Suchna or prakash narth
*Nagriko ke 🩸 pasine ke paisa bachte*
गृहकर में मनमानी रोकने को नगर निगम प्रभावी कदम उठाये
–सिटीजन चार्टर को प्रभावी करने को शुरू होगी ‘नागरिक कार्यवाही’
आगरा: नगर निगम के कामकाज में बेहद मनमानी चल रही है। नगर निगम का दावा कि सेवाओं में सुधार करने और सेवाओं तथा मांगों के बीच के अंतर (गैप) को समाप्त करने के लिए विभिन्न योजनाएं तैयार की हैं केवल कागज़ी है। नागरिकों को सुविधायें कम और उनका उत्पीड़न ज़्यादा है। वस्तुस्थिति यह है कि गृहकर जमा करना भी भवन स्वामियों के लिये मुश्किल भरा कार्य हो गया है। निगम का बाबू तंत्र किसी भी संपत्ति पर बढाकर डिमांड निकाल देता है। बढ़ी डिमांड पूर्वव्यापी प्रभाव (Retrospective Effect) से बिना नोटिस और सुनवाई के लागू कर देता है और उसके ऊपर दंडात्मक ब्याज भी जोड़ देता है। पिछले भुगतान के सापेक्ष अचानक बढी धनराशि को लेकर जब भवन स्वामी पूछताछ करने का प्रयास करता है तो संतुष्ट करने वाला उत्तर देने के स्थान पर कुतर्क का सहारा लिया जाता है। यह कहना है मूल रूप से आगरा निवासी अधिवक्ता और समाजशास्त्री अभिनय प्रसाद का ।
श्री अभिनय प्रासद का परिवार हरीपर्वत जोन के तहत म्यूनिस्पिल वार्ड संख्या 82, भीम नगर के तहत मदिया कटरा में रहता हैं । तीसरी मंजिल पर उनके फ्लैट में कोई बदलाव नहीं हुआ किंतु फिर भी पिछले एसिसमेंट आधारित प्रोपर्टी टैक्स से कई गुना बढाकर डिमांड निकाल डाली गयी। बढ़ी डिमांड को पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू कर उसपर दंडात्मक ब्याज भी जोड़ दिया। सुनवायी शून्यता की स्थिति में विवश होकर उन्हें कानूनी लिखत – पढ़त का सहारा लेना पडा। फलस्वरूप निगम मनमानी का औचित्य स्पष्ट नहीं कर पाया और अकारण बढायी डिमांड को वापस लेना पडा। उनका कहना है कि निगम में एसिसमेंट के आधार पर निकाली गयी डिमांड तमाम विसंगतियों से भरपूरिता वाली हैं, जनरल सर्वे न होने के फलस्वरूप डिमांड रजिस्टर में पेचीदगियाँ और अधिक हो गयी हैं।
श्री अभिनय प्रसाद ने स्पष्ट किया कि प्रॉपर्टि कर निर्धारण मे नगर निगम द्वारा मनमानी करना, पक्षपात करना, रिहायशि जगह को व्यावसायिक घोषित कर देना, निर्मित क्षेत्र को कई गुना बढ़ा देना, डिमांड को पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू करना और फिर उसपर दंडात्मक ब्याज वसूलना, सुनवाई का उचित अवसर न देना प्रकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। इन्हीं तर्कों के चलते नगर निगम को श्री प्रसाद के फ्लैट पर अकारण बढायी डिमांड को वापस लेना पडा। यह अब एक नज़ीर है जिसके चलते पीड़ित भवन स्वामी अब अपनी समस्या भी हल कर सके हैं।
–सिटी जन चार्टर प्रभावी हो
उल्लेखनीय है कि नागरिकों को नगर निगम की समयबद्ध सेवायें उपलबध करवाने के लिये आगरा नगर निगम का (ANN) का नागरिक चार्टर (Citizen Charter) नागरिकों को समयबद्ध, पारदर्शी और जवाबदेह सेवाएँ प्रदान करने का एक प्रतिबद्धता अभिव्यक्ति वाला दस्तावेज़ है। जिसके माध्यम से यह स्वत: सुनिश्चित होता है कि नगर निगम द्वारा दी जाने वाली सेवाएँ एक निश्चित समय सीमा में पूरी हों। इसके तहत (1) जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र: आवेदन की तिथि से 7-15 दिन (वेबसाइट पर) (2) संपत्ति कर का आकलन / नामांतरण (Property Mutation): 15-30 दिन। (3) विवाह पंजीकरण: 7-10 दिन। (4) स्ट्रीट लाइट (लाइट) की शिकायत: 24 से 48 घंटे में। (4 )कूड़ा उठाना/स्वच्छता शिकायत: 24 घंटे। (5) जल भराव/सीवर की शिकायत: 24-48 घंटे। (6) नया ट्रेड लाइसेंस: 30 दिन।
भारत सरकार ने मई 1997 में आयोजित मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन के बाद सरकारी विभागों में लोकहित की सेवाओं में सुधार और जबाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू किया गया था। उ प्र में यह नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव एस0आर0 लाखा के 2007 में रहे कार्यकाल में यह नगर निगमों में लागू हुआ। लेकिन दुर्भाग्य है कि इसको प्रभावी बनाये जाने के लिये अब तक कोई प्रत्यक्ष कार्रवाही नहीं की गयी। जनसुलभ जानकारियों के अनुसार निगम सदन, कार्यकारिणी तो इसे दरकिनार किये ही रहीं साथ ही नगर विकास मंत्री, जनपद के प्रभारी मंत्री अपने दौरों के दौरान लोक महत्व के इस अहम दस्ताबेज को लेकर उदासीन रहे।
–फाइलों को बाबूओं के बस्ते में रखने की समय सीमा तय हो
सिटीजन चार्टर में सेवा प्रदाताओं के द्वारा पद या पटल दायित्व निर्वाहन करने वालों की अवधि निर्धारित नहीं है। जिससे इसका अनुचित लाभ उठाकर बाबू तंत्र फाइलें निस्तारण में मनमर्जी करता है। डिजिटल सिस्टम प्रभावी होने के बावजूद मूल पत्रावलियों जब तक चाहें अपने पास रोके रखते हैं। श्री अभिनय प्रसाद ने कहा है कि वह नगरायुक्त को लिखेंगे कि यह सुनिश्चित करें कि पत्रावलियां या फाइलें अधिकारी आपने पास अधिकतम कितने समय तक रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पडी तो इस मामले में प्रदेश के प्रमुख सचिव नगर विकास को भी लिखेंगे।
–निगम सदन का विशेष अधिवेशन आहूत हो
श्री अभिनय प्रसाद ने कहा कि उपयुक्त तो यही होगा कि अगर मेयर आगरा के नागरिक हितों के प्रति जरा सी भी संवेदनशील हैं तो निगम सदन का सिटिज़न चार्टर को प्रभावी बनाये जाने के लिये विशेष अधिवेशन आहूत करवायें।
गृहकर में मनमानी रोकने को नगर निगम प्रभावी कदम उठाये
–सिटीजन चार्टर को प्रभावी करने को शुरू होगी ‘नागरिक कार्यवाही’
आगरा: नगर निगम के कामकाज में बेहद मनमानी चल रही है। नगर निगम का दावा कि सेवाओं में सुधार करने और सेवाओं तथा मांगों के बीच के अंतर (गैप) को समाप्त करने के लिए विभिन्न योजनाएं तैयार की हैं केवल कागज़ी है। नागरिकों को सुविधायें कम और उनका उत्पीड़न ज़्यादा है। वस्तुस्थिति यह है कि गृहकर जमा करना भी भवन स्वामियों के लिये मुश्किल भरा कार्य हो गया है। निगम का बाबू तंत्र किसी भी संपत्ति पर बढाकर डिमांड निकाल देता है। बढ़ी डिमांड पूर्वव्यापी प्रभाव (Retrospective Effect) से बिना नोटिस और सुनवाई के लागू कर देता है और उसके ऊपर दंडात्मक ब्याज भी जोड़ देता है। पिछले भुगतान के सापेक्ष अचानक बढी धनराशि को लेकर जब भवन स्वामी पूछताछ करने का प्रयास करता है तो संतुष्ट करने वाला उत्तर देने के स्थान पर कुतर्क का सहारा लिया जाता है। यह कहना है मूल रूप से आगरा निवासी अधिवक्ता और समाजशास्त्री अभिनय प्रसाद का ।
श्री अभिनय प्रासद का परिवार हरीपर्वत जोन के तहत म्यूनिस्पिल वार्ड संख्या 82, भीम नगर के तहत मदिया कटरा में रहता हैं । तीसरी मंजिल पर उनके फ्लैट में कोई बदलाव नहीं हुआ किंतु फिर भी पिछले एसिसमेंट आधारित प्रोपर्टी टैक्स से कई गुना बढाकर डिमांड निकाल डाली गयी। बढ़ी डिमांड को पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू कर उसपर दंडात्मक ब्याज भी जोड़ दिया। सुनवायी शून्यता की स्थिति में विवश होकर उन्हें कानूनी लिखत – पढ़त का सहारा लेना पडा। फलस्वरूप निगम मनमानी का औचित्य स्पष्ट नहीं कर पाया और अकारण बढायी डिमांड को वापस लेना पडा। उनका कहना है कि निगम में एसिसमेंट के आधार पर निकाली गयी डिमांड तमाम विसंगतियों से भरपूरिता वाली हैं, जनरल सर्वे न होने के फलस्वरूप डिमांड रजिस्टर में पेचीदगियाँ और अधिक हो गयी हैं।
श्री अभिनय प्रसाद ने स्पष्ट किया कि प्रॉपर्टि कर निर्धारण मे नगर निगम द्वारा मनमानी करना, पक्षपात करना, रिहायशि जगह को व्यावसायिक घोषित कर देना, निर्मित क्षेत्र को कई गुना बढ़ा देना, डिमांड को पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू करना और फिर उसपर दंडात्मक ब्याज वसूलना, सुनवाई का उचित अवसर न देना प्रकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। इन्हीं तर्कों के चलते नगर निगम को श्री प्रसाद के फ्लैट पर अकारण बढायी डिमांड को वापस लेना पडा। यह अब एक नज़ीर है जिसके चलते पीड़ित भवन स्वामी अब अपनी समस्या भी हल कर सके हैं।
–सिटी जन चार्टर प्रभावी हो
उल्लेखनीय है कि नागरिकों को नगर निगम की समयबद्ध सेवायें उपलबध करवाने के लिये आगरा नगर निगम का (ANN) का नागरिक चार्टर (Citizen Charter) नागरिकों को समयबद्ध, पारदर्शी और जवाबदेह सेवाएँ प्रदान करने का एक प्रतिबद्धता अभिव्यक्ति वाला दस्तावेज़ है। जिसके माध्यम से यह स्वत: सुनिश्चित होता है कि नगर निगम द्वारा दी जाने वाली सेवाएँ एक निश्चित समय सीमा में पूरी हों। इसके तहत (1) जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र: आवेदन की तिथि से 7-15 दिन (वेबसाइट पर) (2) संपत्ति कर का आकलन / नामांतरण (Property Mutation): 15-30 दिन। (3) विवाह पंजीकरण: 7-10 दिन। (4) स्ट्रीट लाइट (लाइट) की शिकायत: 24 से 48 घंटे में। (4 )कूड़ा उठाना/स्वच्छता शिकायत: 24 घंटे। (5) जल भराव/सीवर की शिकायत: 24-48 घंटे। (6) नया ट्रेड लाइसेंस: 30 दिन।
भारत सरकार ने मई 1997 में आयोजित मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन के बाद सरकारी विभागों में लोकहित की सेवाओं में सुधार और जबाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू किया गया था। उ प्र में यह नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव एस0आर0 लाखा के 2007 में रहे कार्यकाल में यह नगर निगमों में लागू हुआ। लेकिन दुर्भाग्य है कि इसको प्रभावी बनाये जाने के लिये अब तक कोई प्रत्यक्ष कार्रवाही नहीं की गयी। जनसुलभ जानकारियों के अनुसार निगम सदन, कार्यकारिणी तो इसे दरकिनार किये ही रहीं साथ ही नगर विकास मंत्री, जनपद के प्रभारी मंत्री अपने दौरों के दौरान लोक महत्व के इस अहम दस्ताबेज को लेकर उदासीन रहे।
–फाइलों को बाबूओं के बस्ते में रखने की समय सीमा तय हो
सिटीजन चार्टर में सेवा प्रदाताओं के द्वारा पद या पटल दायित्व निर्वाहन करने वालों की अवधि निर्धारित नहीं है। जिससे इसका अनुचित लाभ उठाकर बाबू तंत्र फाइलें निस्तारण में मनमर्जी करता है। डिजिटल सिस्टम प्रभावी होने के बावजूद मूल पत्रावलियों जब तक चाहें अपने पास रोके रखते हैं। श्री अभिनय प्रसाद ने कहा है कि वह नगरायुक्त को लिखेंगे कि यह सुनिश्चित करें कि पत्रावलियां या फाइलें अधिकारी आपने पास अधिकतम कितने समय तक रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पडी तो इस मामले में प्रदेश के प्रमुख सचिव नगर विकास को भी लिखेंगे।
–निगम सदन का विशेष अधिवेशन आहूत हो
श्री अभिनय प्रसाद ने कहा कि उपयुक्त तो यही होगा कि अगर मेयर आगरा के नागरिक हितों के प्रति जरा सी भी संवेदनशील हैं तो निगम सदन का सिटिज़न चार्टर को प्रभावी बनाये जाने के लिये विशेष अधिवेशन आहूत करवायें
Abinav Prasad
+91 98370 09329








