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तालाब की जमीन पर कब्जा: जलेसर में राजस्व घोटाले की परतें खुलीं, न्यायालय सख्त — मिलीभगत पर कार्रवाई के संकेत, संकलन राम नरेश यादव

*तालाब की जमीन पर कब्जा: जलेसर में राजस्व घोटाले की परतें खुलीं, न्यायालय सख्त — मिलीभगत पर कार्रवाई के संकेत*

*तुर्रम सिंह राजपूत✍️*

 

एटा (जलेसर), 20 अप्रैल 2026।

जनपद एटा की जलेसर तहसील में ग्राम सभा की तालाब भूमि पर अवैध कब्जे को लेकर एक गंभीर राजस्व घोटाला सामने आया है, जिस पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) एटा ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 30 मार्च 2026 को पारित आदेश में न्यायालय ने मामले की गहनता को स्वीकार करते हुए राजस्व विभाग की संदिग्ध भूमिका पर चिंता जताई है।

क्या है पूरा मामला?

प्रकरण संख्या 73/2026 में वादी शेखर कुमार उर्फ शेखर सिंह द्वारा दाखिल वाद में गाटा संख्या 1401 (रकबा 0.065 हेक्टेयर) को तालाब की भूमि बताया गया है, जो मोहननगर टिमरुआ (या शाहनगर टिमरुआ) क्षेत्र में स्थित है। तहसीलदार जलेसर द्वारा जारी पत्रांक 1328/1/रा०लि० दिनांक 01.11.2025 के अनुसार, उक्त भूमि पर प्रवेश कुमार, श्रीकृष्ण सहित अन्य लोगों द्वारा अवैध कब्जा किया गया है।

जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि यह भूमि ग्राम सभा की सार्वजनिक संपत्ति है, जिस पर निजी स्वार्थ के लिए कब्जा करना उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 67 के अंतर्गत दंडनीय अपराध है।

राजस्व निरीक्षक की भूमिका संदिग्ध

न्यायालय ने राजस्व निरीक्षक द्वारा प्रस्तुत विभिन्न रिपोर्टों को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। आदेश में कहा गया है कि एक ही अधिकारी ने अलग-अलग तिथियों—29.04.2025, 07.11.2025, 03.05.2024 आदि—पर परस्पर विरोधाभासी आख्या प्रस्तुत कीं।

कुछ रिपोर्टों में जहां अवैध कब्जा स्वीकार किया गया, वहीं अन्य में कब्जा न होने की बात कही गई। इस विरोधाभास को न्यायालय ने गंभीर मानते हुए इसे संभावित राजनीतिक दबाव या अवैध हितों से प्रेरित करार दिया है। साथ ही यह भी संकेत दिया गया कि अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग किया है, जो आपराधिक श्रेणी में आता है।

अदालत के सख्त निर्देश

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मामले में निम्नलिखित निर्देश जारी किए हैं—

राजस्व निरीक्षक को पुनः निष्पक्ष जांच कर स्पष्ट आख्या 17 अप्रैल 2026 तक प्रस्तुत करने के निर्देश।

अवैध कब्जा और अधिकारियों की मिलीभगत साबित होने पर संबंधित कर्मियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही की चेतावनी।

उप-जिलाधिकारी जलेसर को पूरे मामले पर सतर्क निगरानी रखते हुए न्यायालय को सूचित करने का आदेश।

पूर्व में प्रस्तुत आख्या के कई बिंदुओं को गलत और अस्वीकार्य घोषित किया गया।

पृष्ठभूमि और गंभीर संकेत

यह भूमि राजस्व अभिलेखों में लंबे समय से तालाब के रूप में दर्ज है। पूर्व की रिपोर्टों में अवैध कब्जे की पुष्टि होने के बावजूद बाद की रिपोर्टों में बदलाव कर मामले को दबाने की कोशिश की गई। न्यायालय ने इसे न केवल प्रशासनिक लापरवाही, बल्कि संभावित भ्रष्टाचार का मामला माना है।

जनता की नजरें अब अगली कार्रवाई पर

ग्राम सभा की सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा से जुड़े इस प्रकरण में न्यायालय का यह आदेश पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें आगामी जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं, जो इस पूरे प्रकरण की सच्चाई को उजागर करेगी।

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