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बटेश्वर का काला पन आखिर कब तक , रिपोर्ट शंकर देव तिवारी

बटेश्वर का काला पन आखिर कब तक

 

बाह। ये वो समय था ज़ब बटेश्वर को लेकर अपने पेत्रक क्षेत्र क़े लिए अटल ने कहा था जरूरी नहीं बटेश्वर में कुछ खास तभी होगा ज़ब बटेश्वर का प्रधान मंत्री होगा. उस समय बाह क़े अख़बार बाले आने जाने वाले वीं आई पी से कुछ न कुछ मांग कर बैठते थे. वन चेतना केंद्र, गेस्ट हाउस और बहुउद्देश्ययीय हाल स्वीकृत हुए थे जिनमें बहुद्देश्यीय हाल सांसदीय निधि से होना था जिस दिन रेल लाइन की आधार शिला रखी ग़ई तभी ये तीनों चीजें भी शुरु हुए. मगर ये तीनों ही काम आज ऱख रखाव् क़े अभाव में आज सफ़ेद हाथी साबित हई.

इसके बाद ज़ब अटल का मौत के बाद बहुत कु छ हुआ और हो रहा है.

यहाँ भी वही कहानी न दोहरे तो नई योजनाओं के ऱख रखाव व् ज़ो करिडोर बन रहा है मुख्य मंदिर की हद में ही कारा या गया है जिससे बाढ़ के इलाके में ही हो रहा है.

 

#बटेश्वर की #आस्था के नाम पर …

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बटेश्वर धार्मिक आस्था का एक बड़ा केन्द्र, जहाँ आजकल करोड़ों रुपए की लागत से कॉरिडोर सहित पूरे मन्दिर परिक्षेत्र का #कायाकल्प जारी है, जो इसके #धार्मिक_उन्नयन और सौन्दर्य में चार चाँद लगाएगा।

इसके बारे में बहुत कुछ लिखा जा चुका है।

इसकी महत्ता को देखते हुए 1999 में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व: #अटल_बिहारी_वाजपेयी जी एवं मुख्यमंत्री स्व: #कल्याण_सिंह जी ने यात्रियों के निवास हेतु एक #यात्री_निवास का उद्घाटन किया था।

एक समय यहाँ रुकने के लिए स्थान नहीं मिलता था मगर 25 वर्षों बाद इस यात्री निवास की हालत ये है कि इमारत पूरी #जीर्ण_शीर्ण हो चुकी है इसमें #पशु बाँधे जा रहे हैं… अन्दर शानदार पत्थर बिछे हुए हैं मगर उनकी #आत्मा रो रही है पूरी इमारत तम्बाकू #थूकदान बन चुकी है…

यद्यपि बटेश्वर में ठहरने के लिए बहुत अच्छी धर्मशालाएं हैं… मगर सरकारी पैसे (आम जनता के टैक्स) की दुर्दशा देखकर दुःख होता है।

बाकी यात्रा गण जो प्रकृति प्रेमी हैं वो रूकने के लिए बटेश्वर से 2 km दूर #शौरीपुर जैन मन्दिर के यात्री निवास में भी रुक सकते हैं।

विनोद सावरिया के शब्दों में

परिन्दे घर नया पाकर पुराना तोड़ देते हैं।

नए साथी पुरानों को अधर में छोड़ देते हैं।

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