मिर्जापुर में ‘सुशासन का महासंग्राम’— खाकी और प्रशासन के साझा प्रहार से थर्राए अपराधी

*महा-कवरेज:*

*मिर्जापुर में ‘सुशासन का महासंग्राम’— खाकी और प्रशासन के साझा प्रहार से थर्राए अपराधी*

– ए.के. बिंदुसार (संस्थापक, भारतीय मीडिया फाउंडेशन) नेशनल कोर कमेटी,

 

*वाराणसी डिविजन।*

विंध्य क्षेत्र की पावन धरा मिर्जापुर आज भ्रष्टाचार और अपराध के विरुद्ध एक निर्णायक युद्ध की गवाह बन रही है। जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार और पुलिस अधीक्षक अपर्णा रजत कौशिक की जुगलबंदी ने जनपद में सुशासन का ऐसा चक्रव्यूह रचा है, जिसमें अपराधी और लापरवाह अधिकारी चारों खाने चित नजर आ रहे हैं।

 

कोतवाली शहर: नगर क्षेत्र का मुख्य केंद्र, जहाँ कानून-व्यवस्था का सबसे अधिक दबाव रहता है।

कोतवाली कटरा: व्यावसायिक गतिविधियों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों की सुरक्षा का जिम्मा।

कोतवाली देहात: ग्रामीण और शहरी सीमाओं के बीच सामंजस्य बिठाने वाला महत्वपूर्ण थाना।

थाना विंध्याचल: धार्मिक पर्यटन और लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा व सुगमता का केंद्र।

थाना जिगना: सीमावर्ती क्षेत्रों और अवैध तस्करी पर अंकुश लगाने हेतु सक्रिय।

थाना लालगंज, हलिया और मड़िहान: नक्सल प्रभावित रहे इन क्षेत्रों में सामुदायिक पुलिसिंग और विकास कार्यों की सुरक्षा।

थाना चुनार: ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा और गंगा तटीय क्षेत्रों की निगरानी।

थाना कछवां, पड़री, अहरौरा एवं अदलहाट और राजगढ़: स्थानीय विवादों के निस्तारण और ग्रामीण सुरक्षा के प्रहरी।

थाना प्रभारियों के कंधे पर ‘मिशन सुरक्षा’ की अहम जिम्मेदारियाँ

पुलिस अधीक्षक ने सभी थाना प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे केवल ‘अफसर’ नहीं, बल्कि समाज के ‘सेवक’ के रूप में अपनी भूमिका निभाएं। वर्तमान समय में उन्हें निम्नलिखित अति-महत्वपूर्ण (High-Stakes) जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं:

(क) ‘ऑपरेशन क्लीन’ और जीरो टॉलरेंस

प्रत्येक थाना प्रभारी को अपने क्षेत्र में संगठित अपराध, विशेषकर ड्रग्स, अवैध शराब और भू-माफियाओं के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई करने का निर्देश है। ‘जिम धर्मांतरण कांड’ जैसी घटनाओं के बाद, अब हर संदिग्ध गतिविधि पर पैनी नजर रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।

थाना प्रभारियों को ‘अग्निपथ’ का निर्देश: कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव,

पुलिस अधीक्षक ने जनपद के सभी थानों के प्रभारियों के लिए नई और सख्त कार्यप्रणाली (SOP) लागू की है। अब केवल रिपोर्ट दर्ज करना काफी नहीं होगा, बल्कि ‘परिणाम’ देना अनिवार्य है।

जनसंवाद और सक्रियता: थाना प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश है कि वे अपने कार्यालयों से निकलकर जनता के बीच जाएं। कटरा और शहर कोतवाली में हाल ही में हुए पैदल गश्त इसी रणनीति का हिस्सा हैं।

त्वरित निस्तारण: जनसुनवाई में आने वाली शिकायतों का मौके पर निस्तारण न होने पर संबंधित थाना प्रभारी की जवाबदेही तय की जा रही है।

हिस्ट्रीशीटर्स की निगरानी: प्रत्येक थाने को अपने क्षेत्र के सक्रिय अपराधियों और हाल ही में जेल से छूटे बदमाशों की 24 घंटे निगरानी करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासनिक ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: डीएम के दौरों से हड़कंप!

जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार ने एसी कमरों के बजाय ‘ग्राउंड जीरो’ पर उतरकर व्यवस्था को सुधारने का बीड़ा उठाया है। उनके हालिया दौरों ने विकास कार्यों की धीमी गति को रफ्तार दी है:

स्वास्थ्य और शिक्षा पर प्रहार:राजगढ़ सीएचसी के औचक निरीक्षण में मिली गंदगी और अभिलेखों में हेराफेरी पर डीएम ने जो सख्त रुख अपनाया, उसने पूरे प्रशासनिक अमले को हिला दिया है।

गरीबों का हक:मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पहाड़ी गांव में बन रहे ‘आदर्श कॉलोनी मॉडल’ का निरीक्षण कर उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।

निर्माण कार्यों की समीक्षा: मां बिंदुवासिनी विश्वविद्यालय के निर्माण में लापरवाही बरतने वाली संस्थाओं को ब्लैकलिस्ट करने तक की चेतावनी दी गई है।

 

मिर्जापुर पुलिस ने अपराधियों के सुरक्षित ठिकानों को ध्वस्त करना शुरू कर दिया है:

जिम धर्मांतरण कांड (ऐतिहासिक चार्जशीट): देहात कोतवाली पुलिस द्वारा 6000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल करना अपराधियों के ताबूत में आखिरी कील साबित होगा। 11 आरोपियों का जेल जाना यह बताता है कि ‘लव-जाल’ और धर्मांतरण जैसे कृत्यों के लिए मिर्जापुर में कोई जगह नहीं है।

नशा मुक्ति अभियान:जिगना पुलिस द्वारा हेरोइन तस्करों की गिरफ्तारी और अहरौरा-चुनार क्षेत्र में अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए थाना प्रभारियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

यातायात और अतिक्रमण: शहर को जाम मुक्त करने के लिए “एंटी-एंक्रोचमेंट ड्राइव” के तहत दुकानों के बाहर अवैध कब्जों को हटाया जा रहा है और त्रुटिपूर्ण नंबर प्लेट वाले वाहनों पर भारी जुर्माना लगाया जा रहा है।

थानों की मुस्तैदी: एक नजर में कार्यक्षेत्र!

कोतवाली शहर और कटरा: व्यापारिक सुरक्षा और सुगम यातायात के प्रहरी बने।

विंध्याचल थाना:धार्मिक मर्यादा और दर्शनार्थियों की सुगम व्यवस्था में 24 घंटे तैनात।

ग्रामीण थाने (मड़िहान, हलिया, लालगंज): दुर्गम क्षेत्रों में ‘कम्युनिटी पुलिसिंग’ के जरिए जनता का विश्वास जीतने में सफल।

चुनार और कछवां: गंगा तटीय सुरक्षा और तस्करी रोकने में सक्रिय भूमिका।

अन्य अहम घटनाक्रम

खाद्य सुरक्षा:कंतित दरगाह क्षेत्र में मिलावटखोरों के खिलाफ हुई कार्रवाई ने जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों को बड़ा संदेश दिया है।

सुरक्षा का नया आधार: परसिया में होमगार्ड प्रशिक्षण केंद्र की आधारशिला रखने के साथ ही भविष्य के लिए सुरक्षा बलों को तैयार करने की योजना पर काम शुरू हो गया है।

मिर्जापुर आज एक नए कलेवर में ढल रहा है। जहाँ एक ओर प्रशासनिक अधिकारी विकास की मशाल जला रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस की ताकत अपराधियों का काल बन रही है।

 

विभिन्न जनपदों में भ्रष्टाचार के विरुद्ध चल रहे महासंग्राम और प्रशासनिक पारदर्शिता को देखते हुए भारतीय मीडिया फाउंडेशन (BMF) ने एक बड़ा निर्णय लिया है। संगठन के संस्थापक प्रतिनिधि मिथिलेश कुमार मौर्य एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित बालकृष्ण तिवारी ने संयुक्त रूप से घोषणा की है कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों और निष्पक्ष पुलिस कर्मियों को *”सुशासन सारथी सम्मान”* से अलंकृत किया जाएगा।

 

संविधान के प्रहरियों का सम्मान: यह पुरस्कार उन चेहरों को सामने लाएगा जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी जनता की सेवा को अपना परम धर्म माना है।

सम्मान के मापदंड: “सुशासन सारथी सम्मान” के लिए उन अधिकारियों के नाम पर विचार होगा जिन्होंने भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार किया हैं।

जनसुनवाई में त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया है।

भव्य समारोह की तैयारी: राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित बालकृष्ण तिवारी के अनुसार, जल्द ही एक भव्य समारोह के माध्यम से लोकतंत्र और संविधान के इन प्रहरियों को सम्मानित कर समाज के लिए एक प्रेरणा पेश की जाएगी।

ए.के. बिंदुसार के नेतृत्व में संगठन का यह कदम जनपद में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रहे अधिकारियों का मनोबल बढा़एगा।

 

 

भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी और इंटरनेशनल मीडिया आर्मी इस सक्रियता का समर्थन करती है और यह उम्मीद करती है कि यह सुशासन की लहर निरंतर जारी रहेगी।लोकतंत्र की रक्षा में, शब्द ही हमारे शस्त्र हैं…

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