आकाशवाणी मथुरा-वृंदावन से प्रसारित होने वाले अपने युग के बहुत ही लोकप्रिय कार्यक्रम “ब्रज कार्यक्रम” का दृश्य है, आलेख डॉ श्री कृष्ण शरद

श्वेत-श्याम चित्र -दर्शन –

आकाशवाणी मथुरा-वृंदावन से प्रसारित होने वाले अपने युग के बहुत ही लोकप्रिय कार्यक्रम “ब्रज कार्यक्रम” का दृश्य है। ये कार्यक्रम आकाशवाणी मथुरा-वृंदावन से साॅध्यकाल ०६ बजकर दस मिनट से लेकर शाम ०६बजकर ४५ बजे के मध्य सजीव ( लाइब) प्रसारित हुआ करता था।

जिसमें खेती -किसानी, पशुपालन के अंतर्गत गौपालन,मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन, बकरी पालन,परिवार कल्याण,अल्प बचत, विकास की गतिविधियों सम्बन्धी आदि उपयोगी बातें लोकगायिका/ लोक गायकों के मधुर लोकगीतों के साथ बहुत सारी जानकारियां होती थीं।

ब्रज साहित्यिक कार्यक्रम के अंतर्गत ही शाम ०६बज४५ से ०७ बजे तक ब्रज साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन होता था। जिसे शार्ट वेव ८९.१५ मीटर अर्थात ३३६५ किलोहर्टज़ पर आकाशवाणी के दिल्ली केंद्र से एक साथ ही प्रसारित किया जाता था। इस में ब्रज भाषा काव्य पाठ, हास्य-व्यंग्य की वार्ताएं, झलकियां, प्राचीन कवियों की रचनाओं का पाठ हुआ करता था।

ब्रज कार्यक्रम में मुख्य भूमिकाओं में हुआ करते थे हम सब _

राधा बिहारी गोस्वामी ( गुसाॅई जी)

श्रीकृष्ण ‘शरद’ ( ग्राम सेवक जी/ बाद में किशन भैय्या)

हरी बाबू कौशिक (लल्लू )

डॉ. रामनरेश पाण्डेय ( भैय्या जी)

त्रिभुवन शर्मा ( मास्टर जी)

डॉ. सत्य देव आज़ाद ( चौधरी जी)

बाबू खां ( छिद्दा सिंह)

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प्रस्तुत ब्लैक एण्ड व्हाईट चित्र में हैं_ बायें से दायें _

सर्व श्री—- शाॅता प्रसाद बाॅसुरी वादक ( स्वर्गीय)

डॉ सत्य देव आज़ाद ( अब स्वर्गीय)

डॉ श्रीकृष्ण ‘शरद’ ( ग्राम सेवक जी/ किशन भैय्या)

राधा बिहारी गोस्वामी गुसाईं जी ( अब स्वर्गीय )

हरी बाबू कौशिक ‘लल्लू'( अब स्वर्गीय)

लाल जी राम, पखावज वादक ( अब स्वर्गीय)

सरदार देव सिंह विमल तत्कालीन ड्यूटी आॅफीसर

और

मदनलाल जयपुरी ( ढोलक वादक।

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