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SRN अस्पताल का नाम ‘अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह’ के नाम पर रखने की मांग, अनिश्चितकालीन धरना सातवें दिन भी जारी, रिपोर्ट शंकर देव तिवारी

SRN अस्पताल का नाम ‘अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह’ के नाम पर रखने की मांग, अनिश्चितकालीन धरना सातवें दिन भी जारी

 

हेरिटेज वॉक में छात्रों ने छात्रों ने जाना कुख्यात मलाका जेल का इतिहास, बलिदान स्थल पर गलत अंकित वर्ष को लेकर प्रशासन से सुधार की मांग

 

प्रयागराज, 11 अगस्त 2026। मोतीलाल नेहरू राजकीय मेडिकल कॉलेज से संबद्ध मंडलीय चिकित्सालय ‘स्वरूप रानी नेहरू’ (SRN अस्पताल) का नाम बदलकर ‘अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह’ के नाम पर रखने की मांग को लेकर महुआ डाबर संग्रहालय परिवार के तत्वावधान में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना मंगलवार को सातवें दिन भी जारी रहा।

 

धरने के तहत मंगलवार सुबह छात्रों और शोधार्थियों ने कुख्यात मलाका जेल परिसर में हेरिटेज वॉक किया। इस दौरान प्रतिभागियों ने जेल से जुड़ी बची हुई ऐतिहासिक निशानियों को देखा और स्वतंत्रता संग्राम के उस दौर को महसूस करने का प्रयास किया। स्थानीय लोगों ने बताया कि मलाका जेल की तत्कालीन एक दीवार आज भी सुरक्षित है, जिसे हेरिटेज वॉक के दौरान प्रतिभागियों ने देखा।

 

हेरिटेज वॉक के दौरान स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय के मुख्य द्वार के सामने अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह को समर्पित पार्क में स्थापित स्तंभ पर उनके बलिदान का वर्ष गलत अंकित होने का मामला भी सामने आया। महुआ डाबर संग्रहालय के निदेशक एवं दस्तावेजी लेखक डॉ. शाह आलम राना ने जिला प्रशासन से मांग की कि अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के बलिदान से संबंधित तिथि और वर्ष को सही कराया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियों तक स्वतंत्रता संग्राम का सही इतिहास पहुंच सके।

 

डॉ. राना ने कहा कि शहर के मध्य स्थित यह स्थान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान क्रांतिकारियों को कैद रखने का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां क्रांतिकारियों को तंग काल कोठरियों में रखा जाता था और उन्हें अमानवीय यातनाएं दी जाती थीं। उनके अनुसार, काकोरी केस के महान क्रांतिकारी अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद 6 अप्रैल 1927 को लखनऊ जेल से मलाका जेल लाया गया था।

 

डॉ. राना ने बताया कि ठाकुर रोशन सिंह करीब आठ महीने तक जेल के दक्षिणी हिस्से में फांसीघर के पास स्थित काल कोठरी में बंद रहे। अंततः 19 दिसंबर 1927 की सुबह उन्होंने हंसते हुए फांसी के फंदे को चूमकर देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि ठाकुर रोशन सिंह के बलिदान के करीब दो दशक बाद देश आजाद हुआ, लेकिन आजादी के बाद भी उनके बलिदान स्थल और स्मृतियों को वह सम्मान नहीं मिल सका, जिसके वे हकदार थे।

 

धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष करते हुए काकोरी केस के महान क्रांतिकारी ठाकुर रोशन सिंह का रक्त प्रयागराज की इसी कुख्यात मलाका जेल की मिट्टी पर गिरा था। आज उसी ऐतिहासिक बलिदान स्थल पर स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय स्थापित है। वक्ताओं का कहना था कि आजादी के बाद इस अस्पताल का नाम अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

 

उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह है कि महान क्रांतिकारी के जन्मदिवस और बलिदान दिवस पर भी उनके स्मारक और बलिदान स्थल पर श्रद्धांजलि देने की समुचित व्यवस्था नहीं है। धरनारत लोगों ने अस्पताल का नाम अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर किए जाने और ऐतिहासिक स्थलों को संरक्षित कर उनके सही इतिहास को सामने लाने की मांग दोहराई।

 

धरने में प्रमुख रूप से डॉ. सुनीता देवी, डॉ. अवनीश सिंह, कमल कुमार पटेल, डॉ. सर्वेश सिंह, निशांत मोदनवाल, अंशुमन, रवि सिंह, प्रियांशु रंजन, कमलेन्द्र सिंह, रोबिन सिंह ठाकुर सहित बड़ी संख्या में छात्र, युवा और नागरिक मौजूद रहे।

Ronda Faulk
Author: Ronda Faulk

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