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बिहार के सारण में जंगलराज का नंगा नाच: अश्लीलता का विरोध करने पर बेटी मधु मिश्रा की निर्मम हत्या,  दरिंदे खुलेआम घूम रहे आजाद।

बिहार के सारण में जंगलराज का नंगा नाच: अश्लीलता का विरोध करने पर बेटी मधु मिश्रा की निर्मम हत्या,

दरिंदे खुलेआम घूम रहे आजाद।

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भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी की चेतावनी: प्रशासन ने अविलंब कार्रवाई नहीं की तो होगा बड़ा जन-आंदोलन!

दाउदपुर (सारण) बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सारण जिले के दाउदपुर थाना अंतर्गत शीतलपुर गाँव में एक हृदय विदारक घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। अश्लील गानों का विरोध करना एक परिवार को इतना भारी पड़ा कि उन्हें अपनी लाड़ली बेटी को खोना पड़ा। इस मामले में पुलिस की सुस्त और संवेदनहीन कार्यप्रणाली ने अपराधियों के हौसले बुलंद कर दिए हैं।

ऐसी स्थिति में दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए

क्या है पूरी घटना?

26 अप्रैल 2026 की शाम को निर्भय मिश्रा अपने घर से बाजार जा रहे थे। रास्ते में कुछ उपद्रवी डीजे पर अश्लील गाने बजाकर हुड़दंग मचा रहे थे। निर्भय ने एक जिम्मेदार नागरिक की तरह उनसे केवल इतना आग्रह किया कि “अश्लील गाने न बजाएँ।” बस, इतनी सी बात पर दरिंदों ने उन पर लाठी-डंडे और लोहे की रॉड से जानलेवा हमला कर दिया।

खून की प्यासी भीड़ का तांडव,

जब निर्भय को बचाने उनकी बहन मधु मिश्रा और अन्य ग्रामीण (प्रेम साह एवं संजय साह) पहुँचे, तो हमलावरों ने किसी को नहीं बख्शा। राजेश शाह, कुंदन शाह, चंदन शाह, नंदन शाह, छठू शाह और अमर शाह जैसे नामजद आरोपियों ने मिलकर मधु मिश्रा के सिर पर लोहे की रॉड से वार किया। गंभीर रूप से घायल मधु को पहले सदर अस्पताल ले जाया गया, जहाँ से नाजुक स्थिति देखते हुए उन्हें पटना पीएमसीएच रेफर किया गया, जहाँ इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

 

“पुलिस और सत्ता का मौन, अपराधियों का संरक्षण”: भारतीय मीडिया फाउंडेशन ने खोला मोर्चा।

– हत्यारों की गिरफ्तारी न होने पर भड़के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित बालकृष्ण तिवारी,

घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद, नामजद आरोपी अभी भी कानून की पकड़ से दूर हैं। वे न केवल आजाद घूम रहे हैं, बल्कि पीड़ित परिवार को डराने-धमकाने का प्रयास भी कर रहे हैं। इस मामले में पुलिस की भूमिका बेहद संदेहास्पद और निरंकुश नजर आ रही है।

भारतीय मीडिया फाउंडेशन का कड़ा रुख।

भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी ने इस बर्बर घटना को अत्यंत गंभीरता से लिया है।

यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित बालकृष्ण तिवारी एवं संस्थापक एके बिंदुसार ने बिहार राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन पर तीखा हमला बोला है।

उन्होंने अपने बयान में कहा:

> *”बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली पूर्णतः निरंकुश हो चुकी है। सत्ता के गलियारों में बैठे लोगों का संरक्षण प्राप्त होने के कारण अपराधी बेखौफ हैं। साक्ष्य मौजूद होने के बावजूद गिरफ्तारी न होना, राज्य में कानून के शासन का अंत दर्शाता है। भारतीय मीडिया फाउंडेशन इस बेटी की शहादत को व्यर्थ नहीं जाने देगा। यदि हत्यारों को तुरंत सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया, तो यूनियन पूरे प्रदेश में निर्णायक मोर्चा खोलेगी।”*

> जनता और पत्रकारों से अपील

भारतीय मीडिया फाउंडेशन ने बिहार की जनता, पत्रकार बंधुओं और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ताओं से पुरजोर अपील की है कि वे इस मामले को हर मंच पर उठाएँ। यह केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि बिहार की हर बेटी की सुरक्षा का प्रश्न है।

 

स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सांसद श्री जनार्दन सिंह सिग्रीवाल और विधायक श्री रणधीर सिंह सहित प्रशासनिक अधिकारियों के लिए यह परीक्षा की घड़ी है। क्या वे अपराधियों को बचाएंगे या एक बेटी को न्याय दिलाएंगे? भारतीय मीडिया फाउंडेशन ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक न्याय नहीं मिलता, तब तक यह लड़ाई थमने वाली नहीं है।

पूरा बिहार अब पूछ रहा है—क्या ‘सुशासन’ के दावों के बीच बेटियाँ मरती रहेंगी?

Ronda Faulk
Author: Ronda Faulk

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