हजारों करोड़ की वक्फ संपत्तियां,फिर भी गरीबी में जी रही मुस्लिम कौम! आखिर इन संपत्तियों का लाभ किसे मिल रहा है?
*कौम पूछे वक्फ से सवाल ??? बस अब और खामोशी नहीं….*
*सहारनपुर।*
*मुस्लिम समाज की तरक्की के लिए वक्फ संपत्तियों का पारदर्शी उपयोग और जिम्मेदारों की जवाबदेही बेहद जरूरी है,जिस कौम के पास हजारों करोड़ रुपये मूल्य की वक्फ संपत्तियां होने की बात कही जाती हो,उसी कौम के लाखों गरीब परिवार आज भी आर्थिक तंगी,बेरोजगारी, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं,ऐसे में एक बड़ा सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर इन संपत्तियों से होने वाली आय का लाभ समाज के जरूरतमंद लोगों तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा है?* *जबकि वक्फ संपत्तियों का मूल उद्देश्य धार्मिक,शैक्षिक और सामाजिक कल्याण जैसे कार्यों को बढ़ावा देना होता है, मुस्लिम कौम के जरूरतमंद लोगों की सहायता करना होता है,मुस्लिमों वक्फ से मांग उठाओ की इन सभी वक्फ की संपत्तियों का सही ढंग से प्रबंधन किया जाए,उनकी आय का पारदर्शी उपयोग हो और योजनाएं ईमानदारी से लागू की जाएं, तो मुस्लिम गरीब बच्चों की शिक्षा, मुस्लिम युवाओं को रोजगार और मुस्लिम बहनें जिनका शिक्षा में बुंलद मुकाम हासिल करने का सपना अधूरा ही रह जाता है,अगर 26 करोड़ मुसलमानो में से सिर्फ दो करोड़ जिन्दा लोग वक्फ के जिम्मेदारों से सवाल पूछना शुरू कर दे तो जरूरतमंद परिवारों की* *आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है,लेकिन सवाल यह है की 70 वर्ष बीत जाने के बाद भी आखिर क्यों, मुस्लिम समाज के अनेक गरीब परिवार अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा,बेहतर रोजगार,दिलाने के लिए आज भी संघर्ष कर करते हुए दिखाई दे रहे हैं,मुस्लिम नौजवान रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं और गरीब महिलाएं आर्थिक आत्मनिर्भरता के अवसरों से वंचित हैं,तो सवाल उठना चाहिए आखिर वक्फ संपत्तियों की आय से इन समस्याओं को दूर करने के लिए कितने प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं? क्या जरूरतमंद बच्चों के लिए आधुनिक शिक्षा संस्थान, छात्रवृत्ति योजनाएं और तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र पर्याप्त संख्या में स्थापित किए गए हैं? क्या बेरोजगार युवाओं को हुनरमंद बनाने और रोजगार उपलब्ध कराने के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था है? क्या गरीब विधवाओं, बेसहारा महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए योजनाएं चलाई जा रही हैं? यदि ऐसी योजनाएं संचालित हो रही हैं, तो उनका विवरण सार्वजनिक होना चाहिए,और यदि अपेक्षित काम नहीं हो रहा है, तो इसके कारणों की जांच होनी चाहिए,यह भी गंभीर चिंता का विषय है कि यदि कहीं वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जे,आय के दुरुपयोग या प्रबंधन में अनियमितताओं की शिकायतें हैं,तो उनकी निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए,हालांकि, बिना प्रमाण किसी व्यक्ति या संस्था पर आरोप लगाना उचित नहीं है,लेकिन सार्वजनिक हित से जुड़ी संपत्तियों के संबंध में मेरे जैसे हर जीवित नागरिक का सवाल पूछने का अधिकार है,नेक और ईमानदार मुस्लिम भाइयों से अपील है कि वे भावनाओं से आगे बढ़कर तथ्यों के आधार पर सवाल पूछें,वक्फ बोर्ड के जिम्मेदारों से जानना चाहिए कि कुल कितनी संपत्तियां उसके प्रबंधन में हैं,उनसे प्रतिवर्ष कितनी आय होती है,कितनी संपत्तियों पर कब्जे या विवाद की स्थिति है और उस आय का कितना हिस्सा शिक्षा,स्वास्थ्य, रोजगार तथा गरीबों की सहायता पर खर्च किया जाता है,वक्फ संपत्तियों की आय और खर्च का नियमित सार्वजनिक ऑडिट हो,संपत्तियों का रिकॉर्ड पारदर्शी बनाया जाए और समाज के जरूरतमंद लोगों तक लाभ पहुंचाने के लिए ठोस योजनाएं तैयार की जाएं। साथ ही,उन योजनाओं के परिणामों की भी समीक्षा होनी चाहिए,ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वास्तव में कितने गरीब परिवारों को लाभ मिला है,याद रखिए, वक्फ संपत्तियां किसी चंद व्यक्ति की निजी जागीर नहीं, बल्कि निर्धारित वक्फ उद्देश्यों के लिए समर्पित संपत्तियां हैं। इनके प्रबंधन की जिम्मेदारी निभाने वालों का कर्तव्य है कि वे ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम करें,आखिर कब तक गरीब मुस्लिम परिवार बेहतर शिक्षा,रोजगार और सम्मानजनक जीवन के लिए संघर्ष करते रहेंगे? कब वक्फ संपत्तियों की क्षमता का उपयोग समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की मदद के लिए किया जाएगा? अब समय आ गया है कि मुस्लिम समाज के जागरूक नागरिक,बुद्धिजीवी और सामाजिक संगठन इन सवालों को गंभीरता से उठाएं,किसी से टकराव के लिए नहीं, बल्कि अपनी कौम के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए,क्योंकि किसी भी समाज की असली तरक्की उसकी संपत्तियों के मूल्य से नहीं,बल्कि इस बात से मापी जाती है कि उन संसाधनों से उसके गरीब बच्चों,बेरोजगार युवाओं,जरूरतमंद महिलाओं और वंचित परिवारों का जीवन कितना बेहतर हुआ है,वक्फ संपत्तियों का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचे,शिक्षा का उजाला हर घर तक पहुंचे और समाज का हर कमजोर व्यक्ति आत्मनिर्भर बने यही जवाबदेह प्रबंधन की असली कसौटी है :*
















