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हादसों पर मानवता के नाते सिस्टम ही नहीं सबके हाथ मदद के लिए उठें राजनीति चमकाने के लिए ही नहीं—दीप्ति चौहान

हादसों पर मानवता के नाते सिस्टम ही नहीं सबके हाथ मदद के लिए उठें राजनीति चमकाने के लिए ही नहीं—

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दिल्ली बिल्डिंग का हादसा बड़ी लापरवाही का जीता जागता उदाहरण है आज का स्वार्थी इंसान इंसान की जिंदगी से खुलकर खेलने लगा है एसा कोई जिला शहर गांव नहीं जहां हादसे मुंह फैलाए नहीं खड़े हो लेकिन देखने बाला कोई नहीं है क्या सप्ताह महीने भर में प्रशासन और मौजूदा नेताओं को नहीं चाहिए कि कहां पब्लिक सुरक्षित है कहां असुरक्षित है कहां नेतिक अनेतिक चल रहा है उसकी समय समय पर चैकिंग होती रहनी चाहिए क्या सरकारों को बाहर से आए भविष्य बनाने बाले बच्चों के लिए होस्टल जैसी व्यवस्थाएं नहीं करनी चाहिए और सबसे बड़ी बात है कि करोड़पति अरब पति तो पढ़ा सकते इतने महंगे और मौत की बिल्डिंगों में जहां एक शौचालय के बराबर अठारह बाहर हजार जैसा किराया बच्चों से वसूल किया जा रहा है जहां बच्चे खुद स्वस्थ सांसें भी नहीं ले सकते हैं खुलकर और शासन प्रशासन कभी इनकी जानकारी रखने की कोशिश ही नहीं करती है चाहे सरकारी ऑफिस हो चाहे स्कूल चाहे बच्चों के प्राइवेट रहने की व्यवस्थाएं या बस्तियों में जहां पब्लिक रहती है यह सब चैकिंग के दायरे में आते हैं लेकिन जब-तक हादसे इंसानों को ना निवाला बना लें तब तक कोई असर नहीं पड़ता है और पैसे बालों का यह हाल हो गया है कि इतनी कम जगह में पांच पांच छह-छह मंजिला बिल्डिंग बेसमेंट के साथ बनाकर कमाई के नाम पर खुद बाहर चले जाते हैं न किराएदार कभी किसी कमी की शिकायत कर पाता है न मालिक अपनी आंखों से आकर देखता है और किराए का पैसा समय पर चाहिए होता है कमी और जिम्मेदारी तो ऐसे हादसों में बहुत लोगों की होती है सबसे बड़ी कभी माता पिता और बच्चों की एसे मकान बनाने बालों की पड़ोसी जनों और शासन प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी में आता है व्यवस्थाओं पर नजर रखने की और सबसे बड़ी– जैसी इस बक्त बो है जो प्रदर्शन का शोर करके अपनी अपनी राजनीति चमकाने तो पहुंच रहे हैं वरना यह बक्त तो मलवे में दबे उन जिंदगियों के निकालने की है न जाने कितने तड़प रहे हैं कितने तड़प कर दम तोड़ चुके हैं तब हम सबका जनता से लेकर हर व्यक्ति का फर्ज और का कार्य सहयोग कराने में होना चाहिए पर मुर्दों पर राजनीति करना ही मैन मुद्दा बन चुका है जो राजनीति की द्रष्टि से बिल्कुल गलत और अनेतिक है आज के माहोल में हम सबको बहुत संभव कर चलने की आवश्यकता है बच्चे से बड़े कार्यकर्ता से आम इंसान तक के लिए।

*लेखिका,पत्रकार,दीप्ति,चौहान।✍️*

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