बाल कृष्ण तिवारी की खास रिपोर्ट।
लाख जतन के बाद भी बेदाग नहीं रही प्रधान की परीक्षा बायोमेट्रिक सत्यापन में हेराफेरी की खबर :-
नीट री-एग्जाम में सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़,सतना मेडिकल कॉलेज का छात्र बिहार में गिरफ्तार_
_सोचिए 15-20 लाख में बने सॉल्वर! नीट री-एग्जाम फर्जीवाड़े में मेडिकल कॉलेज के छात्रों समेत 30 गिरफ्तार!_
_बाल कृष्ण तिवारी_
_भोपाल देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET में फर्जीवाड़े का एक बड़ा मामला सामने आया है। बिहार के लखीसराय में आयोजित NEET UG Re-Exam के दौरान सक्रिय एक संगठित सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने 30 लोगों को गिरफ्तार किया है!नीट यूजी (NEET-UG) री-एग्जाम के दौरान बिहार के लखीसराय से एक बड़े सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने मध्य प्रदेश के सतना स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज के छात्र (हिमांशु कुमार) सहित 30 लोगों को गिरफ्तार किया हैं,मिल रही जानकारी के मुताबिक इस सनसनीखेज मामले में सतना के शासकीय मेडिकल कॉलेज के फर्स्ट ईयर का स्टूडेंट हिमांशु कुमार का नाम भी सामने आया है,इस पूरे रैकेट में कई अन्य मेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों के छात्र तथा बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मचारियों के संलिप्त होने की खबर ! मूल रूप से बिहार के सुपौल जिले के पथरा गांव निवासी हिमांशु पर आरोप है कि वह दूसरे अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने के लिए सॉल्वर बनकर परीक्षा केंद्र पहुंचा था। पुलिस ने उसे अन्य आरोपियों के साथ गिरफ्तार कर लिया है।_
_इस मामले में बिहार, मध्य प्रदेश,उत्तर प्रदेश और राजस्थान तक गैंग का नेटवर्क फैला है। इस खुलासे ने एक बार फिर मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।_
_डॉक्टर बनाने पिता ने बेची थी पैतृक जमीन_
_सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हिमांशु नाम का स्टूडेंट मेडिकल कॉलेज में फर्स्ट ईयर में पढ़ रहा है, लेकिन अभी यह पुष्टि नहीं हुई है कि यह वही है। हालांकि, बीते 15 दिनों से वह आवश्यक कारणों के चलते अवकाश पर जिले से बाहर है।_
_मामले की जानकारी लगते ही प्रबंधन ने छात्र की छानबीन की, लेकिन ज्यादा जानकारी नहीं मिली। कैंपस के बाहर बैठे इंचार्ज के पास उसके द्वारा लिखी अवकाश की एप्लिकेशन जरूर मिली है। जिसमें पारिवारिक कारणों से गांव जाने का जिक्र है। जानकारी के अनुसार सुपौल के जोल्हनिया निवासी हिमांशु सतना मेडिकल कॉलेज का छात्र है। उसके पिता शिवनारायण साह किसान हैं। बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए परिवार ने जमीन तक बेच दी।_
_बायोमेट्रिक सत्यापन में हुई हेराफेरी_
_गिरफ्तार आरोपियों में मेडिकल छात्र, बायोमेट्रिक एजेंसी के कर्मचारी और फर्जी परीक्षार्थी शामिल हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि गैंग ने बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया में हेरफेर कर असली अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोगों को परीक्षा में बैठाने की साजिश रची थी। पुलिस जांच के अनुसार इस रैकेट का संचालन मेडिकल छात्रों और बिचौलियों के नेटवर्क के जरिए किया जा रहा था।_
_अभ्यर्थियों से मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिलाने के नाम पर लाखों रुपये तक की डील की जाती थी। प्रारंभिक भुगतान लेने के बाद सॉल्वर उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जाता था और बायोमेट्रिक सत्यापन में कथित मिलीभगत के जरिए उन्हें असली परीक्षार्थी के रूप में प्रवेश दिलाया जाता था।_
_6 राज्यों के मेडिकल कॉलेज से हायर किए सॉल्वर_
_जांच में पता चला कि नीट री-एग्जाम परीक्षा में परीक्षार्थियों को पास कराने के लिए हायर प्रोफाइल वालों को टारगेट किया गया। इनसे 40 लाख रुपए में मेडिकल कॉलेज में एडमीशन कराने का वादा किया गया। एडवांस में पैसे भी लिए गए। पैसे लेकर उनकी जगह फर्जी परीक्षार्थी बैठाया गया।_
_इसके लिए मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली से लेकर पश्चिम बंगाल के अलग-अलग शहरों में पढ़ रहे मेडिकल कालेजों के छात्रों को हायर किया गया। बताया गया कि इस गिरोह की नजर ऐसे मेडिकल छात्रों पर थी जिन्हें पैसों की सख्त जरूरत है। इन मेडिकल छात्रों को फर्जी तौर पर सॉल्वर बनकर परीक्षा देने के लिए 15 से 20 लाख रुपए तक का ऑफर दिया जाता है।__
_शासकीय मेडिकल कॉलेज सतना के पीआरओ अंबरीश मिश्रा का इस मामले में कहना है कि मामले की जानकारी भी मीडिया के माध्यम से ही हुई है। अभी तक कोई प्रशासनिक लेटर नहीं आया है। इस नाम का छात्र कुछ दिनों से अवकाश पर है। छात्र के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।_









