||लखनऊ||
हरदोई रोड उपकेंद्र पर लापरवाही का ब्लैकआउट अपनों को बचाने में जुटे बिजली विभाग के सूरमा|
उत्तर प्रदेश की राजधानी में भीषण गर्मी के बीच बिजली विभाग का सिस्टम वेंटिलेटर पर नजर आ रहा है एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जीरो टॉलरेंस और निर्बाध बिजली का निर्देश दे रहे हैं वहीं दूसरी तरफ 220 केवी उपकेंद्र हरदोई रोड पर हुई बड़ी लापरवाही ने सरकार की साख को बट्टा लगा दिया है।
अंधेरे में राजधानी दो बार हुआ ब्लैकआउट जनता बेहाल अफसर मस्त।
चेयरमैन यूपीपीसीएल से छिपाई गई पारेषण खंड की बड़ी चूक।
10-15 सालों से लखनऊ में ही अंगद की तरह जमे हैं रसूखदार इंजीनियर।
खबर है कि अधिशासी अभियंता (विद्युत पारेषण खंड-प्रथम) आलोक आनंद के कार्यकाल में 132 केवी टी.आर.टी.दो बार ब्लैकआउट का शिकार हुआ जब राजधानी की जनता उमस भरी गर्मी में त्राहि-त्राहि कर रही थी तब विभाग के ऊंचे पदों पर बैठे रक्षक ही भक्षक की भूमिका में नजर आए।
सूत्रों के मुताबिक मुख्य अभियंता और अधीक्षण अभियंता ने कार्रवाई करने के बजाय मामले पर पर्दा डालना बेहतर समझा।
बड़ा सवाल क्या यूपीपीसीएल चेयरमैन को भेजी जाने वाली रिपोर्ट में तथ्यों के साथ छेड़छाड़ की गई?
क्या पारेषण खंड के इन खास अफसरों को बचाने के लिए पूरी मशीनरी ढाल बनी हुई है?
बिजली महकमे में इस समय दोहरा मापदंड चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
विभागीय जानकारों का कहना है कि अगर वितरण विभाग का कोई छोटा कर्मचारी या इंजीनियर ऐसी गलती करता तो अब तक वह निलंबित हो चुका होता।
लेकिन पारेषण खंड में इतनी बड़ी लापरवाही के बाद भी सन्नाटा पसरा है।
जवाबदेही तय करने के बजाय अपराधी अधिकारियों को संरक्षण दिया जा रहा है।
तबादला नीति को ठेंगा दिखाते हुए आरोप लग रहे हैं कि कुछ अधिशासी अभियंता पिछले एक दशक से ज्यादा समय से लखनऊ में ही तैनात हैं।
पदोन्नति मिलने के बाद भी इन अधिकारियों का लखनऊ मोह नहीं छूट रहा है जो विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सवाल यह कि क्या मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस’ नीति केवल कागजों तक सीमित है?
चेयरमैन यूपीपीसीएल उन फाइलों को कब खंगालेंगे जिन्हें उनके मातहतों ने दबा रखा है?
एक ही शहर में सालों से जमे अफसरों का तबादला अब तक क्यों नहीं हुआ?
क्या राजधानी की बिजली व्यवस्था इन रसूखदार इंजीनियरों के भरोसे सुरक्षित है?
क्या ऊर्जा मंत्री इस सूचना छुपाओ अफसर बचाओ’ खेल पर लगाम लगाएंगे?
लखनऊ की जनता अब कागजी दावों से ऊब चुकी है। साक्ष्यों के साथ सामने आए इस मामले ने ऊर्जा विभाग के भीतर की सड़न को उजागर कर दिया है।
अब देखना यह है कि शासन इन ‘रसूखदारों’ पर कार्रवाई का हंटर चलाता है या फिर यह मामला भी ठंडे बस्ते के हवाले कर दिया जाएगा|








