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महेशलुंडी निशुल्क शिक्षा केंद्र में आध्यात्मिक ज्ञान की धारा

अमित अग्रवाल गिरिडीह झारखंड

 

 

महेशलुंडी निशुल्क शिक्षा केंद्र में आध्यात्मिक ज्ञान की धारा

 

 

 

गिरिडीह के महेशलुंडी स्थित निशुल्क शिक्षा केंद्र में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जैन धर्म की साध्वी ने केंद्र पहुंचकर बच्चों को जीवन जीने की कला और आध्यात्मिक मूल्यों की शिक्षा दी। उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि केवल किताबी ज्ञान सफलता के लिए पर्याप्त नहीं है बल्कि पढ़ाई के साथ आध्यात्मिक ज्ञान का होना भी अनिवार्य है। साध्वी ने बच्चों को समझाया कि जब तक आप भीतर से संतुष्ट नहीं होंगे तब तक आप समाज और देश की सेवा निस्वार्थ भाव से नहीं कर पाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईमानदारी और सेवा का आनंद तभी मिलता है जब मनुष्य का मन शांत और स्थिर हो। आध्यात्मिक शक्ति ही वह माध्यम है जो व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में भी सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।

कर्म का महत्व और मानसिक स्वास्थ्य

 

इस सत्र के दौरान बच्चों को कर्म के सिद्धांत के बारे में विस्तार से बताया गया। वर्तमान समय में विद्यार्थियों के बीच बढ़ती अवसाद और आत्महत्या जैसी गंभीर समस्याओं पर चिंता व्यक्त करते हुए साध्वी ने इससे बचाव के तरीके साझा किए। उन्होंने बताया कि किस प्रकार सकारात्मक सोच और मानसिक दृढ़ता के जरिए डिप्रेशन से दूर रहा जा सकता है। बच्चों को यह सीख दी गई कि जीवन की चुनौतियों से घबराने के बजाय उनका धैर्य से सामना करना चाहिए।

 

मुखिया ने बढ़ाया बच्चों का उत्साह

 

कार्यक्रम में उपस्थित स्थानीय मुखिया शिवनाथ साव ने भी बच्चों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने बच्चों को हमेशा खुश रहने की सलाह दी और कहा कि यदि मन में खुशी और उमंग रहेगी तो तनाव पास भी नहीं भटकेगा। उन्होंने विद्यार्थियों से मन लगाकर पढ़ने की अपील की ताकि वे भविष्य में अच्छे नागरिक बन सकें। अंत में मुखिया ने साध्वी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आध्यात्मिक सत्रों से बच्चों के चरित्र निर्माण में बड़ी सहायता मिलती है।

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