एटा बिग ब्रेकिंग
इलाज से पहले मेडिकल कॉलेज में ओटीपी की अग्निपरीक्षा!
मेडिकल कॉलेज की OPD में मरीज बेहाल, प्राचार्य की निगरानी पर सवाल
एटा मेडिकल कॉलेज की OPD में पर्चा बनवाने के लिए मरीज घंटों लाइन में—आखिर इसकी जिम्मेदारी किसकी?
प्राचार्य की निगरानी में ऐसी डिजिटल व्यवस्था क्यों, जिसमें OTP के इंतजार में मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है?
बुजुर्ग और ग्रामीण मरीजों के लिए क्या है वैकल्पिक व्यवस्था?
क्या हर मरीज के पास स्मार्टफोन और OTP प्राप्त करने की सुविधा होना जरूरी है?
मरीजों का सवाल—अगर OTP नहीं आया तो इलाज कैसे मिलेगा?
क्या मरीज पर्चे के लिए घंटों इंतजार करे या बिना इलाज लौट जाए?
प्राचार्य महोदय से सीधा सवाल—OPD में मरीजों की सुविधा के लिए व्यवस्था लागू की गई है या मरीजों की परेशानी बढ़ाने के लिए?
जब अस्पताल प्रशासन को पता है कि बुजुर्ग और ग्रामीण मरीजों को डिजिटल प्रक्रिया में दिक्कत हो सकती है, तो उनके लिए अलग और आसान व्यवस्था क्यों नहीं?
क्या प्राचार्य स्वयं OPD की व्यवस्था का नियमित निरीक्षण कर रहे हैं?
अगर कर रहे हैं तो मरीजों की यह परेशानी नजर क्यों नहीं आ रही?
पर्चे के लिए लंबी लाइन और OTP का इंतजार—मरीजों को इस अव्यवस्था से कब राहत मिलेगी?
प्राचार्य की निगरानी में चल रही OPD व्यवस्था का जिम्मेदार कौन?
मरीज इलाज कराने आए हैं या OTP का इंतजार करने?
मेडिकल कॉलेज प्रशासन से मरीजों की मांग—OTP प्रक्रिया की समीक्षा हो, वैकल्पिक पर्चा व्यवस्था सुनिश्चित हो और बुजुर्गों व ग्रामीण मरीजों को अनावश्यक परेशानी से राहत मिले।















