*आरटीआई में खुलासा: धारा 168 से बाधित जमीन पर हुआ बैनामा, आज संचालित हो रहा पेट्रोल पंप*

_1978 में 0.60 हिस्से की भूमि का हुआ था विक्रय, अभिलेखों में सरकारी बंटवारे या आवंटन का उल्लेख नहीं; तहसील स्तर से कार्रवाई न होने का मामला उठा_
*TS RAJPU5✍️*
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*जलेसर (एटा)।* तहसील जलेसर के बाहर चुंगी क्षेत्र में स्थित एक भूमि पर पेट्रोल पंप के संचालन को लेकर राजस्व अभिलेखों से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला सामने आया है। सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार, गाटा संख्या 2163/4.11 (1.664) में से 0.60 हिस्से की भूमि का वर्ष 1978 में बैनामा किया गया था। उस समय उक्त भूमि उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि सुधार अधिनियम की धारा 168 से बाधित बताई गई थी। इसके बावजूद बैनामे के विरुद्ध तहसील स्तर से कोई कार्रवाई किए जाने की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। वर्तमान में इसी भूमि पर पेट्रोल पंप संचालित है।
यह जानकारी क्षेत्रीय लेखपाल, जलेसर द्वारा सहायक जन सूचना अधिकारी/तहसीलदार जलेसर को भेजे गए पत्र संख्या 3167/टंकक-सू0अ0, दिनांक 02 अप्रैल 2018 में दी गई है। यह सूचना माधवनगर, कस्बा जलेसर निवासी रामवीर सिंह पुत्र हरप्रसाद के 06 जनवरी 2018 को प्रस्तुत आरटीआई आवेदन के जवाब में उपलब्ध कराई गई थी।
*अभिलेखों में दर्ज है 1978 के बैनामे का विवरण*
लेखपाल की ओर से दिए गए जवाब के अनुसार, वर्ष 1978 में गाटा संख्या 2163/4.11, जिसका कुल क्षेत्रफल 1.664 दर्ज है, रघुनंदन और रामशरण पुत्रगण बाबूराम, निवासी नकता कुआं, जलेसर के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज था। उपलब्ध सूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि संबंधित गाटे के संबंध में सरकारी बंटवारे अथवा आवंटन का कोई अभिलेखीय उल्लेख नहीं मिला।
इसी भूमि में से रघुनंदन पुत्र बाबूराम ने 14 अप्रैल 1978 को 0.60 हिस्से का बैनामा कमला देवी पत्नी दिनेश चंद्र तथा रमेश चंद्र पुत्र सूरजवली, निवासी सादाबाद, जिला मथुरा के पक्ष में किया था। लेखपाल के आधिकारिक जवाब में बैनामे के समय भूमि को धारा 168 से बाधित बताया गया है।
*2430 वर्गमीटर भूमि पर संचालित है पेट्रोल पंप*
आरटीआई के जवाब में दी गई जानकारी के मुताबिक, वर्तमान में गाटा संख्या 2163/0.60 पर कमला देवी के नाम से संबंधित पेट्रोल पंप संचालित है। भूमि का क्षेत्रफल 2430 वर्गमीटर बताया गया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, जिलाधिकारी द्वारा निर्धारित 31 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर की सरकारी दर से इसकी कीमत 7 करोड़ 53 लाख 30 हजार रुपये तथा 52 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर की बताई गई बाजार दर से कीमत 12 करोड़ 63 लाख 60 हजार रुपये आंकी गई है।
अभिलेखीय जवाब में यह भी बताया गया है कि बैनामा कराने वाले पक्षकार कमला देवी और रमेश चंद्र की मृत्यु हो चुकी है।
*धारा 168 से बाधित होने के बावजूद कार्रवाई का विवरण नहीं*
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि लेखपाल के जवाब के अनुसार, बैनामे के समय भूमि धारा 168 से बाधित थी, लेकिन तहसील स्तर से उक्त बैनामे के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई। साथ ही भूमि को राज्य सरकार में निहित कराने के लिए भी कोई कदम उठाए जाने का उल्लेख उपलब्ध जवाब में नहीं है।
मामले में अब यह सवाल उठ रहा है कि जब राजस्व अभिलेखों के अनुसार भूमि पर कानूनी प्रतिबंध था, तो वर्ष 1978 में हुए बैनामे के बाद संबंधित अधिकारियों ने नियमानुसार कार्रवाई क्यों नहीं की? क्या उस समय भूमि के विक्रय की वैधानिक स्थिति की जांच की गई थी और यदि की गई थी तो उसका अभिलेख कहां है?
हालांकि, आरटीआई के तहत प्राप्त जवाब अपने आप में बैनामे को अवैध घोषित करने अथवा वर्तमान पेट्रोल पंप के संचालन को गैरकानूनी सिद्ध करने वाला न्यायिक आदेश नहीं है। भूमि की वर्तमान स्वामित्व स्थिति, बैनामे की वैधानिकता, बाद के राजस्व आदेशों और पेट्रोल पंप के संचालन की अनुमति की स्वतंत्र अभिलेखीय जांच आवश्यक है।
अब संबंधित राजस्व अधिकारियों से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराए जाने, मूल बैनामा, खतौनी, खसरा और अन्य राजस्व अभिलेखों का परीक्षण करने तथा धारा 168 के तहत लागू तत्कालीन कानूनी प्रावधानों के अनुसार स्थिति स्पष्ट करने की अपेक्षा है। जांच में अनियमितता प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई किए जाने का सवाल भी महत्वपूर्ण है।
















