संस्कार भारती ,एटा के तत्वावधान में आदि कवि महर्षि बाल्मीकि जयंती का कार्यक्रम संपन्न हुआ। यह आयोजन बड़ी हनुमानगढ़ी रेलवे रोड के सामने स्थित माधव पचौरी एडवोकेट के कार्यालय पर हुआ। अध्यक्ष आचार्य प्रेमी राम मिश्र के साथ सभी ने माता सरस्वती का पूजन -अर्चन किया। सर्व प्रथम डॉ राजेंद्र सिंह राज ने मनोरम सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। कवि वर महेश मंजुल ने कविता सुनाई -एक लुटेरे को हुआ मानव तन का ज्ञान, सब कुछ तज कर बन गए बाल्मीकि भगवान। डॉ राजेंद्र सिंह राज ने कहा-तुम आदि कवि कहलाते हो, हम सबको राह दिखाते हो। जिला संरक्षक दिनेश प्रताप सिंह चौहान ने मर्म स्पर्शी रचना प्रस्तुत करते हुए कहा -दूसरे के लिए जब राम बनाना कोई, आप अपने को उस मोड़ पर लाकर देखो। प्रांत कार्यकारिणी के सदस्य प्रदीप तोमर ने कहा -ज्ञान का पावन दीप जलाकर जग का आज्ञान मिटाया है, श्री राम के पावन जीवन को कविता में ढाल सुनाया है। जिला अध्यक्ष डॉ सुधीर पालीवाल ने कहा अग्नि में खुद को तपा कुंदन बनाना चाहता हूं, गरल पीकर मैं तुम्हें चंदन बनाना चाहता हूं। प्रांतीय संरक्षक आचार्य प्रेमी राम मिश्र ने ऋषि वाल्मीकि का स्मरण करते हुए कविता सुनाई-शत शत नमन है ऋषि वर तुमको कभी न भूल सकेंगे हम, स्वजन प्रजा सबके हित चिंतक राम ये ज्ञान कराया है। जिला संरक्षक अशोक कुमार सिंह चौहान, शिक्षक विवेक यादव आदि ने भी कविताओं से महर्षि वाल्मीकि का स्मरण किया। आयोजन में माधव पचौरी एडवोकेट, हुकुम सिंह आर्य एडवोकेट, शिक्षक अर्पित उपाध्याय, सुशांत उपाध्याय आदि की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। गोष्ठी का प्रभाव पूर्ण संचालन प्रांतीय सह कोषाध्यक्ष मयंक तिवारी ने किया। आयोजक माधव पचौरी एडवोकेट ने सभी आगंतुकों का मधुर जलपान के साथ स्वागत किया तथा भविष्य में ऐसे प्रेरणा प्रद आयोजन के लिए सविनयआमंत्रण भी दिया।















