शिक्षक-स्नातक एमएलसी चुनाव में ऐतिहासिक जीत अर्जित करनेवाले ‘पीडीए समुदाय’ के सभी विजयी प्रत्याशियों—
श्रीमती कान्ति सिंह जी (लखनऊ खण्ड स्नातक)
श्री लाल बिहारी यादव जी (वाराणसी खण्ड शिक्षक)
डॉ. आकाश अग्रवाल जी (आगरा खण्ड शिक्षक)
श्री आशुतोष सिन्हा जी (वाराणसी खण्ड स्नातक)
डॉ. मान सिंह यादव जी (झाँसी-प्रयागराज खण्ड स्नातक)
—इन सभी को, उनको जितानेवाले संगठन के सभी कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों व मतदाताओं का हार्दिक आभार और धन्यवाद!
ये एक तरफ़ भाजपा की ‘शिक्षक, शिक्षार्थी व शिक्षा’ विरोधी नीतियों की हार है, तो दूसरी तरफ़ पढ़े-लिखे ‘बेरोज़गार स्नातकों’ का फ़ैसला है। भाजपा ने हर समाज को ‘पीड़ित, दुखी, अपमानित’ किया, इसलिए सभी उत्पीड़ित एक साथ आ गए हैं।
पीडीए का जनाधार अब 95% हो गया है क्योंकि हमें ब्राह्मण समाज ने भी वोट दिया है, व्यापारी समाज ने भी और कायस्थ समाज ने भी। भाजपा के लिए राजनीति सबसे ऊपर है न कि कोई समाज, उन्होंने अपने परंपरागत वोट देनेवाले समाज के लोगों को हराने के लिए हर तरह का हथकंडा अपनाया। भाजपा किसी की सगी नहीं है। इसीलिए ब्राह्मण समाज हो, व्यापारी समाज या कायस्थ समाज, अब सब हमारे साथ हैं। इसीलिए अब हम 95% हैं।
शिक्षकगण और युवाओं का आभार, जिन्होंने वोट दिया, पीडीए प्रहरियों के साथ निगरानी रखी और प्रमाणपत्र तक डटे रहे।
महिला शिक्षकों ने तो कमाल कर दिया है, अगर चुपके से पता किया जाएगा तो पता चलेगा प्रतिशत के हिसाब से हमारे प्रत्याशियों को महिलाओं ने लगभग शत-प्रतिशत वोट दिया है क्योंकि शिक्षिकाओं को भाजपा शासन में सबसे अधिक परेशानी हुई है, उन्हें तो घर के काम भी निपटाने हैं और स्कूल के भी लेकिन भाजपा सरकार ने अब चुनाव और चारे का काम भी दे दिया था।
भाजपा शासन में शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार भी भाजपा के ख़िलाफ़ वोट डालने का एक बड़ा कारण बना। भाजपा ट्रांसफ़र पोस्टिंग का एक अंडरग्राउंड मंत्रालय क्यों नहीं बना लेती है। ये स्कूलों को बंद करने के ख़िलाफ़ भी टीचरों का जनादेश है। स्कूल ही नहीं होंगे तो शिक्षक क्या करेंगे।
युवक-युवती स्नातकों ने बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ वोट दिया है। भाजपा राज में बेरोज़गारी आर्थिक कारणों से नहीं, बल्कि भाजपाई साज़िश की वजह से है। भाजपाई अपने खरबपति दोस्तों के लिए डिलेवरी पर्सन पैदा करना चाहते हैं। यहाँ तक कि ये देश की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ कर रहे हैं। इस सरकार में न नौकरी आएगी, न भर्ती इसीलिए भाजपा को हमेशा के लिए हटाना ही युवाओं के भविष्य को उज्ज्वल बनाने का एकमात्र उपाय है।
इस बार तो बहुत सारे पत्रकार बंधुओं ने भी, पत्रकार होने का दायित्व निभाया और बहुत अच्छी और सच्ची रिपोर्टिंग की है। Main Street Media के पत्रकारों ने अपनी भूमिका बख़ूबी निभाई है। हम उन सबके भी आभारी हैं।
एक दिन हमने कहा था कि जिस दिन विधानसभा चुनावों की घोषणा होगी, उसी दिन भाजपा हार जाएगी, क्योंकि हार के डर से भाजपा में भगदड़ मच जाएगी और भाजपा बिखर जाएगी, लेकिन विधान परिषद के चुनाव के नतीजों ने ही वह काम कर दिया है। भाजपा ही नहीं, उनके सहयोगी दलों के लोग भी आज ही हवा का रुख देखकर गूगल पर ‘19, विक्रमादित्य मार्ग, लखनऊ’ का रास्ता ढूँढ़ने लगे हैं,
जो गूगल मैप पर पूरी तरह लाल दिख रहा है।
दरअसल हम 5 सीट नहीं, 50 ज़िले जीते हैं।
वो छह सीट ‘छल’ से जीते हैं, हम ‘जन-बल’ से जीते हैं। भाजपाइयों के सारे गढ़ ही, गड़बड़ा गये हैं।
वो प्रधान-क्षेत्र भी हारे है, प्रयाग-क्षेत्र भी और राजधानी भी लेकिन सारे जुगाड़ लगाकर ‘मुख्य-क्षेत्र’ की सीट बचा ली क्योंकि ‘उन्हें वहीं लौटकर जाना है। वहीं उनका ठिकाना है।’
MLC के चुनाव में जनता ने बुलडोज़र को पार्किंग में खड़ा कर दिया है, MLA के चुनाव में म्यूजियम में भेज देगी।
विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने ‘चंदा-चढ़ावा-दान’ चोरों का हाफ़ एनकाउंटर कर दिया है, विधानसभा चुनाव के नतीजे बाक़ी की कसर पूरी कर देंगे।
भाजपा के संगी-साथी इन परिणामों के बाद अपना अपना पुराना दीपक साफ़ कर रहे हैं, क्योंकि अब वो ‘दीया’ लेकर भी ढूँढेंगे तो भी विधान सभा के लिए प्रत्याशी नहीं मिलेंगे।
ये पीडीए की सजगता और एकजुटता की जीत है, जो 2027 में सरकार बनाने की ‘निर्णायक नींव’ बनाएगी।
हम चौबीस-छब्बीस जीते हैं, हम सत्ताइस भी जीतेंगे!
पुन: सबका आभार!
आपका,
अखिलेश यादव
राष्ट्रीय अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी















