महा-घोटाला: चंदौली में ‘फर्जी असलम’ का खौफ! राजस्व विभाग की मिलीभगत से गरीबों की जमीन पर भू-माफियाओं का कब्जा

वरिष्ठ पत्रकार एके बिंदुसार की कलम से——-

 

*पार्ट- 2 में हम आज एक नया खुलासा कर रहे हैं पार्ट -3 में हम भू-माफियाओं के नाम को भी उजागर करेंगे*

*महा-घोटाला: चंदौली में ‘फर्जी असलम’ का खौफ! राजस्व विभाग की मिलीभगत से गरीबों की जमीन पर भू-माफियाओं का कब्जा*

 

चंदौली, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में एक ऐसा सनसनीखेज कारनामा सामने आया है, जिसने प्रशासन की ईमानदारी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ जहां योगी सरकार भू-माफियाओं के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति का दावा करती है, वहीं चंदौली के मुगलसराय (पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर) तहसील में एक ‘फर्जी असलम खान’ का गिरोह खुलेआम गरीबों की जमीनें हड़पने का खेल खेल रहा है। चौंकने वाली बात यह है कि सबूतों के अंबार के बावजूद राजस्व विभाग के अधिकारी इस खेल में मूकदर्शक नहीं, बल्कि सक्रिय साझीदार बने हुए हैं।

क्या है पूरा मामला?

सोनभद्र के बगही निवासी पीड़ित बनारसी और उनका परिवार इस वक्त न्याय की दर-दर की ठोकरें खा रहा है। बनारसी के पिता कंचन ने मौजा ताहिरपुर, परगना राल्हूपुर में ‘असलम खान’ नाम के व्यक्ति को 11 बिस्वा जमीन बेची थी। लेकिन अब असली असलम खान के नाम का सहारा लेकर एक ‘फर्जी असलम’ का गिरोह सक्रिय हो गया है, जो भू-माफियाओं के साथ मिलकर धड़ल्ले से दूसरों की जमीनों को खुर्द-बुर्द कर रहा है।

गणित ऐसा कि अधिकारी भी फेल!

गोपालपुर ग्राम प्रधान फातमा बेगम ने इस फर्जीवाड़े की पोल खोलते हुए कहा:

“असली असलम खान की उम्र आज 75-76 साल है। वहीं, जमीन बेचने वाला यह ‘फर्जी असलम’ मात्र 40 साल का है। अगर 41-42 साल पहले जमीन खरीदी गई थी, तो क्या 2 साल का बच्चा जमीन खरीद रहा था? यह सीधा-साधा फर्जीवाड़ा है, जिसे स्थानीय भू-माफियाओं का संरक्षण प्राप्त है।”

राजस्व विभाग की ‘सांठ-गांठ’ पर उठे सवाल

इस पूरे प्रकरण में राजस्व विभाग की भूमिका सबसे संदिग्ध है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि:

लेखपाल की संदिग्ध भूमिका: लेखपाल साहिबा पंचायत भवन या सामुदायिक शौचालय जैसे सरकारी कार्यों के लिए बुलाने पर नहीं आतीं, लेकिन भू-माफियाओं को अवैध कब्जा कराने के लिए मौके पर तत्काल पहुंच जाती हैं।

दमनकारी नीति: भू-माफिया इतने बेखौफ हैं कि जो भी उनके खिलाफ आवाज उठाता है, वे उसे फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकी देते हैं, ताकि पीड़ित डरकर चुप बैठ जाए।

सुनियोजित साजिश: यह कोई छुटपुट घटना नहीं, बल्कि पुख्ता रचित दस्तावेजों और गहरी साजिश के तहत किया गया एक संगठित अपराध है।

पूर्व प्रधान की दो-टूक: “प्रशासन सो रहा है या मिला हुआ है?”

मिलकीपुर के भूतपूर्व प्रधान नसीम अहमद का कहना है कि वे असली असलम खान को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं और जो व्यक्ति अभी दस्तावेज पेश कर रहा है, वह पूरी तरह फर्जी है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन ने इन भू-माफियाओं और ‘फर्जी असलम’ को तुरंत गिरफ्तार नहीं किया, तो गरीबों की बची-खुची जमीनें भी ये माफिया बेच खाएंगे।

अधिकारियों के लिए चेतावनी

यह रिपोर्ट चंदौली प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा तमाचा है। सवाल यह है कि एक 40 साल के व्यक्ति को 42 साल पुरानी रजिस्ट्री का असली मालिक कैसे माना जा सकता है? क्या राजस्व विभाग के अधिकारी इतने अज्ञानी हैं, या उनकी आँखों पर भ्रष्टाचार की पट्टी बंधी है?

क्षेत्र की जनता की मांग है:

‘फर्जी असलम’ और उसके पीछे सक्रिय भू-माफिया गैंग की तत्काल गिरफ्तारी हो।

मामले में लिप्त राजस्व विभाग के अधिकारियों/लेखपाल की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो और उन पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

जमीन के फर्जी दस्तावेजों को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।

क्या चंदौली के आला अधिकारी अपनी नींद से जागेंगे, या फिर गरीबों की चीखें कागजों की फाइलों में ही दफन हो जाएंगी?

हमारी मीडिया की टीम लगातार नजर बनाई हुई है आगे और हम खुलता करेंगे भू-माफियाओं के जड़ तक पहुंचेंगे।

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