आगरा को चाहिए साबरमती मॉडल, सिर्फ सजावट नहीं!
यमुना की बदहाली पर कब तक हाथ पर हाथ धरे बैठी रहेगी प्रदेश सरकार? रिवर कनेक्ट कैंपेन ने उठाई ठोस कार्ययोजना और समयबद्ध कार्रवाई की मांग।
प्रेस वक्तव्य
बृज खंडेलवाल
संयोजक, रिवर कनेक्ट कैंपेन, आगरा
24 अक्टूबर 2026
आगरा, 24 अक्टूबर। ताजमहल के साये में बहती यमुना आज भी गंदे नालों, सीवेज और सरकारी उदासीनता का बोझ ढो रही है। नदी को जीवन देने के बजाय योजनाओं, घोषणाओं और बैठकों का सिलसिला चलता रहता है। सवाल सीधा है: आखिर आगरा की यमुना को साफ, सुरक्षित और जीवंत बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ठोस कदम कब उठाएगी?
रिवर कनेक्ट कैंपेन ने प्रदेश सरकार और आगरा प्रशासन से मांग की है कि यमुना के पुनर्जीवन के लिए साबरमती रिवरफ्रंट की तर्ज पर एक समग्र, व्यावहारिक और समयबद्ध योजना तैयार की जाए। केवल घाटों, पार्कों, साइकिल ट्रैक और नदी किनारे की सजावट से यमुना की बदहाली दूर नहीं होगी। नदी को पहले प्रदूषण से मुक्त करना होगा, उसका जलप्रवाह बहाल करना होगा और बाढ़ से सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।
दिल्ली में यमुना के किनारे रिवरफ्रंट विकसित करने की योजनाओं पर चर्चा हो रही है। साबरमती के तट पर अहमदाबाद ने नदी किनारे विकास का एक मॉडल प्रस्तुत किया है। लेकिन आगरा में यमुना की दुर्दशा दूर करने के लिए अब तक ठोस, एकीकृत और समयबद्ध कार्रवाई का अभाव दिखाई देता है। प्रदेश सरकार को यह समझना होगा कि यमुना केवल पर्यटन का साधन नहीं, बल्कि ब्रज की जीवनरेखा और आगरा की प्राकृतिक धरोहर है।
रिवर कनेक्ट कैंपेन की प्रमुख मांगें हैं:
1. साबरमती मॉडल पर समग्र रिवरफ्रंट योजना: यमुना के दोनों किनारों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर सुरक्षित तटबंध, सुव्यवस्थित घाट, हरित क्षेत्र और पैदल मार्ग विकसित किए जाएं। लेकिन निर्माण कार्य नदी के प्राकृतिक प्रवाह, पर्यावरण और बाढ़ क्षेत्र की सुरक्षा को ध्यान में रखकर हो।
2. नदी तल की सफाई और गाद निकासी: यमुना में जमा गाद, ठोस कचरे और अन्य अवरोधों का वैज्ञानिक आकलन किया जाए। जरूरत के अनुसार सफाई और गाद निकासी की जाए, ताकि नदी की जलधारण क्षमता और प्रवाह में सुधार हो सके। यह काम पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप होना चाहिए।
3. आगरा बैराज का निर्माण: यमुना में पानी का स्तर नियंत्रित करने, जल उपलब्धता सुधारने और जरूरत के समय पानी का भंडारण करने के लिए बैराज की व्यवहार्यता पर वर्षों से चल रही चर्चा को ठोस निर्णय तक पहुंचाया जाए। परियोजना की तकनीकी, पर्यावरणीय और वित्तीय जांच पूरी कर स्पष्ट समयसीमा घोषित की जाए। बैराज को नदी में पर्याप्त और पर्यावरणीय दृष्टि से जरूरी जलप्रवाह बनाए रखने की व्यवस्था के साथ जोड़ा जाए।
4. गंदे पानी के लिए समानांतर नहर और डायवर्जन व्यवस्था: शहर के नालों, घरेलू सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट को बिना शोधन यमुना में गिरने से रोका जाए। इसके लिए पर्याप्त सीवेज शोधन क्षमता, नालों के इंटरसेप्शन और डायवर्जन तथा जरूरत के अनुसार अलग निकासी व्यवस्था विकसित की जाए। केवल कागजों पर बने एसटीपी या अधूरी परियोजनाओं से नदी साफ नहीं होगी।
5. यमुना किनारा सड़क और नदी तट का समन्वित विकास: यमुना किनारा सड़क तथा आसपास के विकास कार्यों की समीक्षा की जाए। नदी के प्राकृतिक बहाव, जलभराव, बाढ़ क्षेत्र और पर्यावरण पर उनके प्रभाव का आकलन हो। नदी को संकरा करने या उसके प्राकृतिक क्षेत्र पर अनावश्यक दबाव डालने वाली गतिविधियों से बचा जाए।
6. समयबद्ध कार्ययोजना और सार्वजनिक जवाबदेही: प्रदेश सरकार एक उच्चस्तरीय समन्वय समिति बनाए, जिसमें संबंधित विभागों, विशेषज्ञों और नागरिक संगठनों को प्रतिनिधित्व मिले। परियोजनाओं की लागत, जिम्मेदार विभाग, काम पूरा करने की समयसीमा और प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। हर तीन महीने में समीक्षा हो, ताकि जनता को पता चले कि काम कहां तक पहुंचा।
रिवर कनेक्ट कैंपेन के संयोजक बृज खंडेलवाल ने कहा कि आगरा में यमुना की समस्या किसी एक विभाग के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती। जल संसाधन, नगर विकास, सिंचाई, प्रदूषण नियंत्रण और स्थानीय प्रशासन को मिलकर काम करना होगा। हर विभाग दूसरे पर जिम्मेदारी डालता रहेगा, तो नदी इसी तरह दम तोड़ती रहेगी।
उन्होंने कहा, “साबरमती मॉडल का मतलब केवल चमकते घाट और खूबसूरत किनारे नहीं है। आगरा को ऐसा मॉडल चाहिए, जिसमें प्रदूषण नियंत्रण, जलप्रवाह, बाढ़ सुरक्षा, नदी तल की सफाई और सुव्यवस्थित नदी तट विकास एक साथ हों। पहले नदी को बचाइए, फिर उसे सजाइए।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि यमुना को पुनर्जीवित करने के लिए केवल घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं। सरकार को स्पष्ट समयसीमा, पर्याप्त बजट और जवाबदेही तय करनी होगी। आगरा की जनता को यह जानने का अधिकार है कि यमुना के उद्धार के लिए क्या काम हो रहा है, कितना पैसा खर्च हो रहा है और परिणाम कब दिखाई देंगे।
रिवर कनेक्ट कैंपेन की मांग स्पष्ट है: यमुना को प्रदूषित नाले की नियति से मुक्त कीजिए। साबरमती मॉडल की उपयोगी विशेषताओं को अपनाइए, स्थानीय जरूरतों के अनुसार योजना बनाइए और तत्काल काम शुरू कीजिए। ताजमहल की खूबसूरती तभी पूरी होगी, जब उसके किनारे बहती यमुना भी स्वच्छ, प्रवाहमान और जीवंत होगी।














