उत्तर भारत का प्रसिद्ध लक्खी मेला बटेश्वर
बदल गये हैं दिन और मंदिर, आयोजक अंजान, व्योपारी पंहुंचे
बटेश्वर।उत्तर भारत का प्रसिद्ध लक्खी मेला बटेश्वर के दिन तो बदले ही दिख रहे हैं वहीं अब तो मंदिरों के रूप भी बदलते जा रहे हैं.। मेला के कार्यक्रम घोषित नहीं हैं मगर बदली परम्परा के चलते जो समय हो गया था उस पर भी मेला शुरु नहींहुआ है.
उत्तर भारत के प्रसिद्ध बटेश्वर पशु मेले के आयोजन की तारीखों को लेकर अभी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। आगरा जिला पंचायत द्वारा अभी तक इस वर्ष के मेले की आधिकारिक समय-सारणी (शेड्यूल) और तारीखों का औपचारिक एलान नहीं किया गया है।
प्रशासन द्वारा आधिकारिक कार्यक्रम घोषित न होने के कारण व्यापारियों और स्थानीय लोगों में असमंजस जरूर है। हालांकि, जिला पंचायत की टीम मेला स्थल का बारीकी से निरीक्षण कर चुकी है और दुकानों के आवंटन व अन्य व्यवस्थाओं की नाप-तौल पूरी कर प्रस्ताव प्रशासनिक मंजूरी के लिए भेजा जा चुका है।
बटेश्वर मेले की वर्तमान स्थिति और इसके समय में बदलाव की घोषणा नहीं
इस समय क्षेत्र के अधिकांश खेतों में किसानों की फसलें कटी नहीं हैं। चूंकि पशु व्यापारियों के तंबू और पशुओं को रोकने की व्यवस्था इन्हीं खाली खेतों में की जाती है, इसलिए जगह की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
बटेश्वर मेला हर साल मुख्य रूप से कार्तिक (अक्टूबर-नवंबर) के महीने में लगता है और दीपावली के इर्द-गिर्द इसकी रौनक शुरू होती है। जिला पंचायत की तैयारियों के अनुसार, दीपावली के ठीक आस-पास ही इसकी तारीखों की अंतिम घोषणा होने की पूरी संभावना है।
बिना घोषणा के भी पहुंचने लगे हैं व्यापारी
• व्यापारियों का आगमन शुरू: भले ही प्रशासन ने अभी तक पक्की तारीखों का नोटिस जारी नहीं किया है, लेकिन राजस्थान और अन्य राज्यों से पशु व्यापारी अपने पशुओं के साथ बटेश्वर पहुंचने लगे हैं।
• मुख्य द्वार पर डाला डेरा: हाल ही में राजस्थान के दौसा जिले से ऊंट व्यापारी अपने ऊंटों के साथ बटेश्वर आ चुके हैं और खेतों में जगह न मिलने के कारण उन्होंने मेले के मुख्य द्वार के पास ही अपना अस्थाई डेरा जमा लिया है।
मेले का पारंपरिक स्वरूप कैसा रहेगा?
अधिकारियों के अनुसार, तारीखों की घोषणा होते ही मेला हमेशा की तरह तीन मुख्य चरणों में संपन्न कराया जाएगा:
प्रथम चरण (पशु मेला): शुरुआत में ऊंट, घोड़े, गधे और बकरियों का क्रय-विक्रय होगा।
द्वितीय चरण: गाय, बैल व अन्य मवेशियों का बाजार सजेगा।
तृतीय चरण (सांस्कृतिक व धार्मिक मेला): अंतिम चरण में यमुना नदी में मुख्य कार्तिक पूर्णिमा स्नान, दीपदान और रासलीला, दंगल, कवि सम्मेलन जैसे भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।
जैसे ही जिला पंचायत और आगरा प्रशासन द्वारा इस वर्ष की आधिकारिक तारीखों का कैलेंडर जारी किया जाएगा, स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी।
रामसिंह आजाद चरण सिंह यादव स्थनीय नागरिकों ने मेला वायलाज सार्वजनिक करने की मांग की है. जिससे मेला आएजन से स्थनीय लोग वाखिब हो सकें।















