गंगा में डूबने से किशोर की मौत मामले में सनसनीखेज मोड़!
चुनावी रंजिश में बेकसूरों को बलि का बकरा बनाने की रची गई बड़ी साजिश।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोला सच का पन्ना: ‘डूबने’ से हुई मौत, बदन पर खरोंच तक नहीं; आगामी पंचायत चुनाव को भुनाने के षड्यंत्र का पर्दाफाश करने धरातल पर उतरी बी एम एफ नेशनल कोर कमेटी की टीम।
विशेष ब्यूरो रिपोर्ट: वरिष्ठ पत्रकार एवं सह संपादक मिथिलेश कुमार मौर्य
(संस्थापक प्रतिनिधि भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल) कोर कमेटी नई दिल्ली)
मीरजापुर उत्तर प्रदेश।
मुख्य घटनास्थल: रैयपुरिया घाट, गंगा नदी, थाना अदलहाट, मीरजापुर।
हादसे पर मुहर: डॉक्टरों के आधिकारिक पैनल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ‘पानी में डूबने’ (Asphyxia due to drowning) को ही मौत का एकमात्र कारण बताया गया है।
षड्यंत्र का ताना-बाना: गांव के कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के समीकरण साधने के लिए इस दुखद हादसे को साजिशन हत्या का रूप देने का कुत्सित प्रयास।
पारिवारिक कलह: प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना की सुबह पिता की डांट और मारपीट से क्षुब्ध होकर ही घर से निकला था मानसिक रूप से कमजोर किशोर सनी।
चश्मदीदों के बयान: घाट पर स्नान कर रही गांव की बच्चियों के सामने पानी में खेलते-खेलते अचानक गहरे पानी में समा गया था बालक।
भारतीय मीडिया फाउंडेशन का दावा: नेशनल कोर कमेटी के सख्त निर्देश पर विशेष खोजी दल ने रैयपुरिया में डाला डेरा, हर साक्ष्य की हो रही है बारीकी से पड़ताल।
पन्नों में सुलगती हकीकत: हादसे की आड़ में रंजिश साधने का घिनौना खेल
मीरजापुर जनपद के थाना अदलहाट अंतर्गत रैयपुरिया घाट पर गंगा नदी में डूबने से 17 वर्षीय किशोर सनी की असमय मौत का संवेदनशील मामला अब पूरी तरह से गरमा गया है। इस पूरे प्रकरण में जो नया और सनसनीखेज मोड़ आया है, उसने स्थानीय राजनीति और गांव के सामाजिक माहौल में खलबली मचा दी है। एक तरफ जहां चिकित्सीय परीक्षण और पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि किशोर की मौत पानी में डूबने के कारण हुई है, वहीं दूसरी तरफ गांव के ही कुछ रसूखदार और चुनावी गिद्ध इस दुखद हादसे को हथियार बनाकर बेकसूर ग्रामीणों को सलाखों के पीछे भेजने का ताना-बाना बुन रहे हैं।
स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, इस हादसे की आड़ में गांव की पुरानी आपसी रंजिश को हवा दी जा रही है। सबसे गंभीर बात यह है कि आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के समीकरणों को अपने पक्ष में मोड़ने और विरोधियों को कानूनी दांव-पेंच में पूरी तरह पंगु बनाने के लिए इस संवेदनशील मामले को जबरन एक सुनियोजित साजिश का रूप दिया जा रहा है। मामले की गंभीरता को भांपते हुए ‘भारतीय मीडिया फाउंडेशन’ नेशनल कोर कमेटी के संस्थापक एवं वरिष्ठ संपादक एके बिंदुसार ने कड़ा रुख अख्तियार किया है और अपनी एक विशेष खोजी विंग को सच के दस्तावेजीकरण के लिए धरातल पर उतार दिया है।
चश्मदीदों की जुबानी पिता की डांट से क्षुब्ध होकर घाट पहुंचा था सनी
खोजी टीम को धरातल पर जो साक्ष्य और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान मिले हैं, वे इस मामले की असलियत को पूरी तरह परत-दर-परत खोलते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, मृतक सनी (17 वर्ष) पुत्र गोविंद मानसिक रूप से थोड़ा कमजोर (मंदबुद्धि) था। घटना वाले दिन सुबह के वक्त किसी घरेलू बात को लेकर पिता गोविंद ने उसे बुरी तरह डांटा था और उसके साथ मारपीट की थी। पिता के इस हिंसक व्यवहार से सनी का मन बुरी तरह टूट गया और वह बेहद क्षुब्ध होकर रोते हुए घर से निकल गया।
घर से निकलने के बाद वह सीधे गांव के ही ‘राम आसरे नेता’ के मकान के बाहर आकर बैठ गया। वहां वह करीब 3 से 4 घंटे तक अत्यंत गुमसुम, उदास और रोनी सूरत में बैठा रहा। इसके बाद वह वहां से उठा और सीधे रैयपुरिया घाट की ओर चला गया। घाट पर उस समय गांव की ही कुछ लड़कियां और महिलाएं पहले से स्नान कर रही थीं। चश्मदीद लड़कियों के अनुसार, सनी नदी के किनारे पानी में उतरकर अकेले ही खेलने लगा। इसी खेल-खेल के दौरान मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण उसे पानी की गहराई का अंदाजा नहीं लगा और वह अचानक गहरे पानी की ओर चला गया, जहां तैरना न जानने के कारण वह नदी की लहरों में समा गया।
वैज्ञानिक साक्ष्य ने तोड़ा झूठ का ताना-बाना: पोस्टमार्टम रिपोर्ट की बड़ी बातें
घटना के तुरंत बाद मुस्तैद अदलहाट थाना पुलिस ने शव को पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा था। अब डॉक्टरों के पैनल द्वारा जारी की गई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने झूठ के सारे महलों को ढहा दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, किशोर सनी की मौत का स्पष्ट और वैज्ञानिक कारण “पानी में डूबना” (Asphyxia due to drowning) ही पाया गया है।
सबसे बड़ी और ध्यान देने योग्य बात यह है कि सनी के पूरे शरीर पर, चाहे आंतरिक हो या बाहरी, किसी भी प्रकार की चोट, रगड़, हाथापाई या बल प्रयोग के निशान नहीं पाए गए हैं। यदि किशोर के साथ किसी भी तरह की जबरदस्ती या हिंसा की गई होती, तो उसके शरीर पर उसके साक्ष्य जरूर होते। मेडिकल साइंस की यह रिपोर्ट साफ तौर पर चीख-चीख कर कह रही है कि यह मामला पूरी तरह से एक दर्दनाक और दुर्भाग्यपूर्ण हादसा है, न कि कोई आपराधिक वारदात।
भारतीय मीडिया फाउंडेशन का दोटूक संदेश: > “हम पीड़ित परिवार की इस अपूरणीय क्षति पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं, लेकिन दुःख की इस घड़ी का फायदा उठाकर किसी भी निर्दोष नागरिक की जिंदगी और मान-सम्मान को राजनीतिक रंजिश की भेंट चढ़ने नहीं दिया जाएगा। हमारी नेशनल कोर कमेटी इस पूरे मामले की कड़ाई से मॉनिटरिंग कर रही है।”
चुनावी गिद्ध सक्रिय: निर्दोषों को फंसाने के षड्यंत्र पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
जैसे ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक हुई, गांव के उन तत्वों के चेहरे बेनकाब हो गए जो इस हादसे पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने की फिराक में थे। ग्रामीणों का आरोप है कि आगामी पंचायत चुनाव में प्रतिद्वंद्वी खेमे को कमजोर करने के लिए कुछ स्थानीय नेताओं ने मृतक के असहाय परिवार को बहकाना और भड़काना शुरू कर दिया है। निर्दोष ग्रामीणों का नाम इस मामले में घसीटकर उन्हें फर्जी मुकदमों में फंसाने की पुरजोर कोशिश की जा रही थी ,जिससे पूरे इलाके के शांतिपूर्ण माहौल में तनाव का जहर घुल रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे षड्यंत्रकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
अदलहाट पुलिस और प्रशासन की निष्पक्ष कार्रवाई :
इस पूरे मामले पर अदलहाट थाना पुलिस और क्षेत्रीय उच्चाधिकारियों का रुख बेहद स्पष्ट और न्यायसंगत है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि कानून भावना या किसी के राजनैतिक दबाव में काम नहीं करता, बल्कि साक्ष्यों और वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर चलता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ चुकी है और पुलिस हर एक बिंदु की गहराई से तफ्तीश कर चुकी हैं। अदलहाट पुलिस अधिकारियों ने गांव के लोगों को आश्वस्त किया है कि किसी भी बेकसूर व्यक्ति के खिलाफ कोई अन्यायपूर्ण कार्रवाई नहीं होने दी जाएगी और माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वाले तत्वों से कड़ाई से निपटा जाएगा।
वहीं भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी के संस्थापक एके बिंदुसार ने खड्यंत्र रचने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की हैं।








