एसीई 2026 कॉन्फ्रेंस में आधुनिक प्रजनन तकनीकों पर मंथन, रिपोर्ट शंकर देव तिवारी

*एसीई 2026 कॉन्फ्रेंस में आधुनिक प्रजनन तकनीकों पर मंथन*

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आगरा। मुगल शैरेटन में आयोजित ACE 2026 कॉन्फ्रेंस के तहत आज को वैज्ञानिक सत्रों और व्याख्यानों का सफल आयोजन किया गया। जिसमें देश-विदेश से आए विशेषज्ञों ने प्रजनन चिकित्सा (ART) की नवीनतम तकनीकों पर चर्चा की। कार्यक्रम में एग, स्पर्म और एम्ब्रियो फ्रीजिंग के बढ़ते महत्व पर विशेष फोकस रहा।

बदलती जीवनशैली, करियर प्राथमिकताओं और बढ़ती उम्र में मातृत्व-पितृत्व की योजना के कारण फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन की मांग तेजी से बढ़ रही है। एम्ब्रियो फ्रीजिंग तकनीक को भविष्य की एक सुरक्षित और प्रभावी विधि बताया गया, जो दंपतियों को बेहतर प्रेग्नेंसी के अवसर प्रदान करती है। कॉन्फ्रेंस में विभिन्न सत्रों के दौरान ब्लास्टोसिस्ट डेवलपमेंट, माइक्रोमैनिपुलेशन तकनीक, और अल्ट्रा-फास्ट विट्रिफिकेशन जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने लाइव डेमो के माध्यम से आधुनिक लैब तकनीकों की जानकारी दी। इसके अलावा स्पर्म चयन, बायोप्सी वैलिडेशन और एम्ब्रियो विजुअलाइजेशन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तृत व्याख्यान आयोजित किए गए। कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि प्रदूषण, तनाव और खराब जीवनशैली के कारण पुरुषों और महिलाओं दोनों में प्रजनन क्षमता प्रभावित हो रही है। ऐसे में समय रहते जांच और नई तकनीकों का सहारा लेना आवश्यक है। आयोजन सचिव डॉ. केशव मल्होत्रा ने बताया कि कांफ्रेंस में देश भर से एक हाजर से धिक व 14 फैकल्टी मैम्बर जापान, आस्ट्रेलिया, ग्रीस जैसे विबिन्न देशों से डॉक्टर, एम्ब्रियोलॉजिस्ट और मेडिकल छात्र शामिल हुए, जिन्होंने विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर नई जानकारियां हासिल कीं।

आधुनिक तकनीकों से फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन में बढ़ी सफलता दर

आगरा। कंसल्टिंग डायरेक्टर एम्ब्रियोलॉजी डॉ. राजीव शर्मा ने फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन के क्षेत्र में हो रही प्रगति पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीकों और नए उपकरणों के उपयोग से अब अंडे, शुक्राणु और भ्रूण को फ्रीज (संरक्षित) करने की सफलता दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जहां पहले यह सफलता दर मात्र 10 से 15 प्रतिशत तक सीमित थी, वहीं अब यह बढ़कर 30 से 35 प्रतिशत तक पहुंच गई है।डॉ. शर्मा ने कहा कि इस क्षेत्र में और बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए भारत में आईवीएफ लैब्स को और अधिक उन्नत बनाने आवश्यकता है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि भारत जैसे देश में उच्च तापमान और अधिक आर्द्रता (ह्यूमिडिटी) एक बड़ी चुनौती है, जिसे नियंत्रित करना बेहद जरूरी है। लैब के भीतर तापमान और नमी का संतुलन बनाए रखना ही संरक्षित अंडों, शुक्राणुओं और भ्रूण की गुणवत्ता को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाता है। पश्चिमी देशों की तुलना में भारत की जलवायु अलग है, इसलिए यहां की लैब्स को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार विशेष तकनीकी व्यवस्थाएं अपनानी चाहिए। इससे न केवल सफलता दर बढ़ेगी, बल्कि मरीजों को बेहतर और सुरक्षित परिणाम भी मिल सकेंगे।

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