मुंशी प्रेम चन्द का लिखा आज के लिए भी मील का पत्थर  जन्म दिवस पर नागरी प्रचरिणी सभा में नमन किया गया, रिपोर्ट शंकर देव तिवारी

मुंशी प्रेम चन्द का लिखा आज के लिए भी मील का पत्थर

 

जन्म दिवस पर नागरी प्रचरिणी सभा में नमन किया गया

 

आगरा।मुंशी प्रेम चन्द को उनके जन्म दिन पर नमन करते हुए उनके लिखे पर अलग अलग तरीके से वक्ताओं ने विचार रख उन्हे आज का भी हिंदी का प्रमुख रचनाकार बताया। उनका कहना लिखना आज के लिए भी मील का पत्थर है।

 

नागरी प्रचारिणी सभा, आगरा द्वारा आयोजित मुंशी प्रेमचंद जयंती समारोह के मुख्य अतिथि डाॅ0 गिरधर शर्मा, सेन्ट एण्ड्रयूज संस्थान, आगरा ने कहा कि ”मुंशी प्रेमचंद भारत के उपन्यास सम्राट माने जाते हैं, जिनके युग का विस्तार सन् 1880 से 1936 तक है। यह कालखण्ड भारत के इतिहास में बहुत महत्त्व का है। इस युग में भारत का स्वतंत्रता संग्राम नई मंजिलों से गुजरा।

केन्द्रीय हिन्दी संस्थान से पधारे आज के मुख्य वक्ता प्रो0 उमापति दीक्षित ने कहा कि ”प्रेमचन्द की रचनादृष्टि, विभिन्न साहित्य रूपों में अभिव्यक्त हुई। वह बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न साहित्यकार थे। प्रेमचन्द की रचनाओं में तत्कालीन इतिहास बोलता है।“

समारोह के अध्यक्ष और सभा के सभापति डाॅ0 खुशीराम शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा ”जिस युग में प्रेमचन्द ने कलम उठाई थी, उस समय उनके पीछे ऐसी कोई ठोस विरासत नहीं थी और न ही विचार और न ही प्रगतिशीलता का कोई माॅडल ही उनके सामने था सिवाय बांग्ला साहित्य के।“

समारोह का सफल संचालन करते हुए सभा की उपसभापति प्रो0 कमलेश नागर ने कहा कि ”प्रेमचन्द ने अपने जीवन में कई अद्भुत कृतियाँ लिखी हैं। तब से लेकर आज तक हिन्दी साहित्य में न ही उनके जैसा हुआ है और न ही कोई और होगा।“

समारोह के मुख्य वक्ता प्रो0 उमापति दीक्षित का परिचय सभा की उपसभापति डाॅ0 मधु भारद्वाज ने दिया।

सभा के उपसभापति एवं प्राचार्य, आगरा काॅलेज, आगरा डाॅ0 विनोद कुमार माहेश्वरी ने समारोह में मुख्य अतिथि डाॅ0 गिरधर शर्मा का परिचय दिया।

डाॅ0 ब्रज बिहारी लाल वर्मा ‘बिरजू’ ने अतिथियों का स्वागत किया।

देश की प्रसिद्ध कवयित्री डाॅ0 शशि तिवारी ने समारोह के आरम्भ में सरस्वती वन्दना का पाठ किया।

अन्त में सभा के मंत्री प्रो0 चन्द्रशेखर शर्मा ने अतिथियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि ”प्रेमचन्द से पहले हिन्दी कथा साहित्य में अक्सर राजाओं, रानियों, तिलिस्म और कल्पनालोक का प्रभाव दिखाई देता था। प्रेमचन्द ने कहानी का केन्द्र बदल दिया। यही कारण है कि उन्हें आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का सबसे बड़ा यथार्थवादी लेखक माना जाता है।

समारोह में श्री नन्द नन्दन गर्ग, डाॅ0 ब्रज बिहारी लाल वर्मा ‘बिरजू’, हेमन्त कुमार द्विवेदी, डाॅ0 हरवंस पाण्डेय, श्री लखमीचन्द, श्री रमेश पंडित, श्री रामेन्द्र त्रिपाठी, डाॅ0 नीलम भटनागर, डाॅ0 मधुरिमा शर्मा, डाॅ0 आभा चतुर्वेदी, श्री महेश धाकड़, श्री प्रकाश गुप्ता, श्री शीलेन्द्र कुमार वशिष्ठ, श्री शरद गुप्त, श्री शीलेन्द्र शर्मा, नूतन अग्रवाल, श्री प्रकाश चन्द्र अग्रवाल, डाॅ0 यशोयश, शैल अग्रवाल, सपना सिंह, मनीष सिंह, डाॅ0 रामेन्द्र शर्मा ‘रवि’, खुशी सिंह, उमाशंकर पाराशर आदि ने अपने विचार व्यक्त किए।

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