*सोनभद्र में ‘खनन माफिया’ का अघोषित राज: पत्रकारिता पर प्रहार और प्रशासन की चुप्पी पर ‘भारतीय मीडिया फाउंडेशन’ ने फूंका बिगुल।*
हर्ष गुप्ता की खासरिपोर्ट।
वाराणसी: सोनभद्र की धरती पर पिछले कई वर्षों से बालू खनन माफिया और अपराधियों का एक ऐसा साम्राज्य कायम है, जिसे शासन-प्रशासन का मौन संरक्षण प्राप्त है। आलम यह है कि जो भी व्यक्ति या पत्रकार इस संगठित भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करता है, उसे इनाम के तौर पर प्रशासन द्वारा ‘फर्जी मुकदमे’ का अवार्ड थमा दिया जाता है।
भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल) के संस्थापक ए.के. बिंदुसार ने इस गिरोहबंदी और प्रशासनिक दमन पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सोनभद्र में चल रहे अवैध खनन के इस खेल में प्रशासनिक अधिकारियों और माफियाओं का एक मजबूत गठजोड़ काम कर रहा है।
‘बोलोगे तो फंसोगे’: भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने का इनाम है FIR
जुगैल थाना क्षेत्र में हाल ही में घटी घटना ने इस पूरे खेल को उजागर कर दिया है। जहाँ एक ओर खनन साइट पर वीडियो बनाने वाले और सच्चाई सामने लाने की कोशिश करने वालों पर आनन-फानन में मुकदमा दर्ज कर दिया गया, वहीं दूसरी ओर महीनों से थानों के चक्कर काट रहे आम पीड़ितों की कोई सुनवाई नहीं होती। ए.के. बिंदुसार ने आरोप लगाया कि अवैध खनन से होने वाली हर महीने करोड़ों की कमाई अधिकारियों की जेबें गर्म कर रही है, जिसके एवज में वे माफियाओं के इशारे पर बेगुनाहों पर मुकदमे दर्ज कर रहे हैं।
भारतीय मीडिया फाउंडेशन की हुंकार: उच्चस्तरीय जांच की मांग
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए भारतीय मीडिया फाउंडेशन के संस्थापक ए.के. बिंदुसार ने संगठन की ओर से कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने अपनी मांगों को दोहराते हुए कहा:
उच्चस्तरीय जांच की मांग: भारतीय मीडिया फाउंडेशन ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) और उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस पूरे प्रकरण की तत्काल एक स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच कराने की अपील की है।
माफियाओं पर बुलडोजर कार्रवाई: ए.के. बिंदुसार ने मांग की है कि जिस तरह से उत्तर प्रदेश में माफियाओं पर नकेल कसी जा रही है, उसी प्रकार सोनभद्र के इन खनन माफियाओं के अवैध साम्राज्य और अकूत संपत्तियों को अर्जित करने वालों पर भी बुलडोजर चलाया जाए।
सभी थाना प्रभारी और अधिकारियों के संपत्ति की स्रोतों की जांच की जाए।
फर्जी मुकदमों की वापसी: पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर दर्ज किए गए सभी फर्जी मुकदमों को तुरंत वापस लिया जाए, ताकि भयमुक्त वातावरण में सच्चाई सामने आ सके।
कलेक्ट्रेट में गूँजी न्याय की मांग,
सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर में सपा सांसद छोटेलाल खरवार के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन और जिलाधिकारी बद्रीनाथ सिंह को सौंपे गए ज्ञापन ने इस आग में घी का काम किया है। सपा के वरिष्ठ नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि खनन क्षेत्रों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई और माफियाओं पर कार्रवाई न की गई, तो जिले में व्यापक जन-आंदोलन शुरू किया जाएगा।
सोनभद्र का प्रशासन अब चौराहे पर खड़ा है। क्या वह खनन माफियाओं की कठपुतली बना रहेगा या फिर कानून का राज स्थापित करेगा? ए.के. बिंदुसार और भारतीय मीडिया फाउंडेशन की यह मांग सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की रक्षा के लिए एक बड़ा आह्वान है। सोनभद्र की जनता अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि दोषियों के खिलाफ कड़ी और ठोस कार्रवाई देखना चाहती है।







