*’शिक्षक सशक्तिकरण’ से साकार होगा विकसित भारत- 2047 का सपना*
*- राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किया उत्तरी क्षेत्रीय ‘नेशनल कॉन्क्लेव-2026’ का विधिवत शुभारंभ*
*- यूपी सहित 9 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के दिग्गज शिक्षाविद कर रहे हैं मंथन*
*- एनईपी-2020 के तहत ‘पुष्टि’ और ‘मित्रा’ से होगा शिक्षकों का सर्वांगीण विकास*
*आगरा, 27 अक्टूबर।* उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के विजन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (एनईपी) के अनुरूप शिक्षकों की गुणवत्ता सुधारने के लिए आगरा में दो दिवसीय ‘नेशनल कॉन्क्लेव-2026′ का भव्य शुभारंभ हुआ। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) और डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन उत्तर प्रदेश की महामहीम राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, एनसीटीई अध्यक्ष प्रो. पंकज अरोड़ा, संस्कृत प्रमोशन फाउंडेशन के निदेशक प्रो. चांद किरण सलूजा और कुलपति प्रो. आशु रानी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
इस कॉन्क्लेव का मुख्य विषय राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी 2020) के अंतर्गत शिक्षकों के व्यावसायिक सशक्तिकरण हेतु “पुष्टि (एनपीएसटी) और मित्रा (एनएमएम) प्रणाली का राष्ट्रव्यापी कार्यान्वयन” है। इसमें उत्तर भारत के 9 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों- चंडीगढ़, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के शिक्षाविद, प्रोफेसर, डायट, सीबीएसई, नवोदय विद्यालय संगठन और केंद्रीय विद्यालय संगठन के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
*’हुनर हाट’ और 3डी प्रतिमाएं रहीं आकर्षण का केंद्र*
कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना, राष्ट्रगीत और दीप प्रज्ज्वलन से हुई। कार्यक्रम में ललित कला संस्थान द्वारा लगाई गई ‘हुनर हाट’ प्रदर्शनी में राज्यपाल ने छात्रों की प्रतिभा की खूब सराहना की। उन्होंने अपने लिए रेशम के धागे के कंगन, मिट्टी के दीये और मंडला आर्ट पेंटिंग खरीदी। अतिथियों का स्वागत 3डी प्रिंटर तकनीक से तैयार मां सरस्वती की प्रतिमाओं से किया गया। केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने भी वीडियो संदेश के जरिए अपनी शुभकामनाएं दीं।
*योगी सरकार के प्रयासों से शिक्षा में आ रहा सकारात्मक बदलाव*
योगी सरकार के नेतृत्व में प्रदेश में शिक्षा का ढांचा तेजी से सुधर रहा है। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्यायन ने बताया कि आज उत्तर प्रदेश में यूजीसी ग्रेड वन के 06, नैक मूल्यांकन में A++ ग्रेड के 07 विश्वविद्यालय और A+ ग्रेड के 02 सरकारी तथा 07 निजी विश्वविद्यालय शामिल हैं। यह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि इस कॉन्क्लेव में 9 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षाविद गहन मंथन कर रहे हैं। जब भी मंथन हुआ है, उसमें से अमृत ही निकला है। यह कॉन्क्लेव ‘विकसित भारत 2047’ के सपने को साकार करने में एक मील का पत्थर साबित होगा। नई शिक्षा नीति स्वामी विवेकानंद के दर्शन पर आधारित है, जो नैतिकता प्रदान करती है, ज्ञान-विज्ञान सिखाती है और व्यक्ति को स्वावलंबी बनाकर अपनी जड़ों व संस्कृति से जोड़ती है।
*शिक्षा में परिवर्तन का वास्तविक आधार शिक्षक का सशक्तिकरण*
राज्यपाल एवं कुलाधिपति, उत्तर प्रदेश आनंदीबेन पटेल ने कहा कि शिक्षा में परिवर्तन का वास्तविक आधार शिक्षक का सशक्तिकरण, उसकी व्यावसायिक दक्षता और निरंतर विकास है। बड़े बौद्धिक मंथन केवल राजधानी तक सीमित न रहकर अन्य शहरों में भी होने चाहिए, इसी सोच के तहत आगरा को चुना गया है। शिक्षक केवल औपचारिकता तक सीमित न रहें, बल्कि नवाचार के जरिए ‘विकसित भारत’ के निर्माण में योगदान दें। ‘मित्रा’ डिजिटल पोर्टल और ‘पुष्टि’ दूरियां मिटाकर शिक्षकों को सक्षम बनाने वाली एक ऐतिहासिक पहल है।
*शिक्षकों का समावेशी और तकनीकी विकास जरूरी*
एनसीटीई के अध्यक्ष प्रो. पंकज अरोड़ा ने कहा कि हमारे देश में विश्व का सबसे बड़ा शिक्षा तंत्र है, जिसमें 14.67 लाख स्कूल, 1 करोड़ 3 लाख शिक्षक और 25 करोड़ विद्यार्थी शामिल हैं। एनईपी 2020 के तहत सेवारत शिक्षकों के लिए लाई गई ‘पुष्टि’ और ‘मित्रा’ के जरिए शिक्षकों को समावेशी, तकनीकी और मूल्यनिष्ठ प्रशिक्षण के लिए तैयार किया जा रहा है। सभी 9 राज्यों को इसे अपनी स्थानीय भाषा और संस्कृति के अनुसार लागू करने की छूट दी गई है।
*शताब्दी वर्ष में मेजबानी गौरव की बात*
कुलपति प्रो. आशु रानी ने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष (1927–2027) में इस राष्ट्रीय कॉन्क्लेव की मेजबानी करना हमारे लिए एक गौरवमयी उपलब्धि है। कुलाधिपति महोदया के निर्देशन में हमारा विश्वविद्यालय न केवल नैक में A+ प्राप्त कर चुका है, बल्कि समाज के अंतिम छोर तक सकारात्मक बदलाव लाने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों का उन्नयन और टीबी उन्मूलन जैसी कई महत्वपूर्ण पहल भी कर रहा है।
*शिक्षकों का क्षमता निर्माण है मुख्य लक्ष्य*
एनसीटीई के अकादमिक सलाहकार व कॉन्क्लेव समन्वयक डी. के. चतुर्वेदी ने कहा कि देशभर में आयोजित क्षेत्रीय श्रृंखला का यह चौथा और सबसे बड़ा आयोजन है। यह कॉन्क्लेव देश के 1 करोड़ से अधिक इन-सर्विस शिक्षकों के क्षमता निर्माण और व्यावसायिक विकास पर पूरी तरह से केंद्रित है, ताकि वे नई शिक्षा नीति के तहत बेहतर तरीके से काम कर सकें।
*बॉक्स*
*’मित्रा’ (MITRA) के सफल क्रियान्वयन के लिए मंथन, विशेषज्ञों ने दिए टिप्स*
नेशनल कॉन्क्लेव के प्रथम दिवस के तकनीकी सत्र- प्रथम में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत ‘मित्रा’ (MITRA – NMM) को अपनाने और क्षमता निर्माण पर गहन मंथन हुआ। संस्कृत प्रमोशन फाउंडेशन के प्रो. चांद किरण सलूजा ने इसके मार्गदर्शक सिद्धांतों और रूपरेखा पर प्रकाश डाला।
सत्र में डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने क्रियान्वयन की रणनीति बताई। डॉ. पारुल सिंह, सौरभ सिंह और मुकुंद कुमार झा ने मित्रा के डिजिटल पोर्टल, मोबाइल एप्लिकेशन और तकनीकी कार्यप्रणाली का जीवंत प्रदर्शन किया। दिल्ली विवि के प्रो. रजनी रंजन सिंह और सुनील बजाज ने संवादात्मक सत्र में प्रतिभागियों की जिज्ञासाएं शांत कीं। अंत में प्रो. आशीष श्रीवास्तव और मनीष सिंह की टीम ने पोर्टल पर व्यावहारिक प्रशिक्षण और ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया समझाई।














