प्रधान संपादक एके बिन्दुसार की खास रिपोर्ट
- जिला अस्पताल बैढ़न बना भ्रष्टाचार का अड्डा – पैसे दो नहीं तो रीवा जाओ, वरिष्ठ पत्रकार अतुल दुबे ने दिखाई हकीकत तो डॉक्टर अंबे शाह ने किया हमला
- चश्मा तोड़ा, मोबाइल छीना, फर्जी मुकदमे की धमकी – वायरल वीडियो से हड़कंप
सिंगरौली / बैढ़न। सिंगरौली जिला चिकित्सालय बैढ़न के ट्रामा सेंटर में मरीजों से अवैध वसूली और लापरवाही की खबर दिखाना वरिष्ठ पत्रकार अतुल दुबे को भारी पड़ गया। आरोप है कि ट्रामा सेंटर में पदस्थ डॉक्टर अंबे शाह ने कैमरा देखते ही अपना आपा खो दिया और पत्रकार के साथ खुलेआम धक्का-मुक्की, मोबाइल छीनने और चश्मा तोड़ने जैसी घटना को अंजाम दिया।
वायरल वीडियो में सब कैद है। वीडियो में डॉक्टर के वेश में दिख रही महिला पत्रकार को धमकाते, उंगली दिखाते और भीड़ में हंगामा करते साफ दिख रही है। मौके पर मौजूद मरीजों ने खुद कैमरे पर कहा – “यहां 5000 रुपये मांगते हैं, पैसा नहीं दो तो महीनों घुमाते हैं और फिर रीवा रेफर कर देते हैं। प्राइवेट में ले जाकर ऑपरेशन के नाम पर वसूली करते हैं।”
मेटरनिटी विंग के बाहर बिखरी चप्पलें और बंद दरवाजे अस्पताल की लचर व्यवस्था की गवाही दे रहे हैं। मरीज सुबह से OPD में खड़े हैं और डॉक्टर OT का बहाना बता रही हैं।
*फर्जी मुकदमे की साजिश से पत्रकार जगत में उबाल*
भ्रष्टाचार की पोल खुलते ही अब पत्रकार अतुल दुबे को फर्जी मुकदमे में फंसाने की कोशिश की जा रही है। इस घटना ने सिंगरौली ही नहीं, पूरे मध्यप्रदेश के पत्रकारों में आक्रोश भर दिया है।
*मामला राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा – भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल)ने दी चेतावनी*
पत्रकार उत्पीड़न की इस घटना को लेकर *भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी* ने कड़ा विरोध जताया है।
संगठन के संस्थापक ए.के. बिंदुसार* ने घोर विरोध जताते हुए कहा – *”अब मध्य प्रदेश में भी पत्रकार उत्पीड़न का कार्य शुरू हो गया है। अस्पताल के भ्रष्टाचार पर मीडिया ने वार किया तो वहां की डॉक्टर और स्टाफ तिलमिला गए। पत्रकार डरने वाले नहीं हैं, ईंट का जवाब पत्थर से देना जानते हैं।”
वहीं भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष राम मिलन जायसवाल एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सेल मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र कुमार साह* ने संयुक्त बयान में कहा – “पत्रकारों के उत्पीड़न को लेकर हम सड़कों पर उतरने के लिए पूरी तैयारी कर चुके हैं। संगठन के केंद्रीय नेतृत्व का आदेश मिलते ही बड़े आंदोलन के लिए भारी संख्या में पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता सड़कों पर उतर जाएंगे। सिंगरौली की ये घटना बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”*
पत्रकार संगठनों ने कलेक्टर सिंगरौली और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि वायरल वीडियो की जांच कर डॉक्टर अंबे शाह पर कार्रवाई हो और पत्रकार अतुल दुबे को सुरक्षा प्रदान की जाए।
सवाल यही है – क्या सिंगरौली जिला अस्पताल में कैमरा बैन है? क्या सच दिखाना अब जुर्म बन गया है?














