चंबल नदी पर 40 साल बाद बन रहे पुल पर ‘अफ़सरशाही’ का ब्रेक:
यूपी के हिस्से में सिर्फ 400 मीटर का ढलान, आगे रास्ता गायब!
मुख्य बात
40 साल की प्रतीक्षा: चंबल को पार कर यूपी-एमपी को जोड़ने वाले पुल का निर्माण अंतिम दौर में, लेकिन कनेक्टिविटी पर संकट।
जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा: यूपी PWD के अधीक्षण अभियंता बोले— ‘एसडीएम बाह से पूछो’, एमपी के चीफ इंजीनियर ने कहा— ‘हमने अपना काम किया, आगे यूपी जाने’।
कस्बे पर संकट: अस्थाई पीपा पुल का रास्ता पिनाहट कस्बे के बीच से, जिसे यूपी शासन पहले ही बता चुका है ‘असुरक्षित’।
शंकर देव तिवारी
बाह/पिनाहट। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा को जोड़ने वाले चंबल नदी के ऐतिहासिक पिनाहट घाट पुल का निर्माण 40 साल के लंबे इंतजार के बाद अब अंतिम चरण में है। लेकिन, दोनों राज्यों के विभागों और अधिकारियों के बीच तालमेल की कमी के कारण यह करोड़ों का प्रोजेक्ट उद्घाटन से पहले ही विवादों और बड़े सवालों के घेरे में आ गया है।
ताजा मामला पुल के उत्तर प्रदेश की सीमा में जुड़ने वाली एप्रोच रोड (सड़क) का है। मध्य प्रदेश सेतु निगम के मुख्य अभियंता गोपाल सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि वे मध्य प्रदेश शासन के बजट से पुल का निर्माण कर रहे हैं और यूपी की सीमा में महज 300 से 400 मीटर का स्लोप (ढलान मार्ग) बनाकर अपना काम समाप्त कर देंगे। इसके आगे यूपी में वाहनों के आवागमन के लिए सड़क कैसे और किस मार्ग से बनेगी, इस पर उत्तर प्रदेश का लोक निर्माण विभाग (PWD) पूरी तरह मौन है।
अधिकारियों के गैर-जिम्मेदाराना बोल, एसडीएम पर टाला मामलाजब इस गंभीर विषय पर यूपी PWD (निर्माण विभाग-1) के अधीक्षण अभियंता (SE) आर. एस. वर्मा से पूछा गया कि पुल चालू होने के बाद गाड़ियां किस मार्ग से गुजरेंगी, तो उन्होंने हैरान करने वाला जवाब दिया। उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि इसकी जानकारी ‘एसडीएम बाह’ से पता करें। विभाग का अब तक यही रटा-रटाया तर्क है कि यह मध्य प्रदेश का पुल है।
पिनाहट कस्बे में बाढ़ जैसे जाम का खतरा
स्थानीय नागरिकों और जानकारों का कहना है कि जब तक इस पुल के लिए अलग से नए बाईपास या एप्रोच रोड का निर्माण नहीं होता, तब तक यातायात ठप रहेगा। वर्तमान में स्टीमर और अस्थाई प्लाटून (पीपा) पुल के दौरान जिस रास्ते का इस्तेमाल हो रहा है, वह पिनाहट कस्बे के बिल्कुल बीच के संकरे रास्तों से होकर जाता है। उत्तर प्रदेश शासन खुद पहले इस रूट को भारी वाहनों और यातायात के लिए ‘अनुपयुक्त व अनुचित’ मान चुका है। ऐसे में यदि बिना नई सड़क के पुल शुरू हुआ, तो पिनाहट कस्बा पूरी तरह वाहनों के दबाव में घुट जाएगा।
एमपी के सेतुः निगम के मुख्य अभियंता बोले—
एनओसी मिलने में ही लग गए सालोंमध्य प्रदेश सेतु निगम के मुख्य अभियंता गोपाल सिंह के अनुसार, “हमें समय सीमा में पुल बनाने की आदत है, लेकिन उत्तर प्रदेश की तरफ से वन विभाग (Forest Department) और किसानों की एनओसी (NOC) मिलने में ही सालों का वक्त बर्बाद हो गया। हम तय योजना के मुताबिक 400 मीटर का स्लोप बनाकर काम सौंप देंगे, आगे का काम यूपी सरकार को देखना है।”
40 साल का संघर्ष, अब मुख्यमंत्रियों की चौखट पर मामला
इस पुल को बनवाने के लिए पिछले 40 सालों से कानूनी लड़ाई लड़ रहे सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठ वकील ने अब दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों (यूपी के सीएम और एमपी के सीएम) को एक विशेष अपील पत्र भेजा है। पत्र में मांग की गई है कि इस अंतर-राज्यीय परियोजना को अफसरशाही और लापरवाही की भेंट चढ़ने से बचाया जाए। तात्कालिक रूप से यूपी सरकार भूमि अधिग्रहण कर नई सड़क के बजट को मंजूरी दे, ताकि पुल बनते ही सीधा आवागमन शुरू हो सके, न कि जनता को एक बार फिर सड़कों के लिए आंदोलन करना पड़े।
बॉक्स
. बड़ा सवाल:
40 साल से बन रहे प्रोजेक्ट में सड़क का विचार क्यों नहीं?जनता का सीधा सवाल है कि यदि चालीस साल से इस पुल को उत्तर प्रदेश से जोड़ने की कवायद चल रही थी, तो यूपी PWD और प्रशासनिक अधिकारियों ने आज तक स्लोप के आगे की मुख्य सड़क और बाईपास को लेकर कोई ठोस योजना या बजट क्यों तैयार नहीं किया? क्या अफसर सिर्फ पुल के ढांचे के खड़े होने का इंतजार कर रहे थे?
PWD आगरा ही चलाता है स्टीमर और पीपा पुल
यह भी विरोधाभास है कि जिस पिनाहट घाट पर चंबल पार करने के लिए सालों से स्टीमर और आस्थाई प्लाटून (पीपा) पुल का संचालन खुद PWD आगरा करता आ रहा है, उसी विभाग के आला अधिकारियों को यह नहीं पता कि स्थायी पुल बनने के बाद ट्रैफिक किस रास्ते से गुजरेगा।
वकील का संघर्ष, अपील
भारतीय जनता पार्टी लीगल सेल के एक्स जनरल सेक्रेटरी व राष्ट्रीय सयोजक सुप्रीम कोर्ट के वकील अनिल गुप्ता जी ने उत्तर प्रदेश के चीफ मिनिस्टर श्रीमान आदित्य नाथ योगी व मध्य प्रदेश के चीफ मिनिस्टर श्रीमान मोहन यादव जी को लिखे पत्र में चिंता ब्यक्त करते हुए लिखा है की उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश राज्य की सीमाओं को जोड़ने वाले चम्बल नदी पर उसैद घाट पर पिछले ४० साल से पुल बनने का सपना देख रही २ राज्यों की जनता को अब निराशा होने लगी है ,मध्य प्रदेश सरकार द्वारा १०० परसेंट पुल का निर्माण कर दिया गया है लकिन उत्तर प्रदेश के लोक निर्माण विभाग द्वारा पिनाहट की तरफ सड़क का निर्माण न करने के कारण यह पुल अगले चुनाब २०२७ तक चालू होने का सपना पूरा होता नहीं दिख रहा है ,यदि २०२७ से पहले यह पुल चालू नहीं किया गया तो अगले चुनाब में यह बाह विधान सभा का स्थानीय मुद्दा होगा ,इसलिए दोनों राज्य के चीफ मिनिस्टर से अनुरोध है की इसको हर हाल में दिवाली तक चालू करबाने की कृपा करे.
















