बस्ती: चकबंदी महाघोटाले ने ली डॉक्टर की जान! सुसाइड नोट में ‘साहबों’ के पापों का कच्चा चिट्ठा उजागर
अफ़सरों और चकबंदी अध्यक्ष की मिलीभगत से हुई ज़मीन की हेराफेरी, तंग आकर डॉ. गणेश श्रीवास्तव ने दी जान
ग्राम सभा कुआं गांव (विक्रमजोत ब्लॉक) दहला: सुसाइड नोट में लिखी भ्रष्ट तंत्र की पूरी दास्तान, इलाके में हड़कंप
[बस्ती, उत्तर प्रदेश – दिनांक: 28/07/2026
[ब्यूरो प्रमुख]
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के विक्रमजोत ब्लॉक अंतर्गत ग्राम सभा कुआं गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने शासन-प्रशासन की ईमानदारी पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। चकबंदी प्रक्रिया में कथित रूप से चल रहे “महाघोटाले” और प्रशासनिक संवेदनहीनता से तंग आकर गांव के प्रतिष्ठित *डॉ. गणेश श्रीवास्तव* ने आत्मघाती कदम उठा लिया है। डॉ. श्रीवास्तव ने जहर खाकर जीवनलीला को समाप्त कर लिया
सूत्रों और स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, डॉ. गणेश श्रीवास्तव ग्राम सभा कुआं में अपनी पुश्तैनी ज़मीन को लेकर काफी समय से परेशान थे। आरोप है कि विक्रमजोत ब्लॉक के संबंधित अधिकारियों और स्थानीय चकबंदी अध्यक्ष की कथित मिलीभगत से उनकी ज़मीन के कागजातों में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई थी। डॉ. श्रीवास्तव लगातार न्याय के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे, लेकिन “अफ़सरशाही” और “भ्रष्ट तंत्र” के आगे उनकी एक न सुनी गई।
आखिरी गवाही: सुसाइड नोट में लिखी “सारी दास्तान”
घटनास्थल पर पुलिस को डॉ. गणेश श्रीवास्तव के पास से एक “सुसाइड नोट” बरामद हुआ है, जो अब इस पूरे मामले का सबसे बड़ा और अहम सबूत है। बताया जा रहा है कि इस नोट में डॉ. श्रीवास्तव ने अपनी मौत का जिम्मेदार उन अधिकारियों और चकबंदी को ठहराया है, लोगो का कहना है कि जमीन की हेराफेरी में चकबंदी अधक्ष्य के बिना कोई अधिकारी हेरा फेरी नही कर सकता जिन्होंने साठगांठ करके उनकी ज़मीन हेरफेर करने का घृणित कार्य किया। सुसाइड नोट में कथित तौर पर उन सभी “दलालों” और “अफसरों” के नाम और उनके काले कारनामों का कच्चा चिट्ठा लिखा है, जिसके कारण डॉक्टर को यह खौफनाक कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा।
एक डॉक्टर द्वारा ज़मीन घोटाले के चलते आत्महत्या करने की खबर फैलते ही विक्रमजोत ब्लॉक से लेकर बस्ती जिला मुख्यालय तक हड़कंप मच गया है। कुआं गांव के ग्रामीण इस घटना से बेहद आक्रोशित हैं और उन्होंने दोषी अधिकारियों और चकबंदी की तत्काल गिरफ्तारी और उनकी संपत्तियों की जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ एक आत्महत्या नहीं, बल्कि व्यवस्था द्वारा की गई “हत्या” है।
पुलिसिया कार्रवाई और उठते सवाल
सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सुसाइड नोट को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है और उसमें नामजद सभी लोगों के खिलाफ गहन जांच की जाएगी।
हालांकि, सवाल यह उठता है कि:
क्या जिले के उच्चाधिकारियों को विक्रमजोत ब्लॉक में चल रहे इस कथित चकबंदी घोटाले की भनक नहीं थी?
चकबंदी अध्यक्ष ने अधिकारियों के साथ मिलकर कई जमीनों को इधर-उधर करने का कार्य कराया है और अफ़सरों की यह कथित “साठगांठ” कितने और किसानों को “कंगाल” कर चुकी है?
क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के “जीरो टॉलरेंस” वाले राज में बस्ती का प्रशासन सो रहा है?
डॉ. गणेश श्रीवास्तव का सुसाइड नोट एक “पीड़ित की आखिरी पुकार” है। अब देखना यह है कि क्या बस्ती प्रशासन दोषियों को सलाखों के पीछे भेजकर इस “मरे हुए डॉक्टर” और उसके परिवार को न्याय दिला पाता है, या यह मामला भी फाइलों के बोझ तले दबकर रह जाएगा।
राज पांडेय









