*लोग देखना चाहते हैं सपा का चेहरा असली क्या है*
रामपुर के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी सपा सुप्रीमो Akhilesh Yadav का ‘पैग़ाम’ लेकर जौहर विश्विद्यालय पहुंचे हैं। सवाल यह है कि लखनऊ से रामपुर की दूरी क्या इतना ज्यादा है कि सपा सुप्रीमो वहां खुद ना आकर अपना ‘डाकिया’ भेज रहे हैं।
ध्यान रहे जौहर विश्विद्यालय इस देश में लोकतंत्र की अवधि तय कर रहा है, अगर गिरा उसे दिया जाता है, तो उसे लोकतंत्र के ताबूत में आखिरी कील समझिएगा। जौहर विश्विद्यालय को बचाने की लड़ाई ना तो संसद में भाषणबाज़ी करके लड़ी जाएगी, और ना ही लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस करके। जौहर विश्विद्यालय को बचाने की लड़ाई रामपुर पहुंचकर जौहर विश्विद्यालय में खड़े होकर लड़ी जाएगी। क्या अखिलेश ऐसा करने के लिए तैयार हैं? क्या वो रामपुर जाने की घोषणा करने के लिए तैयार हैं?
जौहर विश्विद्यालय को गिराने के बहाने भाजपा चुनावी अभियान शुरू करना चाहती है, क्या अखिलेश जौहर विश्विद्यालय को गिरने से बचाकर अपने चुनावी अभियान की शुरूआत करने के लिए तैयार होंगे?









