**रिकॉर्ड गायब! एफिडेविट झूठा! लूटतंत्र बेनकाब – पूर्वांचल डिस्कॉम में अभियंताओं की फिर लटकी निलंबन की तलवार, प्रबंध निदेशक के संरक्षण में चल रहा खेल?**
**लखनऊ।** *पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पूर्वांचल डिस्कॉम) में **रिकॉर्ड गायब करने, झूठे एफिडेविट देने और सरकारी धन का मनमाना दुरुपयोग** का खुला लूटतंत्र चल रहा है। विभागीय ठेकेदार ने आरटीआई के तहत डेबिटेबल एजेंसी को दिए गए आदेशों और भुगतान चेकों की **हार्ड कॉपी** मांगी थी, ताकि बैंक ट्रांसफर का प्रमाण मिल सके। लेकिन आज तक **न भुगतान की कोई रसीद मिली, न ब्लैकलिस्टिंग के कोई कागजात**। मामला राज्य सूचना आयोग में सालों से लंबित पड़ा है आयोग भी लाचार है इन खिलाड़ियों के सामने।
*सबसे गंभीर बात** — वाराणसी विकास प्राधिकरण ने **प्रबंध निदेशक कार्यालय (MD Office)** का नक्शा पास न कराने पर **एक करोड़ से ऊपर का भारी जुर्माना** लगा दिया। पत्र **अभियंता के व्यक्तिगत नाम** पर लिखा गया, न कि विभाग के पद के नाम पर। तो अब सवाल यह उठता है कि जुर्माना कौन भरेगा? जनता का बिजली बिल, बिजली विभाग या फिर **अभियंता खुद**?
मुख्य अभियंता (जानपद क्षेत्र) सचिन अग्रवाल की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट (Letter No. **3103/Pu0A0J0Vi0(Vi0)/Va0/Joch Samiti**, dated **08.03.2026**) ने पूरा खेल बेनकाब कर दिया है।
क्रोनोलॉजी – कैसे चला लूट का खेल
– **2017**: ठेकेदार फर्म के काम में खराब गुणवत्ता, देरी और कमीशनखोरी के आरोप। वेद प्रकाश कौशल (तत्कालीन अधिशासी अभियंता) के खिलाफ **43,744 रुपये** की वसूली का आदेश। विभाग ने **परिशिंदा** और **वेतन वृद्धि रोकने** की सजा की सिफारिश की।
– **2018**: ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया गया।
– **2022**: ठेकेदार ने आरटीआई अपील (S-6/1872/A/2022) दायर की। ब्लैकलिस्टिंग और भुगतान के दस्तावेज मांगे।
– **2022 से 2025**: अपील को लंबा खींचने के लिए **पांच बिल** बनाकर अधिवक्ता को **32,450 रुपये** (59 गुना ज्यादा) पास कर दिए गए। 18% आरसीएम जीएसटी भी अवैध रूप से वसूला गया।
– **2025-2026**: ठेकेदार ने 20 रुपये के नॉन-ज्यूडिशियल स्टैंप पेपर पर **शपथ-पत्र** देकर स्पष्ट किया – “न भुगतान की रसीद मिली, न ब्लैकलिस्टिंग के कागजात”।
– **08.03.2026**: जांच रिपोर्ट में साफ — अधिकारी **रिकॉर्ड छिपा रहे हैं**, झूठा एफिडेविट देकर आयोग को गुमराह कर रहे हैं। *जानबूझकर नियम-कानून को ताक पर रखकर** ये अभियंता प्रबंध निदेशक, निदेशक या अध्यक्ष से भी ज्यादा शक्तिशाली बन बैठे हैं। वे उच्चाधिकारियों के आदेशों को नजरअंदाज कर अपने हिसाब से नियम तोड़-मरोड़ रहे हैं और सरकारी धन का मनमाना दुरुपयोग कर रहे हैं।
आरोपी अभियंताओं *इंजीनियर अनिरुद्ध चौरसिया** (सैप आईडी-12000125), **वर्तमान** अधिशासी अभियंता (सिविल) – जांच में **कोई सहयोग नहीं**, सुनवाई में गैरहाजिर, अभिलेख छिपाए। जांच अधिकारी ने इसे **“घोर अनुशासनहीनता”** बताया।
– **इंजीनियर वेद प्रकाश कौशल** (सैप आईडी-12000085), **पूर्व** अधिशासी अभियंता, वर्तमान में अधीक्षण अभियंता (जानपद), दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम, आगरा – 2017 के घोटाले में पहले ही दोषी, फिर भी पदोन्नति दी गई।
वेद प्रकाश कौशल का बचाव और अन्य अभियंताओं के नाम
वेद प्रकाश कौशल ने अपने लिखित बचाव में दावा किया है कि **विभागीय अधिवक्ता श्री सत्येंद्र कुमार** को इसी तरह **समेकित बिल** बनाकर भुगतान कई अन्य खंडों में भी किया गया है। उन्होंने निम्न अभियंताओं/खंडों का जिक्र किया (प्रत्येक के नाम के आगे भुगतान राशि):
– **विद्युत वितरण खण्ड-प्रथम, चन्दौली** – श्री सत्येंद्र कुमार – **5,500 रुपये**
– **विद्युत वितरण खण्ड-दिलीप, मऊ** – श्री सत्येंद्र कुमार – **5,500 रुपये**
– **विद्युत वितरण खण्ड-फफामऊ** – श्री सत्येंद्र कुमार – **5,500 रुपये**
– **विद्युत वितरण खण्ड-चतुर्थ वाराणसी** – श्री सत्येंद्र कुमार – **5,500 रुपये**
– **विद्युत वितरण खण्ड-हिलीय, वाराणसी** – श्री सत्येंद्र कुमार – **5,500 रुपये**
– **विद्युत वितरण खण्ड-हिलीय, गोरखपुर** – श्री सत्येंद्र कुमार – **9,925 रुपये**
– **विद्युत वितरण खण्ड-बख्तीपुर, गोरखपुर** – श्री सत्येंद्र कुमार – **5,500 रुपये**
(और भी कई खंडों में यही पैटर्न अपनाया गया।)
यानी यह कोई अकेला मामला नहीं, बल्कि **पूरे पूर्वांचल डिस्कॉम में फैला व्यवस्थित लूटतंत्र** है।
**पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक** पर आए दिन भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। क्या **इन्हीं प्रबंध निदेशक के संरक्षण** में ये अभियंता इतने बेखौफ होकर लूटतंत्र चला रहे हैं? क्या प्रबंध निदेशक कार्यालय इन्हें छत्रछाया प्रदान कर रहा है?
**समय के उपभोक्ता** की लगातार पैरवी के कारण ही यह लूटतंत्र उजागर हुआ है। एक तरफ ठेकेदार सालों से न्याय की राह देख रहे हैं, दूसरी तरफ अधिकारी **मोज काट** रहे हैं।
– दोनों अभियंताओं को **तुरंत निलंबित** किया जाए।
– **नियम विरुद्ध दिए गए रुपये की पूरी वसूली हो।*
– MD ऑफिस नक्शा पास न कराने पर लगा **एक करोड़ से ऊपर का जुर्माना** अभियंता के व्यक्तिगत नाम से वसूला जाए।
– गायब रिकॉर्ड, झूठे एफिडेविट और उच्चाधिकारियों के आदेशों की अनदेखी की जांच हो।
– पूरे मामले की **सीबीआई जांच** कराई जाए।
जनता के बिजली बिल से जमा पैसा ऐसे लुटेरों के हाथों में कैसे जा सकता है? यह पूर्वांचल डिस्कॉम का **सबसे बड़ा लूटतंत्र** जिसकी चर्चा है कि इसमें प्रबंध निदेशक पूर्वांचल विद्युत वितरण का पूर्ण संरक्षण मिला हुआ है। खैर
**युद्ध अभी शेष है**
*अविजित आनन्द, संपादक*
*चन्द्रशेखर सिंह, प्रबंध संपादक*
**समय का उपभोक्ता** – राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र, लखनऊ






