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भारतीय मीडिया फाउंडेशन के संस्थापक ए.के. बिंदुसार ने केंद्र एवं राज्य सरकार से की ऐतिहासिक मांग – काशी को घोषित करे पूर्ण शराबबंदी और मांस-मुक्त तीर्थ क्षेत्र, देश-विदेश के विद्वानों ने किया समर्थनBMF News

*भारतीय मीडिया फाउंडेशन के संस्थापक ए.के. बिंदुसार ने केंद्र एवं राज्य सरकार से की ऐतिहासिक मांग – काशी को घोषित करे पूर्ण शराबबंदी और मांस-मुक्त तीर्थ क्षेत्र, देश-विदेश के विद्वानों ने किया समर्थन*।

 

 

*वाराणसी उत्तर प्रदेश।* धर्म, ज्ञान, मोक्ष और संस्कृति की नगरी, बाबा विश्वनाथ की पावन धरती, जहां गंगा की लहरों पर वेद मंत्र गूंजते हैं, जहां हर घाट पर सभ्यता का इतिहास लिखा है, उस विश्व की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी को बचाने के लिए अब एक बड़ी आवाज बुलंद हुई है।

 

भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी के संस्थापक ए.के. बिंदुसार ने उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार से मांग की है कि *विश्व की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी में पूर्ण रूप से शराबबंदी लागू की जाए और खुले में मांस-मछली की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।*

 

यह मांग उन्होंने वाराणसी की सांस्कृतिक गरिमा और धार्मिक महत्व की विस्तृत व्याख्या करते हुए की है।

 

*क्यों जरूरी है वाराणसी में शराबबंदी और मांसबंदी? – ए.के. बिंदुसार ने बताया काशी का असली स्वरूप*

 

बी एम एफ संस्थापक ए.के. बिंदुसार ने कहा कि वाराणसी कोई सामान्य शहर नहीं है। यह शहर नहीं, एक जीवंत परंपरा है।

 

*वाराणसी की खूबियां जो इसे विश्व की सांस्कृतिक राजधानी बनाती हैं -*

 

1. *मोक्ष की नगरी काशी -* कहा जाता है – “काश्यां मरणान् मुक्ति:”। यहां मरने पर मोक्ष मिलता है। यह दुनिया के सबसे प्राचीन जीवित शहरों में से एक है, जिसकी उम्र 5000 साल से भी ज्यादा बताई जाती है।

 

2. *बाबा विश्वनाथ और 12 ज्योतिर्लिंगों का केंद्र -* यहां भगवान शिव विश्वनाथ के रूप में विराजमान हैं। साल भर करोड़ों शिव भक्त यहां दर्शन को आते हैं।

 

3. *गंगा, घाट और ज्ञान की त्रिवेणी -* 84 घाट, गंगा आरती, सुबह-ए-बनारस, और काशी हिंदू विश्वविद्यालय – यह सब वाराणसी को ज्ञान और अध्यात्म की राजधानी बनाते हैं।

 

4. *संगीत, कला और साहित्य की जन्मभूमि -* उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की शहनाई हो, कबीर के दोहे हों, प्रेमचंद की कहानियां हों या तुलसीदास का रामचरितमानस -या तथागत गौतम बुद्ध का प्रथम उपदेश स्थल हो सबकी जड़ें काशी में हैं। यह यूनेस्को द्वारा घोषित *सिटी ऑफ म्यूजिक* भी है।

 

5. *दुनिया के हर धर्म का संगम -* सनातन धर्म एवं हिंदू, बौद्ध, जैन सभी के लिए काशी पूज्य है। सारनाथ में भगवान बुद्ध ने पहला उपदेश दिया था।

 

ए.के. बिंदुसार ने सवाल उठाया – “जब यह शहर पूरी दुनिया को शांति, अहिंसा और सात्विकता का संदेश देता है, तो इसके पवित्र घाटों के पास, मंदिरों के सामने शराब की दुकानें और मांस की दुकानें कैसे चल सकती हैं? विदेशी पर्यटक जब गंगा आरती देखने आते हैं और उसी के बगल में शराब के ठेके और मांस की बदबू देखते हैं तो भारत की क्या छवि बनती है?”

 

*क्या है मांग – बिंदुसार का स्पष्ट पत्र*

 

भारतीय मीडिया फाउंडेशन ने प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी जो स्वयं वाराणसी के सांसद हैं, और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी को संबोधित करते हुए दो सूत्रीय स्पष्ट मांग रखी है –

 

*मांग नंबर 1 – वाराणसी जिले में पूर्ण शराबबंदी लागू हो:* बिहार और गुजरात की तरह वाराणसी को पूर्ण शराबबंदी क्षेत्र घोषित किया जाए। धार्मिक नगरी में शराब की बिक्री और सेवन से अपराध बढ़ता है, युवाओं में नशा बढ़ता है और धार्मिक भावना आहत होती है।

 

*मांग नंबर 2 – मांस-मछली की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध:* काशी में मांस-मछली की दुकानों, स्लॉटर हाउस और बिक्री पर तत्काल रोक लगे। इससे न केवल धार्मिक पवित्रता बनी रहेगी, बल्कि स्वच्छता और स्वास्थ्य भी सुधरेगा।

 

उन्होंने कहा – “हम किसी के रोजगार के खिलाफ नहीं हैं। सरकार इन दुकानदारों को सम्मानजनक पुनर्वास दे, उन्हें शाकाहारी व्यवसाय के लिए लोन दे, लेकिन काशी की आत्मा के साथ खिलवाड़ बंद होना चाहिए।”

 

*समर्थन की लहर – संत समाज से लेकर व्यापारी तक साथ*

 

इस मांग का समर्थन वाराणसी के संत समाज, आम नागरिकों ने भी किया है। सभी का कहना है कि अगर वाराणसी को सच में क्योटो और विश्वस्तरीय सांस्कृतिक शहर बनाना है तो यह कदम उठाना ही पड़ेगा।

 

 

*ए.के. बिंदुसार ने अंत में कहा – “काशी में मांस और शराब नहीं, अब ज्ञान और अध्यात्म का नशा चलेगा। यही हमारे प्रधानमंत्री जी का सपना है और यही योगी जी का संकल्प है। हमें विश्वास है कि दोनों जनप्रतिनिधि इस पवित्र मांग को जरूर पूरा करेंगे।”*

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