एटा बिग ब्रेकिंग —
मरीज तड़पते रहे… डॉक्टर का इंतजार करते रहे और बर्न वार्ड की खाली कुर्सी पूछती रही—आखिर जिम्मेदार कौन?
इसे मेडिकल कॉलेज प्रशासन की लापरवाही कहें या मरीजों की पीड़ा के प्रति खुली अनदेखी?
एटा मेडिकल कॉलेज के बर्न वार्ड से सामने आई तस्वीर ने एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं!
तीमारदारों का आरोप है कि सुबह डॉक्टर के राउंड के बाद शाम करीब 4 बजे तक कोई डॉक्टर मरीजों को देखने नहीं पहुंचा।
दर्द से कराहते मरीज… परेशान तीमारदार… और डॉक्टर के इंतजार में खाली पड़ी कुर्सी!
सवाल सिर्फ डॉक्टर के वार्ड में न पहुंचने का नहीं है—सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर मेडिकल कॉलेज प्रशासन की निगरानी व्यवस्था कहां है?
अगर घंटों तक बर्न वार्ड में मरीज डॉक्टर का इंतजार करते रहें, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी तय होगी?
क्या प्राचार्य और मेडिकल कॉलेज प्रशासन को वार्डों की वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं, या फिर सब कुछ जानते हुए भी अनदेखी की जा रही है?
मरीजों के तीमारदारों के आरोपों ने व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—इलाज के लिए आए मरीज आखिर किसके भरोसे हैं?
क्या होंगी पूरे मामले की तथ्यात्मक पड़ताल—लापरवाही है, अनदेखी है या फिर निगरानी व्यवस्था पूरी तरह फेल?
पूरा मामला मेडिकल कॉलेज की ओपीडी के तीसरे फ्लोर पर बर्न बार्ड का है।















