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नई पीढ़ी के कहानीकारों को गढ़ने का काम करेगी कार्यशाला, रिपोर्ट शंकर देव तिवारी

 

 

*नई पीढ़ी के कहानीकारों को गढ़ने का काम करेगी कार्यशाला*

 

*होटल ग्रांड में तीन दिवसीय कहानी कार्यशाला का 7 सितंबर को होगा शुभारंभ, 8 और 9 सितंबर को होगा विभिन्न सत्रों का आयोजन*

 

आगरा। “उन्नीसवीं और बीसवीं सदी के पूर्वार्द्ध का जो आगरा हिंदी-उर्दू के नामचीन कहानीकारों का केंद्र था कैसे वह बाद के सालों में साहित्य के सन्नाटे की गोद में पसारता चला गया इसके कारणों को कोई नहीं जानता। अब लेकिन इक्कीसवीं सदी के दूसरे दशक में शहर को कहानी का ‘हब’ बनाने की कोशिशें ज़ोर-शोर से शुरू हो गयी हैं। इस दिशा में तीन दिन की एक बड़ी कहानी लेखन वर्कशॉप आगरा में होने जा रही है जिसमें देश के 6 बड़े कहानीकार पेशेवर कहानी लिखने का प्रशिक्षण देने के लिए मौजूद रहेंगे।“

 

यह बात आज यहाँ दिल्ली से प्रकाशित होने वाली कहानी की प्रमुख पत्रिका ‘कथादेश’ के संपादक हरिनारायण ने कहीं। वह आज यहाँ वर्कशॉप की पूर्व वेला में आयोजित एक कार्यक्रम में पोस्टर जारी करते हुए बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि आगामी 7, 8 और 9 सितम्बर को स्थानीय ‘ग्रांड होटल’ में होने वाली इस वर्कशॉप में जितेंद्र भाटिया (जयपुर), महेश कटारे (ग्वालियर), विभांशु दिव्याल (गाज़ियाबाद), सत्यनारायण (जोधपुर), योगेंद्र आहूजा (नई दिल्ली) और शक्ति प्रकाश (आगरा) जैसे नामचीन कहानीकार तथा जयप्रकाश (राजनाँदगाँव) एवं प्रियम अंकित (आगरा) जैसे हिंदी कहानी के ख्याति प्राप्त आलोचक प्रशिक्षुओं को तीन दिन का सघन प्रशिक्षण देने को मौजूद रहेंगे।

 

हिंदी की चर्चित कहानी पत्रिका ‘कथादेश’ (नयी दिल्ली) और आगरा की प्रमुख सांस्कृतिक संस्था ‘रंगलीला’ के संयुक्त तत्वावधान में होने वाली उक्त तीन दिवसीय वर्कशॉप का आयोजन एसिड हमलों की शिकार महिलाओं का सामाजिक संगठन ‘शीरोज़’ कर रहा है।

 

श्री हरिनारायण ने कहा कि एक अच्छा और पेशेवर कहानीकार बनने में कई बाधाएं आती हैं। लेखन की शुरुआत किसी व्यावहारिक गतिविधि के साथ करने से कहानी की रूपरेखा पर सोचना बहुत आसान हो जाता है। रूपरेखा के आधार पर संरचनाएं गढ़ने और पात्र जोड़ने का अभ्यास प्रशिक्षार्थी करते हैं जिससे कहानी की नींव तैयार करने का काम आसान हो जाता है।

 

पोस्टर रिलीज़ कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए वरिष्ठ संस्कृतिकर्मी अनिल शुक्ल ने कहा कि “वर्कशॉप को आयोजित करने का मक़सद क़िस्सा-कहानी बुनने और गढ़ने की उन्नीसवीं और बीसवीं सदी के (आगरा में जन्मे) उर्दू और हिंदी के बड़े कहानीकारों की रवायत को फिर से ज़िंदा करना है।” उन्होंने कहा कि हाल के सालों में हिन्दी कहानी साहित्य के केंद्र में बनी हुई है। हमारे शहर में उभरते हिंदी के कहानीकार बेहतरीन रचनात्मक क्षमता होने के बावजूद कहानी की इस केंद्रीय भूमिका से खुद को नहीं जोड़ पा रहे हैं। हमारी कोशिश समकालीन समय में नयी पीढ़ी के बीच कहानी के तत्व को मुख्य धारा से जोड़ने की है।

 

कथाकार और लेखक अरुण डंग ने कहा कि यह वर्कशॉप प्रशिक्षणार्थियों को यह समझने में मदद करेगी कि उनमें से हर एक के पास सुनाने के लिए कहानियां तो होती हैं लेकिन वे उन्हें बुन नहीं पाते। इस वर्कशॉप में वे विशेषज्ञों के साथ मिल कर तैयार हुए वातावरण में अपने अनुभवों का अन्वेषण करेंगे और अपनी कहानियों को रचनात्मक धरातल पर उतारने का अभ्यास करेंगे।

 

साहित्य समीक्षक प्रो० रामवीर सिंह ने कहा कहानी की परंपरा बहुत पुरानी है। लोग कहानी कहते और सुनते आए हैं, अब इसको नए सिरे से शुरू किया जा रहा है, विशेष फोकस इसमें युवा रहेंगे।

 

कार्यक्रम में मौजूद उर्दू कथाकार नसरीन बेगम ने कहा कि वर्कशॉप में प्रशिक्षित अभ्यथियों को आने वाले 4 महीनों में 2 मिनी वर्कशॉपों में बुलाया जाएगा जहाँ वे अपने इस बीच के कहानी लेखन की जांच करवा सकें और खुद को और ज़्यादा पैना बना सकें।

 

डॉ. मुनीश्वर गुप्ता ने कहा कि दादी नानी की कहानियों का दौर अब समाप्त हो जाने से नई पीढ़ी कहानी से वंचित हो गई है लेकिन स्टोरी टेलिंग और पॉडकास्ट के जरिए कहानी आगे बढ़ रही है।

 

पोस्टर विमोचन कार्यक्रम में युवा कहानीकार अर्जुन सवेदिया, मीडिया प्रभारी डॉ० महेश धाकड़, प्रवक्ता अजय तोमर, रामभारत उपाध्याय, रंगकर्मी अर्निका माहेश्वरी, मनोज सिंह, कमल आदि भी मौजूद थे।

 

*बॉक्स-1*

 

*निःशुल्क वर्कशॉप*

 

उद्घाटन ग्रांड होटल में 7 सितम्बर को अपराह्न 4 बजे वरिष्ठ कथाकार जितेंद्र भाटिया (जयपुर) करेंगे। तीन दिन की उक्त वर्कशॉप पूर्णतः निशुल्क है। इसमें प्रदान की जाने वाली अध्ययन सामग्री का भी कोई मूल्य नहीं देना होगा। केवल 2 दिन के लंच और 2 हाई टी के लिए कंसेशंड अल्प भुगतान (रु० 1000 मात्र) करना होगा।

 

*बॉक्स-2*

 

*आगरा में जन्मे नामचीन कहानीकार*

 

जिन ख्याति प्राप्त कहानीकारों ने आगरा में जन्म लिया वे हैं लल्लू लाल जी, सुदर्शन, अमृतलाल नागर, इस्मत चुगताई , रांगेय राघव, श्रीराम शर्मा, राजेंद्र यादव, रावी और विभांशु दिव्याल,

 

धन्याद एवं शुभकामनाओं सहित 04 सितम्बर, 2026

 

मीडिया समन्वयक-

(डॉ. महेश धाकड़, रामभरत उपाध्याय, अजय तोमर)

संपर्क – 9927100205/9412895544/9997718707

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