रिपोर्ट: सत्यदेव पांडे ( ब्यूरो चीफ- सोनभद्र)
- 1523 से घटकर 40–50 छात्र होने का दावा, तीन साल से नाम-पट्ट गायब, शिक्षकों की कमी से पढ़ाई प्रभावित
ओबरा, सोनभद्र। ऐतिहासिक ओबरा इंटर कॉलेज की बदहाली को लेकर एक बार फिर सोशल मीडिया पर आवाज तेज हो गई है। फेसबुक पर विद्यालय को लेकर कई पोस्ट वायरल हो रही हैं और ग्रामीणों के बीच बड़े आंदोलन की तैयारी की चर्चा चल रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निजी संस्था डीएवी को विद्यालय दिए जाने के बाद इसकी स्थिति लगातार खराब होती गई। ग्रामीणों के अनुसार सन 2023 में विद्यालय में करीब 1523 छात्र-छात्राएं पढ़ते थे, लेकिन अब संख्या घटकर महज 40 से 50 के आसपास रह गई है। पर्याप्त शिक्षक नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने का भी आरोप है। ग्रामीणों का कहना है कि करीब तीन वर्षों से विद्यालय के नाम का बोर्ड तक नहीं लगाया गया। आरोप है कि पुराने बोर्ड को पेंट कराने के बाद दोबारा विद्यालय का नाम नहीं लिखा गया। सूत्रों के अनुसार विद्यालय में नियमित प्रार्थना और राष्ट्रगान तक नहीं होने की चर्चा है, जबकि खेलकूद और छात्रवृत्ति जैसी सुविधाएं भी ठप होने का आरोप लगाया जा रहा है। रात में विद्यालय परिसर में पर्याप्त रोशनी नहीं होने से सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं गेम टीचर से प्रवक्ता का कार्य कराने तथा कक्षा 6 से 8 तक के संचालन को लेकर भी ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं।
इधर विद्यालय का कुछ हिस्सा दोबारा डीएवी संस्था को दिए जाने की चर्चा ने ग्रामीणों की नाराजगी और बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि जिस विद्यालय से कभी 15 से 20 गांवों के बच्चे शिक्षा ग्रहण करते थे, उसकी ऐसी स्थिति बेहद चिंताजनक है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि आखिर छात्र संख्या में इतनी बड़ी गिरावट के बावजूद खंड शिक्षा अधिकारी और जिला विद्यालय निरीक्षक मामले का संज्ञान क्यों नहीं ले रहे हैं? विद्यालय की वास्तविक स्थिति की जांच कर जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की जा रही है? ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि विद्यालय को जल्द वापस करने और शैक्षणिक व्यवस्था सुधारने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया गया तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। अब देखना होगा कि पंचायत और विधानसभा चुनाव से पहले सरकार व जिला प्रशासन इस ऐतिहासिक विद्यालय के भविष्य को लेकर कोई फैसला करता है या ग्रामीणों की मांग को फिर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
ग्रामीणों की मांग है कि विद्यालय के गेट पर तत्काल ओबरा इंटर कॉलेज का नाम लिखाया जाए,और इंटर कॉलेज की तरफ खुलने वाले गेट को तत्काल बंद करने के साथ ही इंटर कॉलेज के खेल मैदान पर डीएवी के बच्चों को आने से रोक लगाए जाय।
समय रहते विद्यालय की समस्याओं का समाधान न होने पर निर्णायक और भीषण प्रतिरोध की शुगबुगाहट स्पष्ट सुनाई पड़ रही है। देखना होगा कि अंतिम परिणाम क्या होता है..?














