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आंध्र प्रदेश स्थानीय निकाय चुनाव : माकपा उम्मीदवारों पर तेदेपा गठबंधन के हिंसक हमलेBMF News

 

 

*आंध्र प्रदेश स्थानीय निकाय चुनाव : माकपा उम्मीदवारों पर तेदेपा गठबंधन के हिंसक हमले*

*(रिपोर्ट : चलापति जीवीएन, अनुवाद : संजय पराते)*

 

आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों की नामांकन प्रक्रिया सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन के समर्थकों द्वारा हिंसा, धमकी और बाधाओं से ग्रस्त रही है। माकपा ने सत्ताधारी पार्टी पर विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने, उनके कागजात छीनने और फाड़ने तथा उम्मीदवारों एवं पार्टी नेताओं पर हमला करने का आरोप लगाया है। इसने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने में विफल रहने के लिए पुलिस और राज्य निर्वाचन आयोग की भी आलोचना की है।

 

नगरपालिकाओं के लिए नामांकन 16 से 18 अक्टूबर तक दाखिल किए गए थे तथा मंडल परिषद प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र (एमपीटीसी) और जिला परिषद प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र (जेडपीटीसी) निर्वाचन क्षेत्रों के लिए 21 से 23 अक्टूबर तक। मरकापुरम, पलनाडु, कुरनूल, कडप्पा, चित्तूर और तिरुपति सहित कई जिलों से हिंसक घटनाओं की सूचना मिली है।

 

*सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप*

 

विपक्षी युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने हिंसा और रुकावटों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था। कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को शिकायतों की जांच करने और यह तय करने का निर्देश दिया कि नामांकन दाखिले का समय बढ़ाया जाए या नहीं। 22 अक्टूबर को आयोग ने चार शहरी स्थानीय निकायों : कडप्पा और तिरुपति निगमों और राजमपेट और म्यदुकुर नगर पालिकाओं के वार्ड में 23 और 24 अक्टूबर को 48 घंटे के लिए नामांकन दाखिले फिर से खोल दिए। उम्मीदवारों की अंतिम सूची 25 अक्टूबर को प्रकाशित की गई।

 

सभी 100 शहरी स्थानीय निकायों में मतदान अब 1 नवंबर के लिए तय किया गया है और मतगणना 3 नवंबर को होगी। माकपा का कहना है कि नई तारीखों के अलावा स्थिति में बहुत कम बदलाव आया है और हिंसा पहले की तरह जारी है।

 

*उम्मीदवारों पर हमले, कागजात नष्ट किए*

 

मरकापुरम क्षेत्र के पामुरु में माकपा उम्मीदवार सैयद शर्मिला को अपना नामांकन दाखिल करने से रोका गया। उनके कागजात छीन लिए गए और फाड़ दिए गए, जिसके बाद उन्होंने शिकायत दर्ज कराई। पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) ने हस्तक्षेप किया और उन्हें रिटर्निंग ऑफिसर के कार्यालय तक पहुंचाया, लेकिन जब वह कतार में इंतजार कर रही थीं, तो टीडीपी समर्थकों ने उन पर फिर से हमला कर दिया और दस्तावेज फाड़ डाले। पुलिस सुरक्षा मिलने के बावजूद वह अपना नामांकन दाखिल नहीं कर पाईं।

 

प्रोड्डातुर में माकपा उम्मीदवार अंजनेयुलु नाइक पर हमला किया गया, जिससे उनकी कलाई की हड्डी टूट गई। बडवेल में उम्मीदवार मोक्षम्मा के कागजात छीन लिए गए और फाड़ दिए गए, तथा क्रोसुरु और कोसिगी में भी ऐसी ही घटनाएं दर्ज की गईं।

 

माकपा के आंध्र प्रदेश राज्य सचिव वी श्रीनिवास राव ने पालनाडू जिला सचिवमंडल सदस्य एस अंजनेयुलु नाइक से भेंट की, जिन पर एमपीटीसी चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने के समय हमला किया गया था।

 

कोमारोलू में माकपा के मरकापुरम जिला समिति के सदस्य अवुलैया पर एमपीडीओ कार्यालय के पास लोगों के एक समूह ने तब हमला किया, जब वे पार्टी के उम्मीदवारों की सहायता कर रहे थे। उनके सिर पर गंभीर चोट आई और वे बेहोश हो गए, जिसके बाद पार्टी के कार्यकर्ता उन्हें गिद्दलूर सरकारी अस्पताल ले गए। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि यह हमला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में हुआ, जिन्होंने तुरंत कोई हस्तक्षेप नहीं किया।

 

चित्तूर ज़िले के एम बंदापल्ली गाँव में माकपा उम्मीदवार एम कांतम पर हमला किया गया और उनके दस्तावेज़ नष्ट कर दिए गए। तिरुपति ज़िले के ओबुलावरिपल्ली मंडल में उम्मीदवार नागीपोगु पेंचलैया को बार-बार हमलों का सामना करना पड़ा और जब वह नया नामांकन दाखिल करने गए, तो एक पुलिस कांस्टेबल साथ रहने के बावजूद उनके दस्तावेज़ फाड़ दिए गए।

 

पालनाडू जिले में नरसारावपेटा आरडीओ कार्यालय में जेडपीटीसी नामांकन दाखिल करने का प्रयास करते समय माकपा उम्मीदवार गंजी माला रवि बाबू, पेंड्याला उमा महेश्वर राव, गुंटुपल्ली बालकृष्ण और ईरू कुमारी पर हमला किया गया। राव और बालकृष्ण घायल हो गए। अंततः उम्मीदवारों ने पुलिस की सहायता से अपने नामांकन दाखिल किए।

 

नकिरीकल्लू में टीडीपी नेता बाजी चौधरी ने रिटर्निंग अधिकारी के कार्यालय के भीतर 18 उम्मीदवारों के नामांकन पत्र छीनकर फाड़ डाले और अधिकारी का मोबाइल फोन भी ले लिया। इस घटना ने चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप और नामांकन दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

 

कुरनूल जिले में, माकपा उम्मीदवार मधुसूदन, पार्टी नेता शिवा और अन्य कार्यकर्ताओं पर जिला परिषद कार्यालय में उस समय हमला किया गया, जब वे नामांकन के लिए आवश्यक नो-ड्यूज प्रमाण पत्र मांग रहे थे। कडप्पा जिले में, माकपा उम्मीदवार गांधी सुनील कुमार को ब्रह्ममगरी मठम स्थित नामांकन केंद्र तक बैरिकेड्स और बाधाओं के कारण पहुंचने नहीं दिया गया। विरोध प्रदर्शन और जिला अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद ही उन्हें पर्चा दाखिल करने की अनुमति मिल पाई।

 

विशाखापत्तनम में यह आरोप लगा कि 14वें वार्ड के वाईएसआरसीपी उम्मीदवार को जबरन और वित्तीय प्रलोभन देकर अपना नामांकन वापस लेने पर विवश किया गया।

 

*माकपा ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की*

 

माकपा राज्य सचिव वी श्रीनिवास राव ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने सत्ताधारी पार्टी पर हार के डर से हिंसा का सहारा लेने और पुलिस पर विपक्षी उम्मीदवारों की रक्षा करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया।

 

पार्टी ने यह भी बताया है कि पलनाडु जिले के कुछ क्षेत्रों में पीठासीन अधिकारियों ने माकपा के प्रत्याशियों के नामांकन स्वीकार करने से इंकार कर दिया, जबकि सत्ताधारी दल के नामांकन स्वीकार किए गए। पार्टी ने पक्षपात के आरोपित अधिकारियों तथा पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट करने वाले पुलिस कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की। उन्होंने पार्टी के नेताओं और उम्मीदवारों पर जातिगत उत्पीड़न तथा हमलों के आरोपितों के विरुद्ध अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई की मांग भी की।

 

कनिगिरी में, पार्टी ने दावा किया कि सत्ताधारी पार्टी के नेता स्क्रुटिनी के दौरान विपक्षी उम्मीदवारों को रोककर निर्विरोध जीत हासिल करने की कोशिश कर रहे थे। राव ने मांग की कि वैध नामांकन स्वीकार किए जाएं और चेतावनी दी कि निष्पक्ष जांच और पर्याप्त सुरक्षा के बिना, चुनाव की विश्वसनीयता खत्म हो जाएगी।

 

*वामपंथी पार्टियों ने हिंसा की निंदा की*

 

23 अक्टूबर को आयोजित एक प्रेस वार्ता में, वामपंथी दलों ने हिंसा की घोर निंदा की। श्रीनिवास राव ने बताया कि तेरह से अधिक जिलों में नामांकन के चरण में ही हिंसा भड़क उठी थी। उन्होंने कहा कि सरकार कानून और व्यवस्था बनाए रखने में पूरी तरह से विफल रही है, और सत्ताधारी टीडीपी गठबंधन दल इसके लिए पूरी तरह जिम्मेदार हैं।

 

उन्होंने आरोप लगाया कि उनका एकमात्र उद्देश्य उम्मीदवारों को नामांकन पत्र दाखिल करने से रोकना था। उम्मीदवारों को नामांकन केंद्रों के बाहर रोका गया, और जो लोग अंदर पहुंचे, उन पर भी हमला किया गया, उनके कागजात फाड़ दिए गए, और कुछ मामलों में हथियारों से मारपीट की गई। यह सब यह झूठा भ्रम पैदा करने के लिए किया गया कि सत्ताधारी दलों ने निर्विरोध सीटें जीत ली हैं।

 

*चुनाव की निष्पक्षता सवालों के घेरे में*

 

माकपा ने सत्ताधारी दल, राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग से शांतिपूर्ण और निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित करने के की मांग की है। पार्टी ने निष्पक्ष जांच, हिंसा के लिए ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और उम्मीदवारों की रक्षा करने में विफल रहने वाले चुनाव अधिकारियों तथा पुलिस कर्मियों की जवाबदेही तय करने की भी मांग की है।

 

ये घटनाएं इस बात पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं कि क्या विपक्षी उम्मीदवार स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने के अपने लोकतांत्रिक अधिकार का आज़ादी से इस्तेमाल कर सकते हैं? राज्य चुनाव आयोग और राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सही नामांकन स्वीकार किए जाएं, उम्मीदवारों को पूरी सुरक्षा मिले, और यह प्रक्रिया बिना किसी डर-धमकी के हो। सत्ताधारी टीडीपी गठबंधन की पार्टियों को हिंसा और डर-धमकी तुरंत बंद करनी चाहिए, और जनता की मांग है कि सरकार शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करे।

 

*(रिपोर्टर माकपा, आंध्रप्रदेश के नेता हैं। अनुवादक अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ़ किसान सभा के उपाध्यक्ष हैं। संपर्क : 94242-31650)*

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