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गांवों का विकास छोड़िए… पहले अपना शौचालय तो संभाल ले ‘विकासखंड’रिपोर्ट नितिन तिवारी

*गांवों का विकास छोड़िए… पहले अपना शौचालय तो संभाल ले ‘विकासखंड’!*

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*सकीट ब्लॉक में महीनों से गंदगी का साम्राज्य, महिला-पुरुष शौचालय बदहाल; महिला शौचालय का गेट टूटा, चारों तरफ दुर्गंध*

 

*जिस दफ्तर पर गांवों को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी, उसी के परिसर में सफाई व्यवस्था दम तोड़ती मिली; भास्कर ने सवाल उठाया तो सफाई कराने की याद आई*

 

*एटा /सकीट। गांवों की तस्वीर बदलने और विकास की गंगा बहाने की जिम्मेदारी जिस विकासखंड के कंधों पर है, वही विकासखंड अपने ही परिसर की गंदगी के आगे बेबस नजर आ रहा है। सकीट विकासखंड कार्यालय के महिला और पुरुष शौचालय महीनों से सफाई को तरस रहे हैं। गंदगी का अंबार लगा है, चारों तरफ दुर्गंध फैली है और महिला शौचालय का गेट तक टूटा पड़ा है।*

 

*यह हालत देखकर सवाल उठना स्वाभाविक है—जिस कार्यालय को गांवों में स्वच्छता और विकास की निगरानी करनी है, क्या वहां अपने ही शौचालय की सफाई और मरम्मत देखने वाला कोई नहीं?*

 

 

 

Ronda Faulk
Author: Ronda Faulk

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