*जलेसर में आवासीय प्लाटों पर कब्जे का आरोप, लेखपाल की भूमिका कटघरे में*
_नक्शे में निर्धारित 50 मीटर के बजाय 58 मीटर फ्रंट देने का दावा, जेसीबी से खुदाई जारी; एसडीएम से पैमाइश और कब्जा हटवाने की मांग_
*TS RAJPUT✍️* @all
*जलेसर (एटा), 2 नवंबर।* जलेसर में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बाह्य चुंगी क्षेत्र में आवासीय प्लाटों की भूमि पर कथित अवैध कब्जे के मामले में क्षेत्रीय लेखपाल और स्थानीय भू-माफिया की मिलीभगत के आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि निजी भूमि के निर्धारित फ्रंट में मनमाने ढंग से आठ मीटर की बढ़ोतरी कर आसपास के आवासीय प्लाटों की जमीन पर कब्जा कर लिया गया। पीड़ित आवंटियों ने एसडीएम जलेसर से निष्पक्ष पैमाइश कराकर कब्जा हटवाने की मांग की है, लेकिन शिकायतें लंबित होने के बावजूद विवादित स्थल पर जेसीबी से खुदाई जारी रहने का आरोप है।
प्रभावित आवंटियों द्वारा 31 अक्टूबर 2026 को एसडीएम को दिए गए शिकायती पत्र के अनुसार, गाटा संख्या 1472/2, रकबा 0.162 हेक्टेयर में 80.80 वर्गमीटर के आवासीय प्लाट आवंटित हैं। आवंटियों का कहना है कि पूर्व में इन प्लाटों की पैमाइश कराई जा चुकी थी और मौके पर सीमा दीवारें भी निर्मित थीं। इसके बावजूद गाटा संख्या 1473, रकबा 0.304 हेक्टेयर की भूमि का नक्शे में निर्धारित 50 मीटर के बजाय 58 मीटर फ्रंट दर्शाकर आवासीय प्लाटों की भूमि और सीमा दीवारों को प्रभावित किया गया।
शिकायत में क्षेत्रीय लेखपाल पर भू-माफिया बताए जा रहे आशु ठाकुर पुत्र अखिलेश, निवासी मोहल्ला हथौड़ा, जलेसर के साथ मिलीभगत कर यह लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। संबंधित निजी भूमि अजीम खां पुत्र मुइज्जदीन, निवासी मोहल्ला टैलान, जलेसर के नाम बताई गई है। आवंटियों का आरोप है कि राजस्व अभिलेखों और नक्शे के अनुरूप सीमांकन कराने के बजाय मनमाने तरीके से अधिक फ्रंट दिए जाने से उनके वैध आवासीय अधिकार प्रभावित हुए हैं।
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2 नवंबर को इस संबंध में शिकायत संख्या 40020126021770 और 40020126021765 दर्ज कराई गईं, जिनकी स्थिति लंबित बताई जा रही है। शिकायतों में भी लेखपाल पर निर्धारित सीमा से अधिक फ्रंट दिलाने का आरोप लगाया गया है। वहीं, विवादित स्थल पर इसी दिन जेसीबी से खुदाई किए जाने का फोटो सामने आने से सवाल उठ रहा है कि जब भूमि का सीमांकन और विवाद का निस्तारण नहीं हुआ तो मौके पर निर्माण अथवा खुदाई की कार्रवाई किस आधार पर जारी है।
शिकायत की प्रतियां मुख्यमंत्री, आयुक्त अलीगढ़ मंडल, जिलाधिकारी एटा और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भी भेजी गई हैं। पीड़ितों ने राजस्व विभाग की स्वतंत्र टीम गठित कर गाटा संख्या 1473 की नक्शे के अनुसार पैमाइश कराने, वास्तविक सीमाओं का निर्धारण करने और यदि अवैध कब्जा पाया जाए तो उसे तत्काल हटवाने की मांग की है।
अब सवाल यह है कि आवासीय प्लाटों की सीमा और भूमि को लेकर इतने गंभीर आरोपों के बावजूद राजस्व प्रशासन निष्पक्ष जांच में देरी क्यों कर रहा है? क्या संबंधित लेखपाल की भूमिका की जांच कराई जाएगी या शिकायतें कागजों में ही लंबित रहेंगी? प्रशासन की जिम्मेदारी है कि बिना किसी दबाव के मौके का स्थलीय निरीक्षण कराए, अभिलेखों से वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करे। फिलहाल संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने नहीं आया है।














