*नवरात्र विशेष*
*नारी शक्ति की मिसाल बनी आगरा की ममता, लाइब्रेरी खोल संवार रहीं युवाओं का भविष्य*
*- स्वयं सहायता समूह से जुड़कर ‘लखपति दीदी’ ममता ने गांव में खोली आधुनिक लाइब्रेरी*
*- बीते दो साल में लाइब्रेरी में पढ़ने वाले 18 से अधिक ग्रामीण युवाओं को मिली सरकारी नौकरी*
*- प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अब गांव के युवाओं और बेटियों को नहीं जाना पड़ेगा शहर*
*आगरा, 10 अक्टूबर।* शारदीय नवरात्र नारी शक्ति की असीम ऊर्जा और मातृशक्ति के वंदन का पर्व है। इस पावन अवसर पर आगरा के ग्रामीण अंचल से एक ऐसी प्रेरणादायी कहानी सामने आई है, जो ‘नारी सशक्तिकरण’ और ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ के विजन का जीवंत उदाहरण है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (यूपीएसआरएलएम) और योगी सरकार के सहयोग से आगरा के गांव महाव (इरादत नगर) की रहने वाली 36 वर्षीय ममता ने शिक्षा की एक नई अलख जगाई है। उन्होंने अपने गांव में एक आधुनिक डिजिटल ‘सक्सेस लाइब्रेरी’ की स्थापना की है, जो आज दर्जनों ग्रामीण छात्र-छात्राओं के सपनों को उड़ान दे रही है।
*स्वयं सहायता समूह से जुड़कर लिखी सफलता की कहानी*
खेरागढ़ तहसील के महाव गांव में जन्मी ममता का सफर संघर्षों से भरा रहा। वर्ष 2013 में ग्राम ब्रिथला निवासी कृष्णकांत से उनके विवाह के बाद पारिवारिक जिम्मेदारियां बढ़ गईं। लेकिन ममता ने आत्मनिर्भर बनने की ठानी और जुलाई 2020 में यूपीएसआरएलएम के तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़ गईं। अपनी लगन से मार्च 2021 में ‘बीसी सखी’ और फिर सितंबर 2024 में ‘बैंक सखी’ बनने का सफर तय किया। उन्होंने 35 महिलाओं को अपने साथ जोड़ा और क्लिनिंग उत्पाद बनाना शुरू किया। आज ममता शान से ‘लखपति दीदी’ की सूची में शामिल हैं।
*योगी सरकार के सहयोग से साकार हुआ डिजिटल लाइब्रेरी का सपना*
ममता ने महसूस किया कि प्रतिभा होने के बावजूद गांव के बच्चों, विशेषकर बेटियों को पढ़ाई के लिए शहर जाना पड़ता था या संसाधनों के अभाव में पढ़ाई छोड़नी पड़ती थी। इसी कमी को दूर करने के लिए ममता ने गांव में लाइब्रेरी खोलने की योजना बनाई और यूपीएसआरएलएम अधिकारियों से साझा की। विभाग ने सीएलएफ (क्लस्टर लेवल फेडरेशन) से 2 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की। ममता ने अपनी 1 लाख की बचत मिलाकर जुलाई 2024 में ‘सक्सेस लाइब्रेरी’ की नींव रखी। आज यह लाइब्रेरी पूरी तरह वातानुकूलित (एसी) है और बेहतरीन फर्नीचर व वाई-फाई जैसी सुविधाओं से लैस है।
*दो साल में 18 से अधिक युवाओं ने पाई सरकारी नौकरी*
ममता का यह प्रयास रंग ला रहा है। बीते दो वर्षों में इस लाइब्रेरी में पढ़कर 18 से अधिक युवा सरकारी नौकरी पा चुके हैं, जिनमें अग्निवीर, होमगार्ड और पुलिसकर्मी शामिल हैं। मात्र 400 रुपये प्रतिमाह के शुल्क पर 100 से अधिक युवा यहां यूपीएससी, एसएससी, बैंकिंग और रेलवे जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
*’गांव के बच्चों को शहरों में भटकना न पड़े’*
लाइब्रेरी संचालिका ममता ने अपनी सफलता पर कहा, “गांव के युवाओं में आगे बढ़ने का बहुत जज्बा है, लेकिन शांत माहौल और संसाधनों की कमी थी। योगी सरकार और यूपीएसआरएलएम ने मुझ जैसी ग्रामीण महिला पर भरोसा कर आर्थिक मदद दी। आज जब गांव के बेटे-बेटियों को लगन से पढ़ते देखती हूं, तो सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। मेरा लक्ष्य है कि यहां से पढ़कर बच्चे बड़े पदों पर जाएं।”
*लाइब्रेरी से संवर रहा ग्रामीण छात्र-छात्राओं का भविष्य*
यूपी पुलिस की तैयारी कर रहे अभिषेक कहते हैं कि मेरे पिता किसान हैं, शहर जाकर लाइब्रेरी की महंगी फीस देना नामुमकिन था। ममता दीदी की लाइब्रेरी के शांत माहौल में मैं 8-10 घंटे लगातार पढ़ सकता हूं।
12वीं की छात्रा मुस्कान कुशवाहा ने बताया कि लड़कियों को शहर भेजना माता-पिता के लिए चिंता का विषय होता है। अब गांव में ही वाई-फाई वाली लाइब्रेरी मिलने से मैं सुरक्षित माहौल में ऑनलाइन पढ़ाई कर पा रही हूं।
रेलवे की तैयारी कर रहे शिवा यादव ने कहा कि महंगी किताबों का खर्च अब बच गया है। यहां सीनियर छात्रों के साथ पढ़ने से कई डाउट्स क्लियर हो जाते हैं। हमारी जिंदगी बदलने के लिए सरकार और ममता दीदी का बहुत शुक्रिया।














