*”श्रम का सम्मान, बुद्ध का ज्ञान: नए भारत के निर्माण का आधार”*
ए.के. बिंदुसार*
संस्थापक, भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी
मुख्य संयोजक, इंटरनेशनल मीडिया आर्मी ।
नई दिल्ली:
मई का महीना हमें दो महान प्रेरणाएं देता है। एक तरफ 1 मई को *अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस* है जो देश के निर्माण में खून-पसीना बहाने वाले हर श्रमिक के सम्मान का दिन है। दूसरी तरफ *बुद्ध पूर्णिमा* है जो करुणा, शांति और मध्यम मार्ग का संदेश देती है।
भगवान बुद्ध ने कहा था “अप्प दीपो भव” अर्थात अपना दीपक स्वयं बनो। आज का श्रमिक भी अपने परिश्रम से ही राष्ट्र का दीपक है। निर्माण स्थल पर ईंट जोड़ता मजदूर हो या खेत में अन्न उगाता किसान, फैक्ट्री में काम करता कारीगर हो या डिजिटल इंडिया बनाता युवा, सबके श्रम से ही भारत विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर है।
*भारतीय मीडिया फाउंडेशन की ओर से केंद्र सरकार एवं सभी राज्य सरकारों से संयुक्त मांग:*
1. *श्रमिक सुरक्षा कानून का सख्त क्रियान्वयन*: असंगठित क्षेत्र के 93% श्रमिकों के लिए यूनिवर्सल सोशल सिक्योरिटी, ESI और PF का दायरा बढ़ाया जाए। निर्माण स्थलों पर सुरक्षा उपकरण अनिवार्य हों।
2. *न्यूनतम मजदूरी का राष्ट्रीय मानक*: महंगाई के अनुपात में हर 6 महीने पर न्यूनतम मजदूरी संशोधन हो। “एक देश, एक न्यूनतम मजदूरी” की नीति लागू की जाए।
3. *बुद्ध के सिद्धांतों पर आधारित श्रम नीति*: कार्यस्थल पर शोषण, भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न रोकने के लिए “करुणा एवं सम्मान आयोग” का गठन हो।
4. *पत्रकार एवं मीडिया कर्मियों को श्रमिक का दर्जा*: डिजिटल युग में जोखिम उठाकर काम करने वाले सभी पत्रकारों, कैमरामैन, स्ट्रिंगरों के लिए श्रमिक कल्याण बोर्ड बने और बीमा सुरक्षा दी जाए।
बुद्ध ने समानता का पाठ पढ़ाया और श्रमिक दिवस हमें अधिकारों की याद दिलाता है। जब श्रम को सम्मान और ज्ञान को दिशा मिलेगी, तभी “विकसित भारत 2047” का सपना साकार होगा।
आइए, इस मई माह में हम संकल्प लें कि हर हाथ को काम, हर काम को सम्मान और हर मन को बुद्ध का ज्ञान मिले।






