एटा में ‘भू-माफिया’ और पुलिस का ‘नापाक गठबंधन’: 88 बार गुहार के बाद भी न्याय की दरकार, अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान! रिपोर्ट अनिल सोलंकी

*एटा में ‘भू-माफिया’ और पुलिस का ‘नापाक गठबंधन’: 88 बार गुहार के बाद भी न्याय की दरकार, अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान!*

 

नई दिल्ली/एटा, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के एटा जिले में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उदासीनता का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। भारतीय मीडिया फाउंडेशन (बीएमएफ) नेशनल कोर कमेटी ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हुए जिले में व्याप्त ‘भू-माफिया राज’ और उन्हें मिल रहे स्थानीय पुलिस के कथित संरक्षण पर सवाल खड़े किए हैं।

मामले का सार: जमीन पर कब्जा और प्रशासनिक विफलता

पीड़ित महिलाओं, प्रवेश कुमारी और गिरजा देवी, द्वारा मुख्यमंत्री को भेजे गए प्रार्थना पत्र से स्पष्ट है कि उनकी पुश्तैनी जमीन (गाटा सं. 441) पर दबंगों का कब्जा है। शिकायत के अनुसार, सुरेश चंद्र यादव, सुखवीर सिंह, धर्मेंद्र कुमार और अन्य लोगों ने मिलकर न केवल जमीन की मेड़ तोड़कर अवैध रूप से कब्जा किया, बल्कि न्यायालय और प्रशासनिक आदेशों की भी धज्जियां उड़ाईं।

प्रमुख बिंदु:

88 बार गुहार, शून्य परिणाम: पीड़ित पक्ष का कहना है कि वे अब तक कुल 88 बार प्रार्थना पत्र दे चुके हैं, लेकिन जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस की चुप्पी ने अपराधियों के हौसले बुलंद कर दिए हैं।

न्यायालय के आदेश का भी उल्लंघन: इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशों और राजस्व विभाग/पुलिस की कई बार की गई पैमाइश के बावजूद, कब्जाधारियों ने हर बार दोबारा मेड़ तोड़कर जमीन को अपने अवैध कब्जे में बनाए रखा।

पुलिस की भूमिका पर सवाल: पीड़ित का स्पष्ट आरोप है कि स्थानीय पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत के बिना भू-माफियाओं का यह दुस्साहस संभव नहीं है। थाना निधौली कलां में दर्जनों मुकदमे दर्ज होने के बावजूद ठोस कार्रवाई न होना पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न चिह्न लगाता है।

बीएमएफ की चेतावनी: अब होगी आर-पार की लड़ाई

भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल) कोर कमेटी के संस्थापक एके बिंदुसार ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है:

“एटा में भू-माफियाओं का राज कायम है और स्थानीय पुलिस इसमें प्रत्यक्ष रूप से सहयोग कर रही है। यह भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा है। अब आर-पार की लड़ाई होगी। जो भी अधिकारी इस मामले में दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ केवल विभागीय कार्रवाई नहीं, बल्कि न्यायालयी कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाएगी।”

न्याय की मांग,

पीड़ित महिलाओं ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है कि उनकी भूमि को भू-माफियाओं के अवैध कब्जे से मुक्त कराया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई हो।

यह मामला उत्तर प्रदेश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर एक बड़ा तमाचा है। अब इंतजार है माननीय मुख्यमंत्री महोदय के बुलडोजर का और देखना यह है कि क्या शासन प्रशासन इस मामले में कोई ठोस कदम उठाता है या फिर पीड़ित परिवार को और भी लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ेगी?

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