मुख्यमंत्री आ रहे हैं, इसलिए विपक्ष को कैद करो—योगी सरकार का नया लोकतंत्र!
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के मथुरा आगमन से पहले आज रात 11.30 बजे पुलिस प्रशासन ने मुझे मेरे आवास पर हाउस अरेस्ट कर दिया।
मेरा पुलिस प्रशासन से सीधा सवाल है—मेरा अपराध क्या है? किस कानून और किस आदेश के तहत मुझे मेरे ही घर में नजरबंद किया गया? क्या एक विपक्षी नेता होना अब अपराध हो गया है?
यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि सत्ता के अहंकार में चूर सरकार की तानाशाही मानसिकता का जीवंत उदाहरण है। विपक्ष की आवाज़ दबाना, सवाल पूछने वालों को नजरबंद करना और पुलिस के बल पर लोकतंत्र को कुचलना—यह खुली तानाशाही है।
लेकिन सत्ता के नशे में बैठे लोग याद रखें—
कुर्सी के दम पर आवाज़ों को कुछ समय के लिए रोका जा सकता है, लेकिन जनता के सवालों और संघर्ष को कभी कैद नहीं किया जा सकता।
कांग्रेस का कार्यकर्ता न पुलिस के पहरे से डरता है, न सत्ता की धमकी से झुकता है। संघर्ष जारी रहेगा!
विनीत पाराशर वाल्मीकि
शहर अध्यक्ष कांग्रेस कमेटी एटा
पूर्व-सदस्य इस्पात मंत्रालय भारत सरकार











