नफरत की राजनीति के बीच ये तस्वीर बहुत कुछ कहती है”

*”नफरत की राजनीति के बीच ये तस्वीर बहुत कुछ कहती है”*

 

*बहराइच अस्पताल का कमरा:*

 

बिस्तर पर लेटी हैं *भाजपा विधायक अनुपमा जायसवाल* – चेहरा झुलसा हुआ।

बगल में खड़े हैं *सपा मुखिया अखिलेश यादव* – हालचाल पूछते हुए।

 

*कहानी क्या है?*

अनुपमा जायसवाल बहराइच में विरोध प्रदर्शन के दौरान *अखिलेश यादव का पुतला जला रही थीं*। तभी हादसा हुआ और वो बुरी तरह झुलस गईं।

 

*आज:*

जिन अखिलेश का पुतला जलाया गया था, वही अखिलेश उनका हाल जानने अस्पताल पहुंचे। डॉक्टर से बात की। जल्द स्वस्थ होने की दुआ दी।

 

*ये है असली ‘राजनीति’ 🕊️*

 

वो पुतला जला रही थीं उनका…

वो अस्पताल पहुंचे उनका हाल जानने।

 

बिस्तर पर भाजपा विधायक अनुपमा जायसवाल,

बगल में खड़े सपा प्रमुख अखिलेश यादव।

 

मतभेद विचारों का हो, मनभेद इंसानियत का नहीं।

लड़ाई सियासत की हो, संवेदना की नहीं।

 

इसीलिए कहते हैं – अखिलेश ‘जन नेता’ यूं ही नहीं हैं ❤️

 

 

> पुतला जला के नफरत दिखाई थी जिसने ,

> अस्पताल आके मोहब्बत निभाई है उसने।

>

> ये फोटो सबक है सियासत वालों को,

> दुश्मनी कुर्सी से है, इंसान से नहीं।

>

> चेहरा झुलसा है विधायक जी का,

> पर रोशन हुई है सियासत की तस्वीर।

>

> अखिलेश ने बता दिया आज –

> ‘नेता’ वो नहीं जो सिर्फ भाषण दे,

> ‘नेता’ वो है जो दर्द में साथ खड़ा रहे 🤝

 

 

> *नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान*

>

> BJP विधायक: पुतला जलाया अखिलेश का 🔥

> अखिलेश यादव: अस्पताल पहुंचे विधायक का हाल जानने 🏥

>

> *फर्क साफ है:*

> एक तरफ ‘पुतला जलाओ’ पॉलिटिक्स,

> दूसरी तरफ ‘इंसान बचाओ’ पॉलिटिक्स।

>

> राजनीति में विरोध जरूरी है,

> पर विरोधी के दर्द पर मरहम लगाना – ये ‘संस्कार’ है।

>

> *ये तस्वीर पूछ रही है:*

> हम नफरत चुनेंगे या इंसानियत?

> पुतला जलाएंगे या रिश्ता निभाएंगे?

 

 

1. _”पुतला जिसका जलाया, हाल उसी ने पूछा – इसे कहते हैं ‘बड़प्पन'”_

2. _”सियासत में हार-जीत चलती है, इंसानियत नहीं हारनी चाहिए”_

3. _”अखिलेश मिलने गए, क्योंकि नेता से पहले वो इंसान हैं”_

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