*वाह रे मध्यांचल विद्युत वितरण निगम*
*अनुभवहीन आईएएस की मेज पर धूल, पुरानी रसोई में खेल, एक कुर्सी खाली करो दूसरा बैठाओ*

*लखनऊ 4 सितंबर* मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के प्रधान कार्यालय, 4-ए गोखले मार्ग से 3 सितंबर 2026 को दो ज्ञाप एक साथ निकले। एक ने प्रबंध निदेशक के शिविर से आदमी निकाला। दूसरे ने उसी शिविर में आदमी बिठा दिया।
दोनों पर एक ही मुहर है—प्रशासनिक आवश्यकता। दोनों पर प्रबंध निदेशक का नाम है। दोनों पर अधिशासी अभियन्ता शैलेन्द्र कुमार के दस्तखत हैं, कृते प्रबन्ध निदेशक।
चर्चा है कि प्रस्ताव मुख्य अभियंता मानव संसाधन की फाइल से चला। आईएएस प्रबंध निदेशक ने ठप्पा लगाया। निदेशक कार्मिक प्रबन्ध एवं प्रशासन शक्तिभवन से आए हैं। मध्यांचल की तबादला-रसोई उनके हाथ की नहीं। ऊपर नई मेज है। नीचे पुराना खिलाड़ी है। *चर्चा का सार इतना है—इशारा मानव संसाधन का, हस्ताक्षर नई कुर्सी का*।
*ज्ञाप 821: 37 दिन का अयोध्या*, *फिर एमडी का डेरा पत्राक 821। श्री रवि केश कुमार, कार्यकारी सहायक/हरदोई, सैप-16601589। 28 जुलाई 2026 को अधीक्षण अभियन्ता, विद्युत वितरण मण्डल अयोध्या भेजे गए*। *3 सितंबर को—महज 37 दिन बाद—शिविर, प्रबन्ध निदेशक मध्यांचल (मु०), लखनऊ भेज दिए गए। बिना प्रतिस्थानी। तुरंत कार्यमुक्त। ईआरपी पर एंट्री। सोमवार को ज्वाइन।*
*चर्चा है कि उनका सफर यह रहा। 2008 में बक्शी का तालाब। 2018 में रहीम नगर। लेसा वर्टिकल पर जानकीपुरम कमर्शियल के बाबूओं के साथ सवारी। फिर अयोध्या। फिर डेरा मध्यांचल के प्रबंध निदेशक कार्यालय*
*चर्चा है कि कैशियर-क्लर्क को शिविर का आदमी बना दिया गया*। *कार्यालय सहायक प्रथम की कुर्सी पर तृतीय की तैनाती—जैसा मुख्य अभियंता की कुर्सी पर जूनियर इंजीनियर बिठा देना*।
*ज्ञाप 820: जो जमा था, उसे रायबरेली लिखकर लखनऊ रखा*
पत्राक 820, वही तारीख। श्री राम राज, शिविर सहायक/बाराबंकी, सैप-16600021। चर्चा है कि ये एमडी शिविर में लंबे समय से जमे थे। उन्हें मुख्य अभियन्ता (वितरण), रायबरेली क्षेत्र के नाम निकाल दिया गया।
*कोष्ठक ने खेल खोल दिया*— *अधीक्षण अभियन्ता, विद्युत कार्य मण्डल, लखनऊ के अंतर्गत तैनाती हेतु* । *बोर्ड पर रायबरेली मे लेकिन तैनाती लखनऊ में*
*एक कुर्सी खाली हुई। दूसरी भर गई*। *अयोध्या वाली आवश्यकता 37 दिन में मर गई*। शिविर वाली आवश्यकता उसी दिन जन्म ले गई। कारण एक पंक्ति में नहीं लिखा*।
पाण्डेय प्रकरण: तबादला नहीं, पद विस्तार—गृह जनपद पहुंच गए
यह आदेश 3 सितंबर का नहीं है। *पत्राक 702, 15 जून 2025। श्री राजेश कुमार पाण्डेय, कार्यकारी सहायक, सैप-16601403, गृह जनपद-उन्नाव। लखनऊ ग्रामीण/अमेठी से मुख्य अभियन्ता (वितरण), रायबरेली*। *टिप्पणी में साफ है*— *गृह जनपद को छोड़कर तैनाती*। *हवाला है सर्वोच्च न्यायालय की याचिका 79/1997, निर्देश 21.03.2007। स्वयं के अनुरोध पर यात्रा भत्ता नहीं*। *हस्ताक्षर नीति मिश्रा, कृते प्रबन्ध निदेशक*। *बाद में अलग तारीख पर रायबरेली जोन के मुख्य अभियन्ता (वि०) रवि चन्द्र श्रीवास्तव के पत्राक 3079 ने पाण्डेय को अधीक्षण अभियन्ता, विद्युत वितरण मण्डल-उन्नाव भेज दिया*। *पदधारिता रायबरेली में रही। वेतन रायबरेली से चला। कुर्सी उन्नाव में लग गई—उसी गृह जनपद में, जिसे एमडी आदेश ने मना किया था*। प्रतिलिपि मुख्य अभियंता मानव संसाधन को गई।
जब पूछा गया कि एमडी ने गृह जनपद छोड़ने को कहा है, न्यायालय का निर्देश फाइल में है, स्वयं के अनुरोध पर रायबरेली बैठाया गया है, फिर उन्नाव कैसे—चर्चा है कि श्रीवास्तव का जवाब था, स्थानांतरण नहीं किया, पद विस्तारित कर दिया है।
नाम बदल गया। आदमी वहीं पहुंच गया जहां चाहता था। मुर्गा पार्टी की महक इसी विस्तार से निकलती है।
मोहम्मद इखलाक का आदेश तीसरी फाइल है। न 3 सितंबर की है, न पाण्डेय वाले दिन की। चर्चा है कि मो. ऐखलाक, पाण्डेय, राम राज की सूची मुख्य अभियंता मानव संसाधन की नजदीकी की वजह से गलियारे में है।
इशारा किसका, ठप्पा किसका
*प्रबंध निदेशक आईएएस जरुर हैं। कैडर का अनुभव है लेकिन विभागीय अनुभव शून्य, खास कर मध्यांचल के शिविर-बाबू-कैशियर नेटवर्क का नहीं*। *निदेशक कार्मिक प्रबन्ध एवं प्रशासन शक्तिभवन रहे। वहां का दफ्तर जाना हो सकता है, यहां की तबादला-पोस्टिंग की रग नहीं।*
चर्चा है कि *मुख्य अभियंता मानव संसाधन यहीं के हैं। अधीक्षण से मुख्य अभियंता यहीं बने। हर चेहरा जानते हैं। हर कुर्सी की कीमत जानते हैं। सेवानिवृत्ति के करीब है। कहा जा रहा है, जब भी मौका मिला तो छक्का लगा मार रहे है। क्योंकि मुर्गा पार्टी हमेशा नहीं रहेगी*।
*वैसे माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने 2013 के टी.एस.आर. सुब्रमण्यन मामले में असमय तबादले पर कारण लिखने का आदेश दिया है । 2025 में सुविधा थी तो 79/1997 वाला आदेश चिपक गया। 2026 के शिविर/कार्यालय -ज्ञापों में तो न्यायालय शब्द गायब है। जोन के ज्ञाप में स्थानांतरण शब्द गायब है, पद विस्तार लिखा है और प्रबंध निदेशक के आदेश से बचा भी लिया गया और आदमी अपनी मनचाही कुर्सी पर पहुंच भी गया*।
*वैसे चर्चा है कि सोमवार को रवि केश प्रबंध निदेशक शिविर में अपना सिंहासन ग्रहण करेंगे। राम राज कोष्ठक वाली सीट पर रायबरेली की जगह लखनऊ के चिनहट की ओर प्रस्थान करेंगे* । *पाण्डेय उन्नाव में हाजिरी देंगे, पगार पर रायबरेली लिखेगी जाएगी। ईआरपी हरा होगा। नई मेज को फाइल पूरी दिखेगी। चर्चा है कि मुख्य अभियंता मानव संसाधन को खेल पूरा दिखेगा*।
*वाह रे मध्यांचल विद्युत वितरण निगम ऊपर आईएएस बैठा है, इस रसोई से अनुभवहीन। साथ में निदेशक कार्मिक प्रबन्ध एवं प्रशासन हैं, शक्तिभवन से आए हैं, यहां की पोस्टिंग उनकी भाषा नहीं। चर्चा है कि आंख में धूल पड़ते ही 37 दिन का अयोध्या का स्थानांतरण प्रबंध निदेशक शिविर में हो जाता है, कैशियर डेरे का सहायक हो जाता है, गृह जनपद का निषेध पद विस्तार हो जाता है। ठप्पा ऊपर का है। इशारा मुख्य अभियंता मानव संसाधन का है। वैसे मुर्गा पार्टी ज्यादा दिन की नहीं है।* खैर
*युद्ध अभी शेष है*
*अविजित आनन्द संपादक समय का उपभोक्ता राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र और विस्पर आफ अन्टोल्ड हिन्दी अंग्रेजी मासिक पत्रिका व चन्द्रशेखर सिंह प्रबंध संपादक समय का उपभोक्ता*















