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शिक्षक कभी साधारण नहीं होता  प्रलय और निर्माण उसकी गोद मे पलते है , रिपोर्ट निशा कांत शर्मा

श्री चंद्रा स्वामी कॉलेज द्वारा जनपदीय शिक्षक-शिक्षिकाओ का सम्मान समारोह आयोजित- एटा। गत दिवस जेल रोड स्थित श्री चंद्रा स्वामी कॉलेज प्रांगण में एक शिक्षक-शिक्षिकाओ का सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जिसमें एटा जनपद के विभिन्न दूर-दराज अंचलों से पधारे सम्मानित शिक्षक-शिक्षकाओं ने भाग लिया। उक्त कार्यक्रम का संचालन श्री संजय शर्मा द्वारा किया गया और उक्त कार्यक्रम के संयोजक पूर्व पालिकाध्यक्ष राकेश गांधी, सह-संयोजक नरेश भारद्वाज , कोठीवाल आडतिया, पीजी कॉलेज, कासगंज थे। उक्त कार्यक्रम की अध्यक्षता अंतर्राष्ट्रीय कवि डॉक्टर राकेश मधुकर जी द्वारा की गयी इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में जे एल एन डिग्री कॉलेज के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉक्टर राकेश सक्सेना राष्ट्रीय कवि, पूर्व प्राचार्य श्री महावीर सिंह यादव, प्राथमिक शिक्षक संघ के नेता, शिक्षक संघ के नेता लोखपाल सिंह यादव, उच्च प्राथमिक संघ के नेता श्री देवेंद्र सिंह यादव और प्राइमरी शिक्षक संघ के नेता सुशील कुमार चौहान उर्फ टीटू और मंजू लता वर्मा, पूर्व पालिकाध्यक्ष मीरा गांधी, आदि ने विशेष अतिथि के रूप में उक्त कार्यक्रम में भाग लिया।

उक्त कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए अरुण कुमार ने कहा कि डॉ सर्वपल्ली राधा कृष्णनन एवं डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम ने कहा था शिक्षक के हाथ मे राष्ट्र और भविष्य की पीढ़ी सँभालने की जिम्मेदारी होती है लेकिन आज जनगणना मकान गणना आवारा पशुगणना और भी अनगिनत काम शिक्षक के माथे थोप दिए है जिससे समाज मे शिक्षक की नकारात्मक छवी बन रही है इसी के चलाते सोशल मीडिया के जमाने मे कोई भी गमछा धारी स्कूल मे घुसा चला आता है और विडिओ बनाकर एडिट करके सोशल मीडिया मे डाल देता है जिससे शिक्षकों की गरिमा को ठेस पहुंच रही है और पठन पाठन का माहौल विगड़ रहा है आज के दिन मे सरकार से यह भी निवेदन करूँगा की शिक्षक विगत कई वर्षो से बुठापे का सहारा पुरानी पेंशन माग रही है उसे बहाल किया जाये और समाज के अराजक तत्वों पर अंकुश लगा कर और थोपी हुई जिम्मेदारी कम करके भविष्य की पीढ़ी और राष्ट्र निर्माण मे शिक्षक को अपनी सहर्ष भूमिका निभाने दी जाये

और सरकार को आगाह करते है यदि शिक्षकों के साथ नाइसफी जारी रही तो परिणाम गंभीर होंगे zen g उसका उदाहरण है यह भी शिक्षकों द्वारा तैयार की गयी पीढ़ी है जिसने सरकार को हिला दिया

और अंत मे ” शिक्षक कभी साधारण नहीं होता

प्रलय और निर्माण उसकी गोद मे पलते है ”

कार्यक्रम में, रिटायर्ड शिक्षक श्री अशोक सर्किल जी ने समाज और मीडिया में शिक्षकों की छवि को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण रेखा खींची, उन्होंने कहा अक्सर अखबारों और सोशल मीडिया पर शिक्षकों के खिलाफ यह आरोप लगा दिया जाता है कि वे पढ़ाते नहीं है या अपनी जिम्मेदारियों के प्रति गंभीर नहीं है, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत है।

आज़ का शिक्षक न सिर्फ स्कूल में बच्चों का भविष्य संवार रहा है, बल्कि देश के हर छोटे बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रमों को सफल बना रहा है।

श्री अशोक सर्किल जी ने दृढ़ता से कहा कि समाज में शिक्षकों के खिलाफ फैलाईं जा रही नकारात्मकता पूरी तरह निराधार है। हकीकत यह है कि बुनियादी शिक्षा की नींव मजबूत करने से लेकर देश के सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक और सामाजिक कार्य तक ऐसा कोई भी क्षेत्र नहीं है जहां शिक्षक अपनी सेवाएं न दे रहे हों।

वक्ता ने अंत में समाज सरकार और मीडिया से अपील की,कि वे शिक्षकों के प्रति अपना नजरिया बदलें,एक शिक्षक पर सवाल उठाना पूरे राष्ट्र के भविष्य की नींव पर सवाल उठाने जैसा है, शिक्षकों को को कोसने के वजाये उनके काम की परिस्थितियों को समझने और सम्मान देने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर राष्ट्रीय कवि डॉ राकेश सक्सेना ने कहा की सर्वपल्ली राधा कृष्णनन एवं डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम ने कहा था शिक्षक के हाथ मे राष्ट्र और भविष्य की पीढ़ी सँभालने की जिम्मेदारी होती है लेकिन आज जनगणना मकान गणना आवारा पशुगणना और भी अनगिनत काम शिक्षक के माथे थोप दिए है जिससे समाज मे शिक्षक की नकारात्मक छवी बन रही है इसी के चलाते सोशल मीडिया के जमाने मे कोई भी गमछा धारी स्कूल मे घुसा चला आता है और विडिओ बनाकर एडिट करके सोशल मीडिया मे डाल देता है जिससे शिक्षकों की गरिमा को ठेस पहुंच रही है और पठन पाठन का माहौल विगड़ रहा है आज के दिन मे सरकार से यह भी निवेदन करूँगा की शिक्षक विगत कई वर्षो से बुठापे का सहारा पुरानी पेंशन माग रही है उसे बहाल किया जाये और समाज के अराजक तत्वों पर अंकुश लगा कर और थोपी हुई जिम्मेदारी कम करके भविष्य की पीढ़ी और राष्ट्र निर्माण मे शिक्षक को अपनी सहर्ष भूमिका निभाने दी जाये

और सरकार को आगाह करते है यदि शिक्षकों के साथ नाइसफी जारी रही तो परिणाम गंभीर होंगे zen g उसका उदाहरण है यह भी शिक्षकों द्वारा तैयार की गयी पीढ़ी है जिसने सरकार को हिला दिया

और अंत मे ” शिक्षक कभी साधारण नहीं होता

प्रलय और निर्माण उसकी गोद मे पलते है ”

इस अवसर पर श्री महावीर सिंह यादव, पूर्व प्रधानाचार्य; श्री मुनीश यादव राष्ट्रपति पुरस्कारित श्री रविकांत यादव, पूर्व प्रधानाध्यापक; श्री गेंदालाल वर्मा, कुमार पाल गौतम, राज कुमार पाराशर, उमाशंकर सिंह, मयंक तिवारी जी, अरुण कुमार दिवाकर, डॉ. सुनीता यादव, रेनू पोर्टर, विवेक यादव, देवेंद्र यादव, लोकपाल सिंह यादव, सुशील कुमार चौहान उर्फ टी-टू, बिपिन शाक्य, डॉ. रितेश उपाध्याय, डॉ. राजपाल सिंह, सोमेंद्र प्रताप सिंह यादव, फहीम खान, डॉ. अखिलेश यादव, अशोक पाल सिंह चौहान, मेलिना चौहान, तूलिका सक्सेना, अंजली मिश्रा, अल्का भारद्वाज, साधना झा, प्रेमिला दिनकर, अनुपमा द्विवेदी, किरण राठौर, डॉ. रमा द्विवेदी, नीता सिंह, राकेश कोशवा, देवेश कुमार, अक्रम खान, आदित्य सिंह, राधेश्याम यादव, कुलदीप सिंह, सतीश यादव, सतीश बाबू त्रिवेदी, ब्रजेश कुमार शर्मा, विनोद कुमार यादव, कमल सिंह वर्मा, विवेक कुमार कोलसेष्ट, सुलेमान खान, शशिकांत सिंह, सूरजपाल सिंह वर्मा, प्रीति यादव, भरपाल सिंह, शिवावतार बौद्ध, बिसंबर बौद्ध, रामबरन सिंह, राहुल कुमार, भामना बिमल, डॉ. जितेंद्र कुमार यादव, धीरज पाल सिंह, विवेक कुमार सिंह, संतोष कुमार सिंह, सुशील कुमार सिंह आदि सैकड़ों की तादाद में शिक्षक-शिक्षिकाएँ एवं शिक्षक भाई-बहन उपस्थित रहे। कार्यक्रम सयोजक राकेश गाँधी सह सयोजक नरेश भारद्वाज पारुल गाँधी शिवानी गाँधी मीरा गाँधी चंद्रजीत गाँधी यशवंत गाँधी सूरज यादव संदीप यादव ने सयुंक्त रूप से सभी शिक्षक भाई बहिनों का शॉल प्रतीक चिन्ह माल्यार्पण कर बैज लगा कर सम्मान किये सभी शिक्षक भाई बहिनों ने राकेश गाँधी के प्रयासों की भूरि भूरि प्रशांसा की, राकेश गांधी ने अंत में सभी का आभार धन्यवाद ज्ञापित किया

कार्यक्रम के अध्यक्ष व राष्ट्रीय कवि डॉ राकेश मधुकर ने कहा कि शिक्षक का कार्य संस्कार देना हैं शिक्षक बीज को अंकुरित होने का वातावरण प्रदान करता हैं आपने जो सोचा हैं उसे शिक्षक की उपस्थित जागृति कर सकती हैं आपका बुझा हुआ दीपक शिक्षक के जलते दीपक के पास आकर जल करके रौशनी कर सकता हैं

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