आइये जानिए अपना इतिहास
और गर्व कीजिये
*जो शास्त्र और शस्त्र दोनो में पारंगत हो, वो है #भट्ट।*
,#आदिगौड़ वैदिक काल के मूल निवासी ब्राह्मण हैं जो सरस्वती नदी के किनारे बसे थे और वेदों के ज्ञाता होने के कारण #ब्रह्मभट्ट कहलाए..
अब #ब्रह्मभट्ट #ब्राह्मणों का संछिप्त इतिहास-
#ब्रह्मभट्ट शब्द की जड़ें संस्कृत में मिलती हैं । जिसमे ब्रह्म का अर्थ – फालना-फूलना / बढ़ना होता है एवं भट्ट का अर्थ विद्वान होता है।
कुल 10 क्षेत्रीय भुजाओं , जिसमे पंच गौड़ ( उत्तर भारतीय ब्राह्मण) एवं पंच द्रविड़ ( दक्षिण भारतीय ब्राह्मण) आते हैं, उनमे ब्रह्मभट्ट सबसे उच्च कोटि के ब्राह्मण अथवा पंडित हैं, जो कि पंच गौड़ भुजा के सारस्वत भाग से आते हैं। जिन्हें *#भृगु संहिता* में *#ब्रह्मसारस्वत* कहा गया है।
#प्राचीन ग्रंथों एवं हिन्दू धर्म के अनुसार इस वर्ग की उत्पत्ति ब्रह्मा जी द्वारा की गई एक यज्ञ से हुई है। #ब्रह्मभट्ट को #ब्रह्मा जी का मानस पुत्र कहा गया है।
#संसार और #समाज को सुचारू रूप से चलने हेतु ब्रह्मा जी ने 10 #मानस पुत्र को बनाया, जिनके नाम इस प्रकार हैं –
1) अत्रि, 2) अंगिरस, 3) पुलत्स्य, 4) मारीचि, 5) पुलाहा, 6) क्रतु, 7) भृगु, 8) वशिष्ठ, 9) दक्ष,10) नारद।
#ब्रह्मभट्टों को समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त है एवं उन्हें देवपुत्र भी कहा जाता है। #ब्रह्मभट्ट राजा के दरबार में कवि, सलाहकार, इतिहासकार, साहित्यकार, राजनयिक हुआ करते थे। केवल ब्रह्मभट्टों को ही राजा के विरुद्ध बोलने का अधिकार प्राप्त था, क्योंकि माना जाता है कि सरस्वती देवी इनकी जीभा पर निवास करती हैं।इसीलिए इन्हें #सरस्वती पुत्र भी कहा जाता है, जो कि ब्रह्मा जी की पत्नी हैं।
#पुरातन काल में #ब्रह्मभट्ट *सरस्वती नदी* ( *कश्मीर, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, सिन्ध*) के किनारे रहा करते थे , एवं वहीं सूत्र एवं वेदों की रचना की। *मौर्य काल* तक यही एक मात्र संस्कृत जानने वाले विद्वान हुआ करते थे, *जैसे जैसे ये एक स्थान से दूसरे स्थान पर पलायन करते गए, इन्होंने अपना ज्ञान समाज तक पहुँचाया, एवं दूसरे ब्राह्मणों का उदय हुआ*।
#कालांतर में ये( *#बिहार, #उत्तरप्रदेश, #मध्यप्रदेश, #महाराष्ट्र, #गोआ, #दक्कन*) भाग में ये पलायन कर गए।
#आदिविद्वानगौड़, वैदिक काल के मूल निवासी ब्राह्मण हैं जो सरस्वती नदी के किनारे बसे थे और वेदों के ज्ञाता होने के कारण #ब्रह्मभट्ट कहलाए..
बाणभट्ट, मयूर भट्ट और जाम भट्ट भारतीय साहित्य और इतिहास के अत्यंत प्रतिष्ठित नाम हैं, जिनका संबंध बिहार के सारस्वत/भूमिहार ब्राह्मण समाज से माना जाता है। ये तीनों 7वीं शताब्दी के आसपास, सम्राट हर्षवर्धन के कालखंड के साहित्यकार थे।
गोत्र/वंश: ये मुख्य रूप से वत्स गोत्र या वात्स्यायन गोत्र के सारस्वत ब्राह्मण माने जाते हैं, जो भगवान परशुराम को अपना मूल पुरुष मानते हैं।
न्याय भट्ट (Nayay Bhatt) भूमिहार ब्राह्मणों के इतिहास और वंशावली में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पुरुष हैं। उन्हें ‘अथर्व भूमिहार ब्राह्मणों’ के मूल पुरुष के रूप में जाना जाता है।
महान खगोलविद् और गणितज्ञ आर्यभट्ट जिन्होंने नकेवल शून्य का आविष्कार किया, बल्कि ब्रह्मांड के कई रहस्यों को उजागर कर दुनिया को चौंका दिया। उस महान आर्यभट्ट की जन्म और कर्मभूमि बिहार रही है । बिहार में अपनी वेधशाला बनाई और तारों कीगणना किया करते थे। उनकी ये वेधशाला जिस स्थान पर थी। उस गांव का नाम उनके काम के आधार पर रख दिया गया। माने तारों की गणना करने वाला गांव तारेगना।
चाणक्य (विष्णुगुप्त) जिनका संबंध बिहार के सारस्वत/भूमिहार ब्राह्मण समाज से माना जाता है। बिहार के भूमिहारों में ‘चानकीय’ (Chanakya) नामक एक विशिष्ट समूह है, चनकिया भूमिहार’ कहलाता है, इनका कौटिल्य गोत्र और अयाचक (दान न लेने वाले) ब्राह्मण होना, इनके चाणक्य वंश से जुड़ाव का प्रमुख प्रमाण माना जाता है।
#भूमिहार, #सारस्वत, #मुहियाल, #चितपावन और #तागों का उल्लेख एक ही ब्राह्मणवादी वंश के रूप में किया गया है।
(#History of dakshina shashwat)
“शाश्वत ब्राह्मण ही आदि गौड़ ब्राह्मण”
१९२९ में #सारस्वत ब्राह्मण महासभा ने #भूमिहार ब्राह्मणों को अपना अंग मानते हुए अनेक प्रतिनिधियों को अपने संगठन का सदस्य बनाया. …🙏
जय माता सरस्वती जी की🙏
.किरण भट्ट विदिशा
राष्ट्रीय अध्यक्ष मातृशक्ति ईकाई
अखिल भारतीय भट्ट शक्ति पुंज ट्रस्ट परिवार अयोध्या 🙏









