*सार्वजनिक तालाब और ऊसर भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप, ग्रामीणों का रास्ता बंद; गंदे पानी से होकर स्कूल जाने को मजबूर बच्चे*

_भारतीय किसान यूनियन (भानु) ने जिलाधिकारी से की शिकायत, अवैध निर्माण ध्वस्त कराकर तालाब की जमीन कब्जामुक्त कराने और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग_
*तुर्रम सिंह पत्रकार*
*31 अक्टूबर 2026*
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*एटा।* जनपद में सार्वजनिक संपत्तियों पर अवैध कब्जों का मामला एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। तहसील जलेसर के थाना अवागढ़ क्षेत्र के ग्राम विनायक, पोस्ट जरानी कलां, मौजा टिकाथर में सार्वजनिक तालाब, ऊसर भूमि और जल निकासी से संबंधित भूमि पर कथित अवैध पक्का निर्माण कर कब्जा किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ लोगों द्वारा राजस्व अभिलेखों में सार्वजनिक उपयोग के लिए दर्ज भूमि पर निर्माण कराकर गांव की वर्षों पुरानी जल निकासी व्यवस्था को बाधित कर दिया गया है। इससे पूरे गांव में जलभराव, गंदगी और आवागमन की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। हालात इतने खराब बताए जा रहे हैं कि स्कूली बच्चों को विद्यालय जाने के लिए गंदे पानी और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ रहा है।
इस संबंध में भारतीय किसान यूनियन (भानु) के राष्ट्रीय मुख्य महासचिव शिव प्रताप सिंह ने 31 अक्टूबर 2026 को जिलाधिकारी एटा को शिकायती पत्र देकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन ने शिकायत में संबंधित भूमि की पैमाइश, राजस्व अभिलेखों के आधार पर स्थलीय जांच और अवैध निर्माण को हटवाकर सार्वजनिक भूमि को कब्जामुक्त कराने की मांग उठाई है।
*80 वर्षों से तालाब के रूप में दर्ज भूमि पर कब्जे का आरोप*
शिकायती पत्र के अनुसार ग्राम विनायक, मौजा टिकाथर में गाटा संख्या 723/0-146, 724/0-182, 725/0-200 तथा 726/0-69 की भूमि सार्वजनिक ऊसर, तालाब, परिक्रमा मार्ग एवं जल निकासी से संबंधित बताई गई है। आरोप है कि संबंधित भूमि लगभग 80 वर्षों से तालाब एवं पोखर के रूप में उपयोग में रही है और पूरे गांव के पानी की निकासी इसी व्यवस्था के माध्यम से होती रही है।
शिकायत में खड़क सिंह पुत्र रामदयाल, लाइक सिंह पुत्र रामदयाल, लोकपाल पुत्र रामदयाल सहित अन्य व्यक्तियों पर सार्वजनिक भूमि पर कथित रूप से अवैध पक्का निर्माण कर कब्जा करने का आरोप लगाया गया है। संगठन का कहना है कि इस कथित अतिक्रमण से सार्वजनिक भूमि का मूल स्वरूप प्रभावित हुआ है और गांव की प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था लगभग ठप हो गई है।
*जलभराव से ग्रामीण बेहाल, बच्चों की सुरक्षा पर भी खतरा*
शिकायत में गांव की बदहाल स्थिति का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि जल निकासी का रास्ता अवरुद्ध होने से गांव के रास्तों और सार्वजनिक स्थानों पर लगातार पानी भरा रहता है। विद्यालय जाने वाले बच्चों के लिए दूसरा रास्ता उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें गंदे पानी और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है। इससे बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर खतरा बना हुआ है।
इसके अलावा जलभराव और गंदगी के कारण गांव में संक्रामक बीमारियां फैलने की आशंका जताई गई है। ग्रामीणों को अपने खेतों और अन्य निजी कार्यों के लिए आवागमन करने में भी भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। आरोप है कि सार्वजनिक तालाब की भूमि पर अतिक्रमण ने केवल राजस्व व्यवस्था को ही प्रभावित नहीं किया, बल्कि पूरे गांव के जनजीवन को संकट में डाल दिया है।
*राजस्व अभिलेखों में दर्ज सार्वजनिक भूमि पर निर्माण कैसे हुआ?*
इस मामले में सबसे गंभीर सवाल यह है कि यदि संबंधित भूमि वास्तव में राजस्व अभिलेखों में तालाब, ऊसर और सार्वजनिक उपयोग के लिए दर्ज है, तो उस पर पक्का निर्माण किस आधार पर कराया गया? क्या निर्माण से पहले राजस्व विभाग ने भूमि की स्थिति का सत्यापन किया था? क्या संबंधित अधिकारियों को इस कथित अतिक्रमण की जानकारी नहीं थी? यदि जानकारी थी तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
सार्वजनिक तालाब और जल निकासी की भूमि पर अतिक्रमण का मामला केवल दो पक्षों के बीच निजी विवाद नहीं माना जा सकता। यह ग्रामीणों के सामूहिक हित, पर्यावरण, जल निकासी और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। ऐसे मामलों में राजस्व अभिलेखों की अनदेखी और प्रशासनिक निष्क्रियता ग्रामीणों की समस्याओं को और गंभीर बना सकती है।
*जिलाधिकारी से मौके पर जांच और अवैध निर्माण ध्वस्त कराने की मांग*
भारतीय किसान यूनियन (भानु) ने जिलाधिकारी से मांग की है कि शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संबंधित राजस्व एवं प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर भेजकर निष्पक्ष स्थलीय निरीक्षण कराया जाए। राजस्व अभिलेखों के आधार पर गाटा संख्या की पैमाइश कराकर सार्वजनिक भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए। यदि जांच में अवैध कब्जा और पक्का निर्माण प्रमाणित होता है तो नियमानुसार उसे तत्काल हटवाकर भूमि को मूल सार्वजनिक स्वरूप में बहाल कराया जाए।
साथ ही संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में सार्वजनिक संपत्तियों पर दोबारा कब्जा करने का दुस्साहस न हो। संगठन ने गांव की बाधित जल निकासी व्यवस्था को तत्काल बहाल कराने की भी मांग की है।
*अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी ग्रामीणों की निगाहें*
गांव के लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि सार्वजनिक तालाब और जल निकासी की भूमि को कथित अतिक्रमण से कब मुक्त कराया जाएगा। क्या प्रशासन बच्चों को गंदे पानी से होकर विद्यालय जाने की मजबूरी से निजात दिलाएगा या शिकायत भी अन्य मामलों की तरह सरकारी फाइलों में दबकर रह जाएगी? अब जिलाधिकारी और राजस्व विभाग की जिम्मेदारी है कि शिकायत पर केवल कागजी कार्रवाई न हो, बल्कि निष्पक्ष जांच कराकर मौके पर ठोस कार्रवाई की जाए।















