*52 किलोमीटर की सड़क… और हर कुछ कदम पर मौत का खतरा!*

*एटा-अलीगंज रोड पर सड़क कम, गड्ढे ज्यादा दिखाई दे रहे हैं।*
*उखड़ी सड़क, टूटे किनारे, खतरनाक कटाव और बारिश में पानी के नीचे छिपे गहरे गड्ढे—यह रास्ता अब सफर नहीं, हर पल जिंदगी से जंग बन चुका है।*
*सवाल सिर्फ गड्ढों का नहीं है…*
*सवाल उस सिस्टम का है, जो सबकुछ सामने होने के बावजूद आंखें बंद किए बैठा है।*
*दिन में किसी तरह वाहन चालक बचकर निकल जाएं तो रात में यही गड्ढे मौत का जाल बन सकते हैं। दोपहिया वाहन चालक अचानक गड्ढा आने पर संतुलन खो सकते हैं। पानी से भरे गड्ढों की गहराई का अंदाजा न लगने पर बड़ा हादसा कभी भी हो सकता है।*
*और सबसे बड़ा सवाल*
*क्या जिम्मेदार विभाग को सड़क तभी दिखाई देगी, जब कोई जान चली जाएगी?*
*क्या किसी परिवार के घर मातम छाने के बाद गड्ढे भरे जाएंगे?*
*यह सिर्फ गड्ढे नहीं हैं—ये उस लापरवाही के निशान हैं, जिसकी कीमत किसी की जिंदगी हो सकती है।*
*सिस्टम को तय करना होगा—*
*सड़क पहले सुधरेगी या हादसे के बाद जिम्मेदारी तय होगी?*















