जड़ों से जुड़े रहें।
1843 में उन्होंने जमशेद जीजीभोय (जेजे) के साथ मिलकर ‘इंडियन रेलवे एसोसिएशन’ की नींव रखी। जिस रेलवे को हम अंग्रेजों की देन मानते हैं, उसकी असल परिकल्पना नाना जी और उनके साथियों ने की थी।
इतिहास गवाह है कि 1853 में जब मुंबई से ठाणे के बीच पहली ट्रेन चली, तो उस ऐतिहासिक सफर में नाना जगन्नाथ शंकर सेठ खुद यात्री बनकर सवार थे।
हम दूसरों के इतिहास को तो रटते हैं, लेकिन अपने नायकों के बारे में जानना तक नहीं चाहते।
आज समय है कि हम अपने असली इतिहास को पहचानें और उन गुमनाम क्रांतिकारियों और नायकों को याद करें, जिनकी वजह से आज हम आधुनिक भारत की सांसें ले रहे हैं।
आपका क्या सोचना है?
क्या इतिहास की किताबों में नाना जगन्नाथ शंकर सेठ को वो जगह मिली है, जिसके वे हकदार थे? अपनी राय कमेंट में ज़रूर दें और इस पोस्ट को शेयर करके हर भारतीय को इस गौरवशाली इतिहास से रूबरू कराएं।
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