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आगरा में ऐतिहासिक राजकीय कैलाश मेला हुआ शुरू, गूंजने लगे ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे, रिपोर्ट शंकर देव तिवारी

*आगरा में ऐतिहासिक राजकीय कैलाश मेला हुआ शुरू, गूंजने लगे ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे*

 

*- महर्षि परशुराम द्वारा स्थापित जुड़वां शिवलिंग के दर्शन के लिए उमड़े लाखों शिवभक्त*

 

*- 5 किलोमीटर के दायरे में सजा भव्य मेला, झूले, स्टॉल और 5000 से ज्यादा भंडारों से सराबोर हुआ माहौल*

 

*- सुरक्षा और सुगम दर्शन के लिए चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात, यमुना घाटों पर गोताखोरों की विशेष ड्यूटी*

 

*आगरा, 16 अगस्त।* श्रावण मास के तीसरे सोमवार को ताजनगरी में ऐतिहासिक और राजकीय ‘कैलाश मेला’ रविवार को पूरी भव्यता, श्रद्धा और उल्लास के साथ शुरू हो गया। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के सुशासन और धार्मिक आस्था के प्रति सम्मान की झलक इस भव्य आयोजन में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। सिकंदरा क्षेत्र में पवित्र यमुना नदी के किनारे बसे प्राचीन कैलाश मंदिर में लाखों की संख्या में शिवभक्त बाबा के दर्शन, रुद्राभिषेक और जलाभिषेक के लिए उमड़ पड़े हैं। ‘बम-बम भोले’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से पूरा शहर शिवमय हो गया है। कोसों दूर सोरों राजघाट से पैदल कांवड़ लेकर आए शिवभक्तों के चेहरे पर थकान की जगह सिर्फ और सिर्फ महादेव के प्रति असीम भक्ति दिखाई दे रही है।

 

रविवार शाम को उ.प्र. लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष राकेश गर्ग और समाजसेवी पूरन डावर ने महाआरती कर इस ऐतिहासिक कैलाश मेले का विधिवत उद्घाटन किया। मध्यरात्रि के बाद तड़के 3 बजे मंगला आरती होते ही कांवड़ियों ने गंगाजल और यमुना जल से महादेव के नीलकंठ का जलाभिषेक शुरू कर दिया।

 

*महर्षि परशुराम से जुड़ा है मंदिर का पौराणिक इतिहास*

कैलाश मंदिर का इतिहास बेहद अनूठा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महर्षि परशुराम ने स्वयं कठोर तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया था और कैलाश पर्वत से लाकर यहां दो शिवलिंग स्थापित किए थे। इसी अद्भुत परंपरा के चलते यहां हर साल श्रावण मास में विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसे योगी सरकार द्वारा राजकीय मेले का दर्जा दिया गया है। आगरा के अलावा राजस्थान, मध्य प्रदेश और हरियाणा से भी हजारों कांवड़िए यहां पहुंचते हैं।

 

*5 किलोमीटर में फैला मेला, झूलों और भंडारों की धूम*

कैलाश मेला करीब 5 किलोमीटर की दूरी तक भव्य रूप से सजा हुआ है। मेले में कई तरह के विशाल झूले, खाने के स्टॉल और खिलौनों की दुकानें सजी हैं। भक्तों के उत्साह को दोगुना करने के लिए जगह- जगह साउंड सिस्टम पर भजनों की गूंज है। शिवभक्तों की सेवा के लिए शहरवासियों द्वारा 5000 से ज्यादा भंडारे लगाए गए हैं, जहां पूड़ी-सब्जी, खीर, छोले और फल बांटे जा रहे हैं।

 

कैलाश मंदिर की दिव्यता का वर्णन करते हुए महंत गौरव गिरी ने बताया कि यह स्थान अत्यंत सिद्ध और महान तपोभूमि है। भगवान परशुराम और उनके पिता महर्षि जमदग्नि को महादेव से मिले जुड़वां शिवलिंग यहां स्थापित हैं। श्रावण के तीसरे सोमवार को यहां साक्षात् भगवान शिव और माता पार्वती का वास होता है। बाबा का विशेष श्रृंगार और फूलों की रंगोली सजाई गई है। इन शिवलिंगों के दर्शन मात्र से जन्म- जन्मांतर के पाप कट जाते हैं। जो भी भक्त सच्चे मन से बाबा को जल, बेलपत्र और भांग अर्पित करता है, महादेव उसकी सभी मुरादें अवश्य पूरी करते हैं।

 

*सुरक्षा और यातायात के कड़े इंतजाम*

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात के कड़े इंतजाम किए हैं। व्यवस्थाओं पर जानकारी देते हुए डीसीपी ट्रैफिक सोनम कुमार ने बताया कि मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसे देखते हुए 16 अगस्त की शाम 4 बजे से शहर में रूट डायवर्जन लागू कर दिया गया है। गुरुद्वारा से ही भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। सभी एंट्री पॉइंट पर पुलिसकर्मियों की विशेष ड्यूटी लगाई गई है। परिवर्तित मार्ग से ही वाहनों को निकाला जाएगा और पूर्व में जारी किए गए सभी नो-एंट्री पास निरस्त रहेंगे। यह व्यवस्था मेले के समापन तक लागू रहेगी।

Ronda Faulk
Author: Ronda Faulk

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